
उज्जैन. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य हर 30 दिन में राशि बदलता है। जब भी सूर्य एक राशि से निकलकर दूसरी राशि में प्रवेश करता है तो इसे संक्रांति (Kumbh Sankranti 2023) कहा जाता है। इस बार सूर्य 13 फरवरी, सोमवार को मकर से निकलकर कुंभ राशि में प्रवेश करेगा। सूर्य के कुंभ राशि में जाने से ये कुंभ संक्रांति कहलाएगी। धर्म ग्रंथों में इस घटना को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन सूर्यदेव की पूजा जरूर करनी चाहिए। आगे जानिए कुंभ संक्रांति से जुड़ी खास बातें…
ये शुभ योग बनेंगे कुंभ संक्रांति पर
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार, 13 फरवरी, सोमवार की सुबह 09:48 बजे सूर्य मकर से निकलकर कुंभ राशि में प्रवेश करेगा। इस दिन विशाखा नक्षत्र दिन भर रहेगा, जिससे मित्र नाम का शुभ योग बनेगा। कुंभ राशि में शनि और शुक्र पहले से ही स्थित हैं। इस तरह एक ही राशि में 3 ग्रह (सूर्य, शुक्र और शनि) होने से त्रिग्रही योग बनेगा।
संक्रांति पर स्नान-दान करना शुभ
ज्योतिषाचार्य पं. शर्मा के अनुसार, धर्म ग्रंथों में संक्रांति को एक त्योहार माना गया है। इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने और जरूरतमंदों को दान करने का विशेष महत्व बताया गया है। इस मौके पर पवित्र नदियों के तट पर मेले का आयोजन भी होता है, जिसमें लाखों श्रृद्धालु भाग लेते हैं। इसके अलावा इस दिन पितरों के तर्पण का महत्व भी धर्म ग्रंथों में बताया गया है।
इस विधि से करें सूर्यदेव की पूजा
- कुंभ संक्रांति की सुबह जल्दी उठें और किसी पवित्र नदी या तालाब में स्नान करें। अगर ऐसा न कर पाएं तो घर में ही गंगा की कुछ बूंदे पानी में डालकर स्नान करें। स्नान करते समय स्नान मंत्र जरूर बोलें।
- इसके बाद तांबे के लोटे में पानी लें और इसमें कुमकुम, चावल और लाल फूल डाल लें, सूर्य की ओर मुख करके ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जाप करते हुए जल चढ़ाएं। जल की धारा में सूर्यदेव के दर्शन करें।
- जल ऐसी जगह चढ़ाएं, जहां जमीन पर गिरे हुए पानी पर किसी का पैर न लगे। इस तरह सूर्यदेव को जल चढ़ाने के बाद गेहूं आदि चीजों का दान जरूरतमंद लोगों को करें। इससे आपको शुभ फल मिल सकते हैं।
ये काम भी जरूर करें-
1. कुंभ संक्रांति सोमवार को होने से इस दिन शिवलिंग का अभिषेक भी करें
2. सोमवार के स्वामी चंद्रमा है, इसलिए इस दिन चंद्रमा के मंत्रों का जाप भी करें।
3. गाय को हरा चारा खिलाएं, बंदरों को चने खिलाएं।
4. पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण आदि करें।
Disclaimer : इस आर्टिकल में जो भी जानकारी दी गई है, वो ज्योतिषियों, पंचांग, धर्म ग्रंथों और मान्यताओं पर आधारित हैं। इन जानकारियों को आप तक पहुंचाने का हम सिर्फ एक माध्यम हैं। यूजर्स से निवेदन है कि वो इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें। आर्टिकल पर भरोसा करके अगर आप कुछ उपाय या अन्य कोई कार्य करना चाहते हैं तो इसके लिए आप स्वतः जिम्मेदार होंगे। हम इसके लिए उत्तरदायी नहीं होंगे।
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