20 साल पुरानी UK कंपनी Backops Limited अचानक फिर सुर्खियों में क्यों है? निशिकांत दुबे के आरोपों के बाद चुनावी हलफनामा, राहुल गांधी और पुराने विवादों पर नए सवाल खड़े हो गए हैं। लंदन का वो अनजान पता और 17 साल पहले दफन हुई एक रहस्यमयी कंपनी!
Backops UK Company: भारतीय राजनीति में कभी-कभी दो दशक पुराने मुर्दे भी कब्र से निकलकर सत्ता के गलियारों में हड़कंप मचा देते हैं। इस बार विवाद की धुरी बना है यूनाइटेड किंगडम (UK) का एक गुमनाम पता-2 Frognal Way, London-और एक ऐसी कंपनी जो 17 साल पहले ही कागजों पर दफन हो चुकी है। इसका नाम है Backops Limited। संसद के मानसून सत्र के दौरान बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक ऐसा तीखा सवाल दाग दिया, जिसने दिल्ली से लेकर लंदन तक की राजनीतिक फिजा में सस्पेंस और तनाव घोल दिया है। दुबे का आरोप है कि भारत के एक बेहद रसूखदार सांसद का इस विदेशी कंपनी से गहरा नाता था, जिसे उन्होंने अपने चुनाव हलफनामे में जानबूझकर छिपाया।
लवग्रोव, मैकनाइट और 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' का वो कथित चक्रव्यूह!
निशिकांत दुबे ने पत्रकारों के सामने जो खुलासे किए, वे किसी जासूसी उपन्यास के पन्नों जैसे लगते हैं। उन्होंने दावा किया कि 2003 में बनी इस कंपनी के पीछे दो मुख्य चेहरे हैं-ब्रायन लवग्रोव (Brian Lovegrove) और उल्रिक मैकनाइट (Ulrik McKnight)। हैरान करने वाली बात यह है कि लवग्रोव 1,000 से अधिक और मैकनाइट लगभग 256 कंपनियों से जुड़े हैं। सस्पेंस तब और गहरा गया जब दुबे ने आरोप लगाया कि लंदन के इसी एक अकेले पते पर करीब 60 कंपनियां रजिस्टर्ड हैं, जिनमें 'एशिया टीवी लिमिटेड' भी शामिल है (जिसका संबंध कभी अमिताभ बच्चन के भाई अजिताभ बच्चन से जोड़ा गया था)। दुबे ने सीधा सवाल दागा है कि क्या इसी पते से चलने वाले कुछ टीवी चैनलों ने भारत विरोधी ताकतों का समर्थन किया? 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' में इस पते की क्या भूमिका है?
आखिर क्या है Backops Limited की कहानी?
Backops Limited की शुरुआत 2003 में यूनाइटेड किंगडम में हुई थी। कंपनी मूल रूप से एक बिजनेस और टेक्नोलॉजी क्षेत्र से जुड़ी संस्था थी। बाद में यह इसलिए चर्चा में आई क्योंकि सार्वजनिक रिकॉर्ड और मीडिया रिपोर्टों में इसका नाम कांग्रेस नेता राहुल गांधी के शुरुआती कारोबारी सफर से जोड़ा गया। कांग्रेस की आधिकारिक प्रोफाइल के अनुसार, विदेश में काम करने के बाद राहुल गांधी भारत लौटे और मुंबई में Backops Services Private Limited नाम की टेक्नोलॉजी आउटसोर्सिंग कंपनी से जुड़े। इसी कारण UK की Backops Limited और भारत की Backops Services को लेकर समय-समय पर राजनीतिक बहस होती रही।
फ्लैशबैक 2003: राहुल गांधी के शुरुआती करियर का वो 'सीक्रेट' पन्ना
इस रहस्यमयी कंपनी की जड़ें कांग्रेस नेता राहुल गांधी के राजनीतिक सफर की शुरुआत से जुड़ी हैं। आधिकारिक रिकॉर्ड बताते हैं कि लंदन की कंसल्टिंग फर्म 'मॉनिटर ग्रुप' में काम करने के बाद राहुल गांधी ने मुंबई में 'Backops Services Private Ltd' नाम की एक टेक्नोलॉजी आउटसोर्सिंग फर्म शुरू की थी। लेकिन असली विवाद यूके वाली 'Backops Limited' को लेकर है, जिसके फाउंडिंग डायरेक्टर राहुल गांधी और उनके बिजनेस पार्टनर उल्रिक मैकनाइट थे। साल 2005 तक इस यूके कंपनी में राहुल गांधी की हिस्सेदारी 65% और मैकनाइट की 35% थी। हालांकि, यह कंपनी फरवरी 2009 में आधिकारिक तौर पर बंद कर दी गई थी।
