भारत में महिला गोल्फ को सुर्खियों में लेकर आई ये खिलाड़ी, टोक्यो में की शानदार शुरुआत

Published : Aug 04, 2021, 06:59 PM ISTUpdated : Aug 04, 2021, 07:04 PM IST
भारत में महिला गोल्फ को सुर्खियों में लेकर आई ये खिलाड़ी, टोक्यो में की शानदार शुरुआत

सार

मध्यम परिवार में जन्मी अदिति को पहली बार कर्नाटक गोल्फ ऐसोसिएशान के गोल्फ कोर्स में जाकर इस खेल से लगाव हो गया था और उस समय वह केवल 5 साल की थीं। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा और गोल्फ को ही अपनी दुनिया और करियर बना दिया।  

स्पोर्ट्स डेस्क. अदिति अशोक रियो ओलंपिक 2016 में सबसे कम उम्र की खिलाड़ी थीं। जब उन्होंने लगातार 68 प्वाइंट बनाकर भारत में गोल्फ को महिलाओं के लिए सुर्खियां बना दीं थीं। 36 होल के बाद छह-अंडर के बराबर आठवें स्थान पर रहीं। पांच साल बाद दुनिया की 200 नंबर की खिलाड़ी टोक्यो ओलंपिक 2020 में स्टार-स्टडेड लीडरबोर्ड के शीर्ष के पास है। जिसने बुधवार को पहले दौर के बाद दुनिया की नंबर एक नेली कोर्डा के बाद दूसरे स्थान हासिल किया।

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बुधवार को कासुमिगासेकी कंट्री क्लब में फोर-अंडर पैरा 67 के उद्घाटन में उन्होंने कहा- बहुत सारे लोग यह पता लगाने की कोशिश कर रहे थे कि गोल्फ क्या है, ताकि वे समझ सकें कि मैं कैसे खेले रही थी और अगर मुझे पदक जीतने का मौका मिलेगा। अदिति अशोक रियो में अंतिम दो राउंड के दौरान 41वें स्थान पर रही। लेकिन 1.3 अरब लोगों के देश में गुमनाम नहीं थी।  

ओलंपिक से मिली पहचान
उन्होंने कहा कि अगले छह महीने से एक साल तक सभी ने मुझे ओलंपिक से याद किया और पहचाना। भले ही मैं उसके बाद तीन यूरोपीय टूर स्पर्धाओं को जीता फिर भी लोग मुझे उस लड़की के रूप में याद करते हैं जिसने ओलंपिक में अच्छा प्रदर्शन किया था। इस बार वह कहती हैं कि वह ओलंपिक प्रतियोगिता के लिए अधिक तैयार हैं। पिछली बार मैंने अपनी हाई स्कूल की परीक्षाएं समाप्त की थीं और फिर मैं ओलंपिक में थी। पिछले पांच वर्षों में एलपीजीए टूर पर खेलना आपको एक खिलाड़ी के रूप में रियो में खेलने की तुलना में बेहतर बनाता है।

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उन्होंने कहा कि मैंने पिछली बार जितना अच्छा करना चाहा था, उतना अच्छा नहीं किया, लेकिन भारत में गोल्फ पर इसका जो प्रभाव पड़ा, उसे देखकर मुझे प्रेरणा मिली और इसी तरह से मुझे इसके लिए भी प्रेरणा मिली। अदिति अशोक ने बताया कि कैसे बेंगलुरु में पढ़ी लिखी लड़की ने गोल्फ खेलना शुरू किया। मैंने और मेरे माता-पिता ने एक ही समय में गोल्फ खेलना शुरू किया। 

हम एक रेस्तरां में नाश्ता करते थे, जहां गोल्फ ड्राइविंग रेंज की अनदेखी की जाती थी और इसलिए हम अंदर जाकर इसे आज़माना चाहते थे और फिर मैं धीरे-धीरे गोल्फ खेलने लगी। अशोक अदिति ने यह स्वीकार किया कि रियो ओलंपिक में उसके पहले दो राउंड का प्रभाव काफी बड़ा था। मेरे सोशल मीडिया फॉलोइंग अचानक से बढ़ गए। मुझे लगता है कि मेरे ट्विटर और फेसबुक पर 400-500 फॉलोअर्स थे और अचानक 14 हजार लाइक वो भी रातों रात।  उन्होंने कहा कि महिला गोल्फ वास्तव में भारत में खेल या लोगों के रडार पर नहीं है। पर मुझे लगता है कि निश्चित रूप से सैकड़ों हजारों लोगों पर इसका प्रभाव पडे़गा। 

 

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