
Tripura DGP Anurag Dhankar Death: त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक (DGP) अनुराग धनखड़ का सोमवार को अगरतला स्थित राज्य पुलिस मुख्यालय में निधन हो गया। अधिकारियों के अनुसार, उनका शव उनके कार्यालय में मिला, जिसके बाद पूरे पुलिस प्रशासन और राज्य सरकार में हलचल मच गई। फिलहाल उनकी मौत की वजह साफ नहीं हो सकी है। पुलिस ने अप्राकृतिक मौत (Unnatural Death) का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती स्तर पर किसी भी कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। मुख्यमंत्री माणिक साहा, मुख्य सचिव जे के सिन्हा और कई वरिष्ठ अधिकारी अस्पताल पहुंचे। प्रशासन ने कहा है कि मामले की जांच जारी है और विस्तृत जानकारी जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी।
अनुराग धनखड़ 1994 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी थे और त्रिपुरा कैडर से जुड़े थे। मई 2025 में उन्हें त्रिपुरा का पुलिस महानिदेशक नियुक्त किया गया था। इससे पहले वे राज्य में डीजीपी (इंटेलिजेंस) की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। करीब तीन दशक लंबे पुलिस करियर में उन्होंने कई अहम पदों पर काम किया। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1995 में त्रिपुरा से की और एसडीपीओ लॉन्गथराई वैली, पश्चिम और दक्षिण त्रिपुरा के पुलिस अधीक्षक, स्पेशल ब्रांच के एसपी और एआईजीपी (मुख्यालय) जैसे महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दीं।
अनुराग धनखड़ ने मैसूर स्थित सेंट्रल फूड टेक्नोलॉजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (CFTRI) से फूड टेक्नोलॉजी में पोस्ट ग्रेजुएशन किया था। इसके अलावा उस्मानिया यूनिवर्सिटी से पुलिस मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री हासिल की। साइबर अपराधों की बेहतर समझ के लिए उन्होंने हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ से साइबर क्राइम्स में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी किया था। इतना ही नहीं, वे अमेरिका की एसोसिएशन ऑफ सर्टिफाइड फ्रॉड एग्जामिनर्स (ACFE) से सर्टिफाइड फ्रॉड एग्जामिनर (CFE) भी थे, यानी वित्तीय धोखाधड़ी और फ्रॉड मामलों की जांच में उन्हें विशेष विशेषज्ञता हासिल थी।
अनुराग धनखड़ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी काम करने का अनुभव था। वर्ष 2003-04 के दौरान उन्होंने संयुक्त राष्ट्र (UN) मिशन इन कोसोवो में भी सेवाएं दीं। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के दौरान उन्होंने सीबीआई, सीआईएसएफ और ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (BPR&D) में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वे गृह मंत्रालय द्वारा गठित 1984 सिख विरोधी दंगों की जांच के लिए बनाई गई विशेष जांच टीम (SIT) का नेतृत्व भी कर चुके थे।
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बेहतरीन सेवा के लिए उन्हें पुलिस मेडल फॉर मेरिटोरियस सर्विस और राष्ट्रपति पुलिस पदक फॉर डिस्टिंग्विश्ड सर्विस जैसे प्रतिष्ठित सम्मान मिले थे। पुलिस सेवा में उनकी पहचान एक अनुभवी और पेशेवर अधिकारी के रूप में रही।
फिलहाल यही सबसे बड़ा सवाल है। अब तक प्रशासन या पुलिस की ओर से मौत की वजह को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। जांच एजेंसियां सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं और पोस्टमॉर्टम सहित अन्य कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं। इस समय किसी भी तरह के कारण या अटकल की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए केवल आधिकारिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।
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पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अनुराग धनखड़ की मौत किन परिस्थितियों में हुई। फिलहाल राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन ने लोगों से अफवाहों से बचने और आधिकारिक जानकारी का इंतजार करने की अपील की है। उनकी अचानक मौत ने पूरे पुलिस महकमे और प्रशासनिक तंत्र को झकझोर दिया है।
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