Dharmendra Pradhan Resignation: NEET पेपर लीक विवाद में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। दावा है कि सरकार उन्हें बचाना चाहती थी, लेकिन CJP ने ऑफर ठुकरा दिया।
Dharmendra Pradhan Resignation Inside Story: NEET पेपर लीक विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब एक बड़ा राजनीतिक खुलासा सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार ने अंतिम समय तक उन्हें कैबिनेट में बनाए रखने की कोशिश की थी। इसके लिए केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ हुई बैठक में एक अहम प्रस्ताव भी रखा गया, लेकिन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। बताया जा रहा है कि सरकार ने शिक्षा मंत्रालय से हटाकर धर्मेंद्र प्रधान को कोई दूसरा मंत्रालय देने का विकल्प रखा था। हालांकि, CJP ने साफ कर दिया कि उसकी एकमात्र मांग शिक्षा मंत्री के पद से नहीं, बल्कि कैबिनेट से पूरी तरह इस्तीफा है।
सरकार का ऑफर क्या था?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शनिवार को CJP के प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह से हुई। बैठक के दौरान सरकार की ओर से सुझाव दिया गया कि धर्मेंद्र प्रधान को मंत्रिमंडल से हटाने के बजाय उनका विभाग बदल दिया जाए। सरकार का तर्क था कि किसी मंत्री को हटाना या उनका मंत्रालय बदलना प्रधानमंत्री का विशेषाधिकार है। लेकिन CJP ने इस प्रस्ताव को तुरंत ठुकरा दिया। हालांकि, सरकार की ओर से इन दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि सार्वजनिक रूप से नहीं की गई है।
CJP ने क्यों नहीं माना समझौता?
सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि CJP का कहना था कि NEET पेपर लीक विवाद के बाद जनता का भरोसा बहाल करने के लिए सिर्फ मंत्रालय बदलना पर्याप्त नहीं होगा। पार्टी ने सरकार से साफ शब्दों में कहा कि वह किसी भी स्थिति में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से कम पर सहमत नहीं होगी। इसके बाद घटनाक्रम तेजी से बदला और धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफे के बाद संसद में 'हीरो' जैसा स्वागत
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सोमवार को संसद परिसर में एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली। NDA सांसद मकर द्वार पर पहले से मौजूद थे और उन्होंने धर्मेंद्र प्रधान का गर्मजोशी से स्वागत किया। संसद पहुंचने पर उन्हें साथ लेकर अंदर गए और सम्मान के तौर पर उन्हें पारंपरिक टोपी भी पहनाई। इस पूरे घटनाक्रम को भाजपा की ओर से धर्मेंद्र प्रधान के प्रति समर्थन के संदेश के रूप में देखा गया।
संसद में विपक्ष का प्रदर्शन
इसी दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा समेत विपक्षी नेताओं ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया। विपक्ष ने NEET आंदोलन के दौरान छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया और गृह मंत्री अमित शाह से माफी मांगने की मांग की। संसद के बाहर यह राजनीतिक टकराव उस समय देखने को मिला, जब अंदर पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा की तैयारी चल रही थी।
जयराम रमेश और धर्मेंद्र प्रधान के बीच क्या बातचीत हुई?
संसद परिसर में कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात की। बताया जाता है कि जयराम रमेश ने उनसे कहा, 'ऐसा होता है।' इस पर धर्मेंद्र प्रधान ने जवाब दिया, 'कुछ नहीं हुआ। मैं AC रूम एक्टिविस्ट नहीं, स्ट्रीट फाइटर हूं।' उनकी यह टिप्पणी अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है।
NEET विवाद के बाद क्यों बढ़ा दबाव?
नीट पेपर लीक विवाद के बाद देशभर में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। आंदोलन का नेतृत्व CJP ने किया और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को अपनी प्रमुख मांग बनाया। इसी बीच सरकार ने परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 भी संसद में पेश किया है। सरकार का कहना है कि इससे पेपर लीक जैसे संगठित अपराधों पर सख्त कार्रवाई की जा सकेगी।


