राजस्थान में लंपी बीमारी के बढ़े केस,केंद्र से आई टीम मवेशियों की हालत देख हुई हैरान,12 शहरों में फैली महामारी

Published : Aug 02, 2022, 06:00 PM IST
राजस्थान में लंपी बीमारी के बढ़े केस,केंद्र से आई टीम मवेशियों की हालत देख हुई हैरान,12 शहरों में फैली महामारी

सार

मवेशियों में तेजी से फैलने वाली लंपी डिजीज राजस्थान में बेकाबू  हो गए है, अब तक राज्य के 12 शहरों में यह बीमारी फैल चुकी है। केंद्र की टीमें पशुओं की हालत देखकर हैरान हो गई। उन्होंने  जल्द ही सरकारी फंड भेजने का वादा किया है......

जयपुर. राजस्थान में मवेशियों में होने वाली लंपी डिजीज बीमारी बेहद तेजी से फैल रही है। सिर्फ दो ही दिन में करीब 700 से ज्यादा और मवेशी दम तोड़ चुके हैं। अब तक करीब 30 हजार मवेशी इसकी चपेट में आ चुके हैं,और इनमें से करीब दो हजार से ज्यादा अपनी जान गवा चुके हैं। यह बीमारी बेहद तेजी से राजस्थान के जिलों में फैल रही है। राजस्थान के 10 से ज्यादा जिलों में अब तक इस बीमारी ने पैर पसार लिए हैं। नागौर, जोधपुर, पाली, भरतपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, उदयपुर, राजसमंद समेत कई जिलों में अब तक मवेशी इस बीमारी से ग्रसित हो चुके हैं। पशुपालक मवेशियों को एंटीबायोटिक की डोज दे रहे हैं। लेकिन यह दवाई फिलहाल काम नहीं कर रही है। 

नागौर सांसद ने केंद्र से मांगी थी मदद 
इस बीमारी को लेकर नागौर से आरएलपी सांसद हनुमान बेनीवाल ने केंद्र सरकार से मदद मांगी थी। सेंट्रल गवर्नमेंट की ओर से इंडियन वेटरनरी रिसर्च इंस्टिट्यूट के डॉक्टर एवं साइंटिस्ट की टीम ने नागौर और उसके बाद जोधपुर में मवेशियों की हालत देखी। सोमवार शाम तक आई टीमों ने आज यानि मंगलवार 2 अगस्त के सवेरे तक दौरा किया और उसके बाद टीम वापस दिल्ली लौट गई। टीम के वैज्ञानिकों और चिकित्सकों का कहना था कि वे जल्द ही विशेष तरह के एंटीबायोटिक इंजेक्शन राजस्थान के लिए भेजेंगे, और वहां से फंड भी जारी करवाएंगे ताकि राज्य के मवेशियों को इस बीमारी से बाहर निकाला जा सके। 

पड़ोसी मुल्क से आने की आशंका
केंद्र से आए डॉक्टरों का यह कहना है कि यह बीमारी संभवत है पड़ोसी देश पाकिस्तान से आई है क्योंकि अधिकतर मवेशी उन्हीं जिलों के चपेट में आ रहे हैं, जो जिले पाकिस्तान बॉर्डर से सटे हुए हैं। लंपी डिजीज के कारण मवेशियों की दुधारू क्षमता भी कम होने की बात सामने आ रही है। पशु मालिक मवेशियों के बाडे में गोबर के उपले जला रहे हैं ताकि उससे फैले धुआ से मक्खियां ना आए और मक्खियों के संपर्क में नहीं आने से यह बीमारी एक मवेशी से दूसरे में मवेशी में ना फैले। उधर केंद्र से आई टीमों का यह कहना है कि इस बीमारी का मनुष्यों के संपर्क में आकर फैलने के प्रमाण फिलहाल नहीं मिले हैं।

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