स्वतंत्रता दिवस विशेष: कौन है ये सीकर के सपूत, जिन्होंने दिया था गांधीजी को 'बापू' नाम, और थे उनके 5वें पुत्र

Published : Aug 13, 2022, 10:53 AM IST
स्वतंत्रता दिवस विशेष: कौन है ये सीकर के सपूत, जिन्होंने दिया था गांधीजी को 'बापू' नाम, और थे उनके 5वें पुत्र

सार

राजस्थान के सीकर जिलें के प्रसिद्ध उद्योगपति जमनालाल बजाज ने देश को अहिंसा से आजादी दिलाने वाले महात्मा गांधी को पहली बार बापू कहकर बुलाया था। इसके बाद से ही धीरे धीरे पूरे देश में गांधी को इसी नाम से पुकारा जाने लगा।

सीकर. देश को आजादी दिलाने में सबसे अहम भूमिका महात्मा गांधी की थी। जिन्हें राष्ट्र पिता का भी दर्जा मिला। प्यार से पूरा देश उन्हें बापू के नाम से संबोधित करता था। पर बहुत कम लोग ये जानते हैं कि उन्हें बापू की ये संज्ञा राजस्थान के सीकर जिले के लाडले सपूत और प्रसिद्ध उद्योगपति जमनालाल बजाज ने दिया था। जो महात्मा गांधी के दत्तक पुत्र थे। खुद गांधीजी उन्हें अपना पांचवा पुत्र कहते थे। सीकर के इतिहासकार महावीर पुरोहित के अनुसार सबसे पहले जमनालाल बजाज ने ही गांधीजी को सार्वजनिक सभा में बापू के नाम से संबोधित किया था। जिसके बाद से ही उनके करीबी लोग और बाद में पूरा देश उन्हें बापू के नाम से पुकारने लग गया।

नागपुर अधिवेशन में रखा था गोद का प्रस्ताव
इतिहासकारों के अनुसार जमनालाल बजाजा ने 1920 के कांग्रेस के नागपुर अधिवेशन में महात्मा गांधी को गोद लेने का प्रस्ताव उनके सामने रखा था।  मुंबई से प्रकाशित शोभालाल गुप्त की 'जन्मभूमि से बंधा मन (जमनालाल बजाज व राजस्थान)' में भी इस प्रस्ताव का जिक्र है। जिसमें लिखा है कि 1920 के नागपुर कांग्रेस अधिवेशन से जमनालाल बजाज ने खुद को गांधीजी के पांचवे पुत्र के रूप में समर्पित कर दिया था। इतिहासकार महावीर पुरोहित भी कहते हैं कि जमनालाल बजाज ने महात्मा गांधी को कहा था कि जिसके बेटा नहीं होता वह बेटा गोद लेता है लेकिन मेरे पिता नहीं है तो उसके रूप मे मैं आपको गोद लेना चाहता हूं। इस पर गांधीजी एकबारगी तो सकपका गए पर बाद में जब अन्य लोगों ने भी जमनालाल बजाज का समर्थन किया तो गांधीजी ने उनका प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। इसके बाद ही बजाज ने उन्हें बापू के नाम से पुकारा। जो उनका स्थाई संबोधन बन गया। 

काशी का बास में जन्मे थे बजाज
प्रसिद्ध उद्योगपति जमनालाल बजाज का जन्म सीकर के  छोटे से गांव काशी का बास गांव में हुआ था। जिनके पिता का नाम कनीराम व मां का नाम बिरदीबाई था। उन्हें बाद में वर्धा के सेठ बच्छराज ने गोद लिया था। जहां ही वह महात्मा गांधी, मदन मोहन मालवीय, बाल गंगाधर तिलक व रविन्द्र नाथ टैगौर जैसे स्वतंत्रता सेनानियों व महापुरुषों के संपर्क में आए। राजस्थान के प्रजामंडल आंदोलन वे गांधजी के साथ कई बड़े आंदोलनों में शामिल रहे। जमनालाल बजाज का ट्रस्ट आज भी उनके पैतृक जिले सीकर में कई कल्याणकारी योजनाओं पर काम कर रहा है।

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