
Harsh Dubey NEET: NEET-UG 2026 को लेकर चल रही बहस के बीच एक नाम तेजी से सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोर रहा है- हर्ष दुबे। खुद को कई बार NEET परीक्षा दे चुका अभ्यर्थी बताने वाले हर्ष ने मेडिकल एडमिशन, आरक्षण नीति और काउंसलिंग सिस्टम को लेकर अपनी बात सार्वजनिक मंचों पर रखी। इसके बाद उनके वीडियो वायरल होने लगे और सोशल मीडिया पर 'Reservation Hatao Andolan (RHA)' नाम से चल रहे अभियान को भी नई चर्चा मिल गई। समर्थक उन्हें सामान्य वर्ग के छात्रों की आवाज बता रहे हैं, जबकि दूसरी ओर आरक्षण के पक्ष में खड़े लोग उनके विचारों से असहमति जता रहे हैं। यही वजह है कि हर्ष दुबे अब सिर्फ एक छात्र नहीं, बल्कि NEET से जुड़ी राष्ट्रीय बहस का चर्चित चेहरा बन गए हैं।
हर्ष दुबे खुद को NEET की तैयारी करने वाला छात्र बताते हैं। टीवी डिबेट और सोशल मीडिया पर उन्होंने कहा कि वह कई बार NEET परीक्षा में शामिल हो चुके हैं, लेकिन हर बार मेडिकल कॉलेज की सीट से कुछ अंकों के अंतर से चूक गए। उनका दावा है कि चार अलग-अलग प्रयासों में वह कट-ऑफ के बेहद करीब पहुंचे, लेकिन MBBS में प्रवेश नहीं मिल सका। जबकि आरक्षण पर कई छात्रों को एडमिशन मिल गया। अपने इसी अनुभव के बाद उन्होंने मेडिकल एडमिशन प्रक्रिया पर सवाल उठाने शुरू किए।
हर्ष दुबे का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर पर एक ही परीक्षा होने के बावजूद अलग-अलग राज्यों में मेडिकल सीटों के लिए कट-ऑफ में बड़ा अंतर देखने को मिलता है। उनके मुताबिक इससे कई अभ्यर्थियों को समान अंक होने के बावजूद अलग-अलग परिणाम मिलते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि काउंसलिंग प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और समान बनाने पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए।
आरक्षण को लेकर भी उन्होंने अपनी राय रखी। उनका कहना है कि सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों की चुनौतियों पर भी पर्याप्त चर्चा नहीं होती। किसी के पास मर्सिडीज है लेकिन उसके नाम के साथ SC लगा है तो उसे एडमिशन मिल जाता है, वहीं मेरे पापा किसान हैं लेकिन मैं जनरल कैटेगरी से हूं इसलिए मेरा एडमिशन नहीं होता। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि भारत में आरक्षण व्यवस्था सामाजिक न्याय और ऐतिहासिक असमानताओं को दूर करने के उद्देश्य से लागू संवैधानिक व्यवस्था है और इस पर समाज में अलग-अलग मत मौजूद हैं।
हर्ष दुबे के वायरल वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर सक्रिय Reservation Hatao Andolan (RHA) अभियान की भी चर्चा बढ़ी। इस अभियान का संदेश "Educate, Agitate, Organize" और नारा "सारी जाति एक समान, मेरा बस ये देश महान" बताया जाता है। अभियान से जुड़े लोग आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा और मेडिकल एडमिशन सिस्टम में बदलाव की मांग करते हैं। हालांकि, इस अभियान के दावों और मांगों पर देशभर में अलग-अलग राय देखने को मिल रही है।
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हर्ष दुबे का कहना है कि छात्रों की समस्याओं का समाधान केवल राजनीतिक बयान या इस्तीफों से नहीं होगा। उनके अनुसार सरकार को सीधे NEET अभ्यर्थियों से संवाद करना चाहिए और परीक्षा व काउंसलिंग प्रक्रिया में सुधार पर विचार करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि साल में सिर्फ एक बार होने वाली परीक्षा में किसी एक दिन की खराब स्थिति पूरे साल की मेहनत पर भारी पड़ सकती है।
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हर्ष दुबे के बयानों के बाद सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंटा दिखाई दिया। एक वर्ग ने उनके अनुभवों को सामान्य वर्ग के छात्रों की वास्तविक परेशानी बताया, जबकि दूसरे वर्ग ने कहा कि आरक्षण को केवल कट-ऑफ के नजरिए से नहीं देखा जा सकता क्योंकि इसका उद्देश्य सामाजिक प्रतिनिधित्व और समान अवसर सुनिश्चित करना है। फिलहाल इतना तय है कि हर्ष दुबे का नाम अब NEET, मेडिकल एडमिशन, काउंसलिंग सिस्टम और आरक्षण पर चल रही राष्ट्रीय चर्चा का अहम हिस्सा बन चुका है।
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