
Devendra Nath Mahto Biography: झारखंड में 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सिर्फ परीक्षा तक सीमित नहीं रह गया है। भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के आरोपों के बीच छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो आंदोलन का सबसे चर्चित चेहरा बन चुके हैं। पहले धरना और फिर आमरण अनशन के जरिए उन्होंने परीक्षा रद्द करने, निष्पक्ष जांच और पारदर्शी भर्ती व्यवस्था की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है। जानिए देवेंद्रनाथ महतो कौन हैं? और क्या हैं स्टूडेंट्स की मांगे।
देवेंद्र नाथ महतो रांची जिले के राहे प्रखंड के कापीडीह गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने साल 2006 में दसवीं, 2008 में इंटर, 2017 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय से संस्कृत में ग्रेजुएशन किया। इसके बाद कुरमाली भाषा में पीजी और बीएड की पढ़ाई भी पूरी की। छात्र जीवन से ही वे शिक्षा, भर्ती और युवाओं के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं।
साल 2015 में नियोजन नीति के विरोध से उन्होंने अपने आंदोलनों की शुरुआत की। इसके बाद छात्रवृत्ति, JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर लगातार आंदोलन करते रहे। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव भी लड़ा, जहां उन्हें करीब 1.48 लाख वोट मिले। बाद में सिल्ली विधानसभा सीट से भी चुनाव मैदान में उतरे।
14वीं JPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के आरोप सामने आने के बाद उन्होंने पहले धरना शुरू किया और बाद में आमरण अनशन पर बैठ गए। बाद में सोनम वांगचुक के आग्रह पर उन्होंने जल ग्रहण किया, लेकिन आंदोलन जारी रखने की बात कही।
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देवेंद्र नाथ महतो और आंदोलनकारी अभ्यर्थियों की प्रमुख मांग है कि 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को रद्द किया जाए और पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाए। JSSC CGL और अन्य भर्ती परीक्षाओं में सुधार की मांगें हैं।
छात्रों का कहना है कि केवल CID जांच पर्याप्त नहीं है। वे पूरे मामले की CBI और ED से जांच कराने तथा फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई की मांग कर रहे हैं।
आंदोलनकारियों ने परीक्षा आयोजित करने वाली कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने और भविष्य की परीक्षाएं बेहतर ट्रैक रिकॉर्ड वाली एजेंसियों से कराने की मांग उठाई है।
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अनशन पर बैठे अभ्यर्थियों का कहना है कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि भर्ती व्यवस्था में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ है।
JPSC अध्यक्ष एल. ख्यांगते इस्तीफा दे चुके हैं और CID अब तक 11 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इसके बावजूद आंदोलनकारी इसे पर्याप्त कार्रवाई नहीं मान रहे।
समय के साथ छात्र आंदोलन दो अलग-अलग मंचों में बंट गया है। एक पक्ष देवेंद्र नाथ महतो के साथ है, जबकि दूसरा समूह अलग रणनीति के साथ प्रदर्शन कर रहा है।
आंदोलन का मूल संदेश यही है कि युवाओं का विश्वास तभी लौटेगा, जब भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होगी और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच के बाद ठोस कार्रवाई होगी। फिलहाल छात्र अपनी मांगों पर अड़े हैं और आंदोलन जारी है।
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