3 दिन की भूख हड़ताल के बाद आखिर देवेंद्र महतो ने पानी क्यों पिया? सोनम वांगचुक की एक अपील ने बदला फैसला, लेकिन झारखंड में JPSC-JSSC आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ।

रांची: झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच बुधवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। JPSC, JSSC CGL और अन्य भर्ती परीक्षाओं में सुधार की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने तीसरे दिन पानी पी लिया। हालांकि उन्होंने साफ कर दिया कि यह उनके आंदोलन का अंत नहीं है। महतो ने कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगें नहीं मानती, तब तक वे अन्न ग्रहण नहीं करेंगे। उनके इस फैसले के पीछे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भावुक अपील को अहम वजह माना जा रहा है।

10 मिनट की वीडियो कॉल में क्या बोले सोनम वांगचुक?

भूख हड़ताल के दौरान महतो की बिगड़ती सेहत को देखते हुए सोनम वांगचुक ने उनसे करीब 10 मिनट तक वीडियो कॉल पर बात की। उन्होंने छात्रों के आंदोलन के प्रति अपना समर्थन जताया और महतो से कम से कम पानी पीने की अपील की। वांगचुक ने कहा कि लंबी लड़ाई लड़ने के लिए स्वास्थ्य का ध्यान रखना जरूरी है। अपील के बाद महतो ने पानी पीने का फैसला किया, लेकिन दोहराया कि भोजन तब तक नहीं करेंगे, जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती। उन्होंने वांगचुक से रांची आकर छात्रों से मिलने का भी अनुरोध किया।

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आंदोलन तेज, सरकार पर बढ़ा दबाव

रांची में छह छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारी 14वीं JPSC परीक्षा रद्द करने, JPSC और JSSC में व्यापक सुधार तथा कथित परीक्षा गड़बड़ियों की CBI या राज्य के बाहर के सेवानिवृत्त हाई कोर्ट जजों की स्वतंत्र समिति से जांच कराने की मांग कर रहे हैं। आंदोलन के समर्थन में तिरंगा मार्च निकालने की भी तैयारी चल रही है। छात्र नेताओं का कहना है कि सरकार की ओर से संतोषजनक कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।

सरकार का भरोसा, जांच जारी

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि सरकार अभ्यर्थियों की मांगों पर गंभीरता से विचार कर रही है और उचित समय पर फैसला लिया जाएगा। वहीं झारखंड CID अब तक परीक्षा गड़बड़ी मामले में 14 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। बढ़ते विरोध के बीच JPSC ने संयुक्त सिविल सेवा मुख्य परीक्षा भी स्थगित कर दी है। दूसरी ओर, CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी आंदोलन का समर्थन जताते हुए कहा कि उनका संगठन फिलहाल चुनावी राजनीति नहीं, बल्कि युवाओं की आवाज़ उठाने वाले प्रेशर ग्रुप के रूप में काम करेगा। अब सभी की नजर सरकार के अगले कदम और आंदोलन की आगामी रणनीति पर टिकी है।

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