Havells Ice Cream: थाईलैंड के एक बिजनेसमैन सिरिपोंग अक्करश्रीयुक् ने अपनी मशहूर 'हैवेल्स आइसक्रीम' कंपनी को बेचने का फैसला किया है। वो 47 करोड़ रुपये की इस कंपनी को बेचकर बौद्ध भिक्षु बनना चाहते हैं और अगले दो साल में जंगल में आश्रम बनाकर ध्यान में लीन होना चाहते हैं।
Thailand Businessman: आमतौर पर कारोबारी अपनी कंपनी को बड़ा बनाने, मुनाफा बढ़ाने और नए बाजारों तक पहुंचने का सपना देखते हैं। लेकिन थाईलैंड के एक बिजनेसमैन ने अपनी दशकों की मेहनत से खड़ी की गई कंपनी बेचकर जिंदगी की पूरी दिशा बदलने का फैसला किया है। उनका अगला लक्ष्य कारोबार नहीं, बल्कि अध्यात्म और बौद्ध साधना है।
हैवेल्स आइसक्रीम (Havells Ice Cream) ब्रांड के मालिक सिरिपोंग अक्करश्रीयुक् ने कंपनी को 165 मिलियन बहत में बेचने का ऐलान किया है। भारतीय मुद्रा में यह रकम करीब 47.2 करोड़ रुपये बैठती है। हालांकि, कंपनी बेचने के बाद उनका मकसद सिर्फ रिटायरमेंट लेना नहीं है। वह अब संन्यासी जीवन की तैयारी में जुटने वाले हैं।
Thailand Businessman: कंपनी बेचकर हासिल करना चाहते हैं 'अरहंत' पद
सिरिपोंग के मुताबिक, उनका अंतिम लक्ष्य बौद्ध धर्म की गहरी साधना करना और 'अरहंत' का पद हासिल करना है। इसके लिए उन्होंने अगले दो वर्षों की योजना भी तैयार कर ली है। इन दो वर्षों के दौरान वह खुद को संन्यासी जीवन के लिए तैयार करेंगे। साथ ही ऐसी जमीन की तलाश करेंगे, जहां जंगल के बीच एक आश्रम बनाया जा सके। उनकी योजना वहां रहकर एकांत में ध्यान और साधना करने की है। यानी जिस कारोबारी जिंदगी में उन्होंने वर्षों लगाए, उससे धीरे-धीरे दूरी बनाकर अब वह पूरी तरह आध्यात्मिक जीवन की ओर बढ़ना चाहते हैं।
15 साल पहले ही तय कर लिया था संन्यास का रास्ता
रिपोर्ट्स के अनुसार, सिरिपोंग के मन में अध्यात्म की ओर जाने का विचार अचानक नहीं आया। वह पिछले करीब 15 वर्षों से इस फैसले के बारे में सोच रहे थे। वह बौद्ध धर्म और उससे जुड़े विचारों पर पहले भी सार्वजनिक रूप से बात करते रहे हैं। वर्ष 2016 में उन्होंने 'Success Derived from the Buddha' नाम की किताब भी लिखी थी। इससे साफ है कि बौद्ध दर्शन उनके जीवन का लंबे समय से महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।
सिरिपोंग की योजना संन्यासी बनने के बाद बाहरी दुनिया से अपना संपर्क बेहद सीमित रखने की है। वह सिर्फ एक साथी भिक्षु और भोजन पहुंचाने वाले एक शिष्य के अलावा किसी अन्य व्यक्ति से मिलने से बचना चाहते हैं।
Havells Ice Cream क्यों बेच रहे हैं? सामने आई कारोबारी वजह
हालांकि कंपनी बेचने के पीछे सिर्फ आध्यात्मिक कारण नहीं है। इसके पीछे एक व्यावसायिक वजह भी बताई गई है। सिरिपोंग ने 1999 में हैवेल्स आइसक्रीम की शुरुआत की थी। कंपनी ने शुरुआत के कुछ ही वर्षों में तेजी से विस्तार किया और करीब तीन साल के भीतर 22 ब्रांच तक पहुंच गई थी। लेकिन समय के साथ कारोबार बढ़ाने में नई चुनौतियां सामने आने लगीं। सिरिपोंग के मुताबिक, शॉपिंग मॉल्स में नई दुकानें खोलने के लिए उपयुक्त जगह मिलना मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने बताया कि कई जगहों पर दुकान के लिए स्पेस उपलब्ध होने के बावजूद मॉल्स हैवेल्स को जगह देने के लिए तैयार नहीं हैं। ऐसे में कंपनी के विस्तार की रफ्तार प्रभावित हुई है।
47 करोड़ की डील में जमीन से लेकर सीक्रेट रेसिपी तक शामिल
सिरिपोंग ने जिस 165 मिलियन बहत में कारोबार बेचने का ऐलान किया है, उसमें सिर्फ ब्रांड का नाम शामिल नहीं है। इस डील में कंपनी की कई अहम संपत्तियां और कारोबारी अधिकार भी शामिल बताए गए हैं। खरीदार को करीब 1.1 हेक्टेयर जमीन, ऑफिस बिल्डिंग, आइसक्रीम बनाने की मशीनें, जरूरी लाइसेंस और पूरी फैक्ट्री मिलेगी। इसके अलावा हैवेल्स आइसक्रीम और फास्ट-फूड आउटलेट, ट्रेडमार्क और वर्षों से तैयार की गई आइसक्रीम की कथित सीक्रेट रेसिपी भी डील का हिस्सा हैं। इस तरह खरीदार को सिर्फ एक ब्रांड नहीं, बल्कि उसके साथ जुड़ा पूरा कारोबारी ढांचा हासिल होगा।
Business Deal: खरीदार खोजने वाले को मिलेगा 5 मिलियन बहत
सिरिपोंग ने कंपनी बेचने के लिए एक और दिलचस्प ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि जो व्यक्ति इस कारोबार के लिए सफल खरीदार ढूंढकर लाएगा, उसे 5 मिलियन बहत का रेफरल शुल्क दिया जाएगा। यानी कंपनी की बिक्री के लिए सही खरीदार ढूंढने वाले को भी बड़ी रकम मिलेगी।
एक तरफ करोड़ों रुपये की कंपनी बेचने का फैसला और दूसरी तरफ जंगल में एकांत आश्रम बनाकर साधना करने की योजना—सिरिपोंग का यह कदम इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उन्होंने कारोबार से दूर जाने के बाद अपनी जिंदगी को पूरी तरह अलग दिशा देने का मन बना लिया है।
