CJP Latest News : दिल्ली के जंतर मंतर पर CJP का सफल आंदोलन में रत्ना सिंह का अहम रोल था। जिन्हें कॉकरोज जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दिपके की राइट हैंड कहा जाता है। जो अपनी बात दमदारी से रखने के लिए जानी जाती हैं। पेश से वह एक वकील भी हैं।
कॉकरोच जनता पार्टी ने सोमवार शाम एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। जिसमें उन्होंने मोदी सरकार को चेतावनी दी कि अगर देशभर में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस नहीं ली तो फिर से जंतर मंतर पर हड़ताल की जाएगी। क्योंकि सरकार समझौते का उल्लंघन कर रही है। रात करीब 1 बजे सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास और रत्ना सिंह ने लाइव आकर पूरा मामला बताया। सोशल मीडिया पर दोनों की बातचीत का वीडियो वायरल हो रहा है। तो कई लोगों को पता नहीं है कि आखिर कौन हैं रत्ना सिंह? तो आइए जानते हैं इनके बारे में...
रत्ना सिंह हैं CJP की प्रवक्ता
सीजेपी के फाउंडर अभिजीत दिपके ने कॉकरोच जनता पार्टी बनाने के बाद सबसे पहले तीन लोगों को पार्टी का प्रवक्ता बनाया था, जिनमें सौरव दास, आशुतोष अमित दाहिया मुख्य प्रवक्ता की भूमिका में थे। इसके बाद 26 जून को पार्टी ने चार महिला प्रवक्ताओं की घोषणा की जिनमें रत्ना सिंह समेत तीन महिलाएं थीं।
सीजेपी से पहले क्या करती थीं रत्ना सिंह
बता दें कि रत्ना सिंह सिर्फ एक कॉकरोच जनता पार्टी की प्रवक्ता नहीं है, उनका एक शानदार करियर है। जो युवाओं के लिए सीजेपी में आई हैं। वह एक लीगल जर्नलिस्ट और देश की जानी मानी वकील हैं। वर्तमान में वो दिल्ली हाई कोर्ट में प्रैक्टिस कर रही हैं। इसके साथ ही रत्ना कई बड़े प्लेटफॉर्म्स पर काम कर चुकी हैं।
क्यों कहा जाता है रत्ना सिंह को सीजेपी का रणनीतिकार?
रत्ना सिंह, कॉकरोच जनता पार्टी की उन 8 लोगों में शामिल हैं जो, कोर कमेटी के अहम हिस्सा हैं। वह पार्टी की की प्लानिंग से लेकर लीगल वर्क और मीडिया ब्रीफिंग, प्रेस कॉन्फ्रेंस और कई काम करती हैं। जंतर मंतर पर हुए सीजेपी के आंदोलन में चाहे बात मंच संचालन और मीडिया से बातचीत की हो या फर सोशल मीडिया पर पोस्ट की हो यहां तक की सीजेपी आंदोलन में आगे क्या करने वाली यह सारी रणनीति बनाने में रत्ना सिंह की अहम भूमिका रही है।
CJP की कोर कमेटी में रत्ना सिंह
बता दें कि कॉकरोच जनता पार्टी की आधिकारिक प्रवक्ता टीम में रत्ना सिंह के साथ. सौरव दास, आशुतोष रांका, आफरीन नवाज, दीपक बलियान और वैष्णवी गौर के नाम शामिल है। जिन्होंने टीम वर्क करके आंदोलन को सफल बनाया और जिसकी चर्चा सिर्फ भारत ही नहीं, विदेश में भी हुई। उनके जिद और जज्बे से मोदी सरकार को आखिरकार झुकना पड़ा और अंत में धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो गया।


