
14 महीने तक कोमा में रहीं नीलम शिंदे आखिरकार दुनिया को छोड़कर चली गईं। अमेरिका में इलाज के दौरान उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई और उनकी मौत हो गई। करोड़ों भारतीय लोग उनके ठीक होने के लिए दुआ कर रहे थे। लेकिन किस्मत के आगे सब हर गए। 28 मार्च को नीलम का आखिरकार संघर्ष थम गया। उनके निधन से पूरे महाराष्ट्र में शोक की लहर है। बता दें कि नीलम का 14 महीने पहले एक सड़क हादसा हो गया था। वह तब से कोमा चल रही थीं।
बता दें कि डॉक्टरों ने उनको बचाने की खूब कोशिश की, लेकिन 28 मार्च को उनकी हालत ज्यादा बिगड़ गई। आलम यह हो गया कि वो दुनिया को छोड़कर चली गईं। बता दें की नीलम ने जाने से पहले आखिरी इच्छा जाहिर की थी कि उनके शरीर के सारे अंग दान कर दिए जाएं। जिससे कई लोगों को नई जिंदगी मिल सके। परिवार ने उनकी आखिरी इच्छा पूरी करते हुए अंगदान की प्रक्रिया पूरी की, जिसमें करीब आठ दिन लगे। अब 8 अप्रैल को अमेरिका में अंतिम संस्कार किया जाएगा।
दरअसल, 35 वर्षीय नीलम तानाजी शिंदे मूल रूप से महाराष्ट्र के सतारा जिले के कराड तालुका के वडगांव (उंब्रज) की रहने वाली थीं। चार साल से रहकर पढ़ाई कर रही थीं। वह कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी में चौथे वर्ष की छात्रा थीं। लेकिन पिछले साल 14 फरवरी की शाम को वह घूमने के लिए निकली थी, इसी दौरान उन्हें एक कार चालक ने पीछे से टक्कर मार दी। जिसके बाद कार चालक फरार हो गया। हादसा इतना भयानक था कि नीलम के शरीर की कई हड्डियां टूट गई थीं। वह कोमा में चली गईं। तभी से वो कैलिफोर्निया के अस्पताल में भर्ती थीं।
नीलम की मां का एक साल पहले ब्रेन ट्यूमर के कारण निधन हो चुका है। उनके बुजुर्ग पिता तानाजी माधव शिंदे बचे हैं। जिनका रो-रोकर बुरा हाल है। नीलम के हादसे का मामला पूरे देश में मुद्दा बना था, क्योंकि पिता बेटी को देखने जाना चाहते थे, लेकिन अमेरिका जाने के लिए वीजा हासिल करने में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण, एकनाथ शिंदे, केंद्रीय मंत्री मुरलीधर मोहोळ और विधायक अतुल भोसले समेत कई नेताओं ने मदद का आश्वासन दिया था।
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