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नागरिकता का वो पुराना जिन्न और $18,600 का रहस्यमयी बैंक खाता
यह पहली बार नहीं है जब बैकऑप्स को लेकर विवाद हुआ हो। साल 2004 में जब राहुल गांधी ने पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा, तो उन्होंने अपने हलफनामे में बैकऑप्स लिमिटेड की संपत्ति के रूप में यूरोप के HSBC-UK अकाउंट (नंबर 58332832) का जिक्र किया था, जिसमें 18,600 अमेरिकी डॉलर जमा थे। लेकिन असली भूचाल 2015 में आया, जब बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने यूके कंपनी के कुछ दस्तावेजों का हवाला देकर दावा किया कि राहुल गांधी ने खुद को ब्रिटिश नागरिक घोषित किया था। हालांकि बाद में यूके सरकार के एक विभाग ने इसे एक क्लेरिकल गलती या टाइपो (Typo) करार दिया, लेकिन इस विवाद ने बैकऑप्स के नाम को हमेशा के लिए एक रहस्यमयी राजनीतिक पहेली बना दिया।
स्कॉर्पीन पनडुब्बी सौदा और ऑफसेट का वो अधूरा सच
बैकऑप्स का सबसे सनसनीखेज संबंध साल 2016 के 'स्कॉर्पीन पनडुब्बी लीक कांड' के दौरान सामने आया। साल 2019 में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने एक बड़ा आरोप लगाते हुए इस ऑफसेट बहस को बैकऑप्स से जोड़ा था। आरोप यह नहीं था कि बैकऑप्स को सीधे रक्षा सौदा मिला, बल्कि आरोप यह था कि राहुल गांधी के पूर्व पार्टनर उल्रिक मैकनाइट बाद में उन कंपनियों से जुड़ गए, जिन्हें फ्रांस की नेवल ग्रुप (DCNS) के साथ हुए 2005 के स्कॉर्पीन पनडुब्बी सौदे के 'डिफेंस ऑफसेट' का काम मिला था। जेटली ने इसे सीधे तौर पर 'हितों के टकराव' का मामला बताया था।
2009 में बंद हुई कंपनी, लेकिन विवाद नहीं थमा
सार्वजनिक रिकॉर्ड के अनुसार, Backops Limited में शुरुआती दौर में राहुल गांधी और उल्रिक मैकनाइट फाउंडिंग डायरेक्टर बताए गए। रिपोर्टों के मुताबिक जून 2005 तक राहुल गांधी के पास कंपनी की बहुमत हिस्सेदारी थी। इसके बाद कंपनी ने धीरे-धीरे कामकाज बंद किया और फरवरी 2009 में इसे आधिकारिक रूप से बंद कर दिया गया।
अब फिर क्यों चर्चा में है Backops Limited?
निशिकांत दुबे के हालिया बयानों के बाद Backops Limited एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गई है। उन्होंने कंपनी के रजिस्ट्रेशन, लंदन के पते, डायरेक्टरों और कथित कारोबारी संबंधों को लेकर कई सवाल उठाए हैं और कहा है कि वह यह मुद्दा संसद में भी उठाएंगे। फिलहाल इन आरोपों पर राजनीतिक बयानबाजी जारी है। सार्वजनिक रिकॉर्ड यह जरूर बताते हैं कि कंपनी अस्तित्व में थी और बाद में बंद हो गई, लेकिन वर्तमान विवाद से जुड़े कई आरोप अभी राजनीतिक दावों के दायरे में हैं और उन पर किसी सक्षम अदालत या जांच एजेंसी का अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। ऐसे में आने वाले दिनों में संसद और राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे पर बहस और तेज होने की संभावना है।
हालांकि, आज तक भारत की किसी भी अदालत या जांच एजेंसी ने इस मामले में राहुल गांधी या बैकऑप्स के खिलाफ कोई भ्रष्टाचार साबित नहीं किया है। अब निशिकांत दुबे के नए हमलों ने इस ठंडे पड़ चुके जिन्न को बोतल से बाहर निकाल दिया है। देखना दिलचस्प होगा कि लंदन के इस पते का सच क्या संसद के भीतर किसी बड़े राजनीतिक विस्फोट का कारण बनेगा?
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