Masik Shivratri 2026: मासिक शिवरात्रि 17 मार्च को, कैसे करें पूजा, कौन-सा मंत्र बोलें? नोट करें शुभ मुहूर्त

Published : Mar 16, 2026, 02:48 PM IST

Masik Shivratri March 2026: भगवान शिव की कृपा पाने के लिए हर महीने शिवरात्रि व्रत किया जाता है। इस व्रत में महादेव की पूजा रात में करने का विधान है। 17 मार्च, मंगलवार को भी मासिक शिवरात्रि व्रत किया जाएगा।

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मासिक शिवरात्रि 2026 पूजा विधि

शिवपुराण के अनुसार, भगवान शिव ने फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को पहली बार लिंग रूप में अवतार लिया था। इसलिए हर महीने इस तिथि पर मासिक शिवरात्रि व्रत किया जाता है। इस बार चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 17 मार्च, मंगलवार को है। यानी इसी दिन मासिक शिवरात्रि का व्रत किया जाएगा। यह हिंदू वर्ष विक्रम संवत 2082 का अंतिम मासिक शिवरात्रि व्रत रहेगा। इस दिन कईं शुभ योग भी बनेंगे। आगे जानिए मासिक शिवरात्रि की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, व अन्य खास बातें…


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17 मार्च 2026 शिवरात्रि व्रत शुभ मुहूर्त

मासिक शिवरात्रि में दिन भर व्रत रखा जाता है और रात में शिवजी की पूजा की जाती है। 17 मार्च, मंगलवार को शिवरात्रि व्रत का पूजा मुहूर्त रात 12 बजकर 05 मिनिट से 12 बजकर 53 मिनिट तक रहेगा। यानी भक्तों को महादेव की पूजा के लिए पूरे 48 मिनट का समय मिलेगा।


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मासिक शिवरात्रि व्रत-पूजा विधि

17 मार्च, मंगलवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद व्रत-पूजा का संकल्प लें। दिन भर व्रत के नियमों का पालन करें। एक समय फलाहार कर सकते हैं। रात को शुभ मुहूर्त में पूजा शुरू करें। शिवलिंग का अभिषेक शुद्ध जल से करें फिर दीपक लगाएं। फूल, बिल्व पत्र, धतूरा आदि चीजें शिवलिंग पर चढ़ाएं। ऊं नम: शिवाय मंत्र का जाप निरंतर करते रहें। महादेव को भोग लगाएं और आरती करें। रात भर भजन-कीर्तन करें। अगले दिन यानी 18 मार्च, बुधवार को ब्राह्मणों को भोजन करवाने के बाद ही स्वयं भोजन करें। इस व्रत को करने से जीवन का हर तरह का सुख आपको मिल सकता है।

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भगवान शिव की आरती (Shiv Ji Ki Aarti Lyrics In Hindi)

जय शिव ओंकारा ऊं जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ 
॥ ऊं जय शिव ओंकारा ॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥
॥ ऊं जय शिव ओंकारा॥
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे ।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥
॥ ऊं जय शिव ओंकारा॥
अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी।
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥
॥ ऊं जय शिव ओंकारा॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥
॥ ऊं जय शिव ओंकारा॥
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥
॥ ऊं जय शिव ओंकारा॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥
॥ ऊं जय शिव ओंकारा॥
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥
॥ ऊं जय शिव ओंकारा॥
त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥
॥ ऊं जय शिव ओंकारा॥


Disclaimer
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