Maghi Gupt Navratri 2026: माघी गुप्त नवरात्रि कब से? जानें घट स्थापना के मुहूर्त, विधि-मंत्र

Published : Jan 18, 2026, 11:49 AM IST

Maghi Gupt Navratri 2026: माघ मास में गुप्त नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। इस बार गुप्त नवरात्रि की शुरूआत पंचग्रही योग में हो रही है, ऐसा दुर्लभ संयोग बहुत कम देखने को मिलता है। जानें गुप्त नवरात्रि के पहले दिन कब करें घट स्थापना।

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माघी गुप्त नवरात्रि में किसकी करें पूजा?

Maghi Gupt Navratri 2026 Details In Hindi: धर्म ग्रंथों के अनुसार माघ मास के शुक्ल पक्ष में गुप्त नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। इसे माघी गुप्त नवरात्रि कहते हैं। इस गुप्त नवरात्रि का महत्व अनेक धर्म ग्रंथों में बताया गया है। इस गुप्त नवरात्रि में तंत्र-मंत्र से संबंधित देवी-देवताओं की पूजा की जाती है जैसे- देवी पितांबरा, बगलामुखी, देवी मातंगी और कालभैरव आदि। मान्यता है कि इस नवरात्रि में साधना करने से गुप्त सिद्धियां प्राप्त की जा सकती है। आगे जानें माघी गुप्त नवरात्रि कब से कब तक रहेगी, घट स्थापना का मुहूर्त क्या है व अन्य डिटेल…


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कब से कब तक रहेगी माघी गुप्त नवरात्रि 2026?

धर्म ग्रंथों के अनुसार माघी गुप्त नवरात्रि माघ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होक नवमी तिथि तक मनाई जाती है। इस बार ये पर्व 19 जनवरी, सोमवार से शुरू होगा जो 27 जनवरी, मंगलवार तक मनाया जाएगा। इस दौरान कईं शुभ योग बनेंगे, वहीं 23 फरवरी, शुक्रवार को बसंत पंचमी का पर्व मनाया जाएगा।


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माघी गुप्त नवरात्रि 2026 घट स्थापना मुहूर्त

सुबह 07:14 से 10:46 तक ( विशेष मुहूर्त, अवधि-03 घण्टे 32 मिनिट)
दोपहर 12:11 से 12:53 तक (अभिजित मुहूर्त, अवधि- 42 मिनिट)
सुबह 07:14 से 08:35 तक
सुबह 09:55 से 11:16 तक
दोपहर 01:58 से 03:19 तक
शाम 04:40 से 06:00 तक

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माघी गुप्त नवरात्रि घट स्थापना विधि

जिस स्थान पर आप घट स्थापना करना चाहते हैं, उस साफ कर लें और गंगा जल छिड़ककर पवित्र कर लें। यहां लकड़ी का पटिया रख इस पर लाल कपड़ा बिछा दें। पटिए पर तांबे के कलश में जल भरकर रख दें और इस पर कुंकुम से स्वस्तिक का चिह्न बनाएं। कलश में फूल, दूर्वा, चावल, चंदन, रोली, हल्दी आदि चीजें डालें। कलश पर आम के पत्ते रख इसे नारियल से ढंक दें और ऊं नमश्चण्डिकाये बोलकर स्थापित कर दें। पास में देवी दुर्गा का चित्र रखें। अंत में आरती करें। गुप्त नवरात्रि में रोज 9 दिनों तक इस कलश और देवी दुर्गा की पूजा करें।

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मां दुर्गा की आरती (Devi Durga Ki Aarti)

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशिदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिव री ॥1॥ जय अम्बे…
माँग सिंदुर विराजत टीको मृगमदको।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चन्द्रवदन नीको ॥2॥ जय अम्बे.…
कनक समान कलेवर रक्ताम्बर राजै।
रक्त-पुष्प गल माला, कण्ठनपर साजै ॥3॥ जय अम्बे…
केहरी वाहन राजत, खड्ग खपर धारी।
सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहरी ॥4॥ जय अम्बे…
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योती ॥5॥ जय अम्बे…
शुंभ निशुंभ विदारे, महिषासुर-धाती।
धूम्रविलोचन नैना निशिदिन मदमाती ॥6॥ जय अम्बे…
चण्ड मुण्ड संहारे, शोणितबीज हरे।
मधु कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे ॥7॥ जय अम्बे…
ब्रह्माणी, रूद्राणी तुम कमलारानी।
आगम-निगम-बखानी, तुम शिव पटरानी ॥8॥ जय अम्बे…
चौसठ योगिनि गावत, नृत्य करत भैरूँ।
बाजत ताल मृदंगा औ बाजत डमरू ॥9॥ जय अम्बे…
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
भक्तन की दुख हरता सुख सम्पति करता ॥10॥ जय अम्बे…
भुजा चार अति शोभित, वर मुद्रा धारी।
मनवाञ्छित फल पावत, सेवत नर-नारी ॥11॥ जय अम्बे…
कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
(श्री) मालकेतु में राजत कोटिरतन ज्योती ॥12॥ जय अम्बे…
(श्री) अम्बेजी की आरती जो कोई नर गावै।
कहत शिवानंद स्वामी, सुख सम्पति पावै ॥13॥ जय अम्बे...


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

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