लोकसभा में राहुल गांधी के 'इडियट' बयान और अमित शाह पर गंभीर आरोपों से बवाल मच गया। किरेन रिजिजू ने सबूत या माफी की मांग की। आखिर सदन में ऐसा क्या हुआ?
नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में उस वक्त भारी राजनीतिक भूचाल आ गया, जब 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पर बहस चल रही थी। माहौल में सस्पेंस और तनाव तब घुला जब विपक्ष के नेता (LoP) राहुल गांधी ने अपने भाषण में एक छात्र के साथ हुई बातचीत का ज़िक्र किया। राहुल गांधी ने बिना किसी का नाम लिए एक ऐसी टिप्पणी कर दी जिसने सत्ता पक्ष के सांसदों को अपनी सीटों से खड़े होने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा कि एक छात्र ने समाज में लोगों की तीन श्रेणियां बताई थीं—"छात्र, मूर्ख (इडियट) और अंधभक्त जो इन मूर्खों का अनुसरण करते हैं।" इस एक शब्द ने सदन के भीतर एक बड़े टकराव की नींव रख दी।
'इडियट' शब्द पर भारी हंगामा: किरेन रिजिजू का तीखा पलटवार और रिकॉर्ड से हटाने की मांग
जैसे ही राहुल गांधी ने 'इडियट' शब्द का बार-बार इस्तेमाल किया, ट्रेजरी बेंच (सत्ता पक्ष) के सांसद गुस्से से लाल हो गए और सदन में नारेबाजी शुरू हो गई। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए राहुल गांधी के भाषण के बीच में हस्तक्षेप किया। रिजिजू ने कड़े शब्दों में आपत्ति जताते हुए कहा, "राहुल गांधी लगातार असंसदीय शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसे तुरंत सदन के रिकॉर्ड से हटाया जाना चाहिए।" हालांकि, विवाद को बढ़ता देख राहुल गांधी ने सफाई देते हुए कहा, "मैं किसी व्यक्ति विशेष को ऐसा नहीं कह रहा हूं। मैंने किसी के लिए वह शब्द इस्तेमाल नहीं किया, मैंने बस इतना कहा कि यह श्रेणी भी समाज में मौजूद है।" लेकिन सस्पेंस तब और बढ़ गया जब उन्होंने आगे जोड़ दिया कि "चूंकि वह मूर्ख (इडियट) भगवान होने का दिखावा करने की कोशिश कर रहा है, इसलिए उसे अपने लिए एक बड़ी छवि बनानी पड़ती है।"
अमित शाह की गैर-मौजूदगी पर सवाल: "गृह मंत्री में यहां बैठने की हिम्मत नहीं है"
इस जुबानी जंग ने तब और खौफनाक मोड़ ले लिया जब राहुल गांधी ने सीधा निशाना केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर साध दिया। गृह मंत्री की सदन में गैर-मौजूदगी पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस नेता ने बेहद तीखा और विवादित दावा किया। राहुल गांधी ने गरजते हुए कहा, "गृह मंत्री में आज यहाँ बैठने की हिम्मत नहीं है क्योंकि वह डरे हुए हैं।" इसके बाद उन्होंने एक ऐसा आरोप लगाया जिसने पूरे सदन को सन्न कर दिया। उन्होंने छात्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई का ज़िक्र करते हुए दावा किया कि अमित शाह ने ही छात्र प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की "मंजूरी" और "आदेश" दिया था।
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संसदीय विशेषाधिकार का उल्लंघन: ‘सबूत दीजिए या माफी मांगिए’
अमित शाह पर लगे इस बेहद गंभीर आरोप के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने राहुल गांधी को घेरते हुए पूछा कि उन्होंने किस आधार पर देश के गृह मंत्री पर इतना बड़ा आरोप लगाया है? रिजिजू ने इसे विपक्ष के नेता को मिले संसदीय विशेषाधिकार का गंभीर उल्लंघन करार दिया। उन्होंने दोटूक लहजे में मांग की, “या तो विपक्ष के नेता अपने इस दावे का पुख्ता सबूत पेश करें, या फिर पूरे सदन से माफी मांगें। हम गृह मंत्री के खिलाफ ऐसे बेबुनियाद आरोपों को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे।”
अखिलेश यादव भी बहस में कूदे
इस महा-संग्राम में सस्पेंस तब और बढ़ गया जब समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इस विवाद में छलांग लगा दी। विपक्ष का बचाव करते हुए अखिलेश यादव ने पासा पलट दिया और कहा, "अगर विपक्ष के नेता ने इतना गंभीर आरोप लगाया है, तो सरकार को इस पर पूरी तरह से स्पष्टीकरण देना चाहिए और जवाब देना होगा कि आखिर गोलीबारी का आदेश किसने दिया था?" इस भयंकर गतिरोध और दोनों तरफ से हो रही लगातार नारेबाजी के बीच अध्यक्ष को बार-बार दखल देना पड़ा, जिससे पेपर लीक विरोधी बिल पर चल रही यह बहस देश के सबसे बड़े राजनीतिक दंगल में तब्दील हो गई।
पेपर लीक बिल पर चर्चा, लेकिन सुर्खियों में रहा राजनीतिक टकराव
दिलचस्प बात यह रही कि जिस विधेयक पर चर्चा होनी थी, वह पेपर लीक रोकने से जुड़ा था, लेकिन पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा राहुल गांधी की टिप्पणी, अमित शाह पर लगाए गए आरोप और किरेन रिजिजू की आपत्तियों की रही। अब यह विवाद केवल एक शब्द तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि संसद में राजनीतिक शिष्टाचार, आरोपों की विश्वसनीयता और विपक्ष-सत्ता पक्ष के तीखे टकराव का बड़ा मुद्दा बन चुका है। आने वाले दिनों में यह मामला संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह राजनीतिक बहस का केंद्र बना रह सकता है।
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