Ganga Saptami 2024 Date: गंगा सप्तमी 14 मई को, नोट करें पूजा विधि-मंत्र सहित पूरी डिटेल

Published : May 10, 2024, 03:12 PM ISTUpdated : May 14, 2024, 08:12 AM IST
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सार

Ganga Saptami 2024 Kab Hai: हर साल वैशाख मास में गंगा सप्तमी का पर्व मनाया जाता है। ये पर्व क्यों मनाते हैं, इसके पीछे कईं रोचक मान्यताएं और परंपराएं हैं। इस बार ये पर्व मई 2024 में है। 

Ganga Saptami 2024 Details: गंगा हिंदुओं की सबसे पवित्र नदी कही गई है। इससे संबंधित अनेक कथाएं धर्म ग्रंथों में मिलती है। हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को गंगा सप्तमी का पर्व मनाया जाता है। इस बार ये पर्व मई 2024 में मनाया जाएगा। इस दिन कईं शुभ योग बन रहे हैं, जिसके चलते इसका महत्व और भी बढ़ गया है। आगे जानिए इस बार कब है गंगा सप्तमी, इस दिन कौन-से शुभ योग बनेंगे, पूजा-विधि-मंत्र आदि डिटेल…

कब है गंगा सप्तमी 2024? (Kab Hai Ganga Saptami 2024)
पंचांग के अनुसार, इस बार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष सप्तमी तिथि 13 मई, सोमवार की रात 02:50 से 15 मई, बुधवार की सुबह 04:19 तक रहेगी। इस हिसाब से सप्तमी तिथि का सूर्योदय 14 मई, मंगलवार को होगा और ये तिथि दिन भर भी रहेगी। इसलिए गंगा सप्तमी का पर्व 14 मई, मंगलवार को मनाया जाएगा। इस दिन पुष्य नक्षत्र भी रहेगा और वर्धमान व आनंद नाम के शुभ योग भी बनेंगे, जिससे इस पर्व का महत्व और भी बढ़ गया है।

क्यों मनाते हैं गंगा सप्तमी का पर्व? (Kyo Manate hai Ganga Saptami)
पुराण के अनुसार, गंगा नदी पर्वतों का राजा हिमालय और मैना की पुत्री हैं। इन्हें देवी पार्वती का बहन भी कहा जाता है। इनका सर्वप्रथम स्थान परमपिता ब्रह्मा के कमंडल में था। वैशाख शुक्ल सप्तमी तिथि को ही गंगा ब्रह्माजी के कमंडल से निकलकर स्वर्ग लोक में प्रवाहित हुईं। तभी से इस तिथि पर हर साल गंगा सप्तमी का पर्व मनाया जाता है।

गंगा सप्तमी पर इस विधि से करें पूजा (Ganga Saptami Puja Vidhi)
- गंगा सप्तमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद हाथ में जल-चावल लेकर व्रत-पूजा का संकल्प लें।
- घर में किसी साफ स्थान पर एक पटिए के ऊपर लाल कपड़ा बिछाकर देवी गंगा की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें।
- अगर तस्वीर या प्रतिमा न हो तो एक कलश में गंगा जल लेकर इसे भी पूजा स्थान पर स्थापित कर सकते हैं।
- देवी के चित्र पर कुमकुम से तिलक लगाएं, फूलों की माना पहनाएं, शुद्ध घी का दीपक लगाएं और हाथ जोड़कर प्रणाम करें।
- इसके बाद अबीर, गुलाल, चावल, फूल, हल्दी, मेहंदी आदि चीजें एक-एक करके देवी गंगा के चित्र पर चढ़ाते रहें।
- इच्छा अनुसार देवी गंगा को भोग लगाएं और अंत में विधि पूर्वक आरती करें। इससे आपकी हर इच्छा पूरी हो सकती है।

गंगा आरती लिरिक्स हिंदी में (Ganga Aarti Lyrics In Hindi)
ओम जय गंगे माता, श्री जय गंगे माता
जो नर तुमको ध्यान, मन वंचित फल पाता
ओम जय गंगे माता …
चंद्रा सी ज्योत तुम्हारी, जल निर्मल आता
शरण पडे जो तेरी, सो नर तर जाता
ओम जय गंगे माता ..…
पुत्रा सागर के तारे, सब जग को ग्याता
कृपा द्रष्टि तुमहारी, त्रिभुवन सुख दाता
ओम जय गंगे माता ..…
एक बर जो परानी, शरण तेरी आता
यम की तस मितकार, परमगति पाता
ओम जय गंगे माता ..…
आरती मात तुमहारी, जो जन नित्य गाता
सेवक वाही सहज मैं, मुक्ति को पाता
ओम जय गंगे माता .....


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Disclaimer : इस आर्टिकल में जो भी जानकारी दी गई है, वो ज्योतिषियों, पंचांग, धर्म ग्रंथों और मान्यताओं पर आधारित हैं। इन जानकारियों को आप तक पहुंचाने का हम सिर्फ एक माध्यम हैं। यूजर्स से निवेदन है कि वो इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

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