Published : Aug 05, 2024, 11:29 AM ISTUpdated : Aug 09, 2024, 07:37 AM IST
Nag Panchami 2024: हमारे देश में अनेक नाग मंदिर हैं, इनमें से कुछ तो बहुत ही रहस्यमयी और अद्भुत हैं। ऐसा ही एक नाग मंदिर केरल में भी है। इस मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जोड़कर देखा जाता है।
Mannarasala Nag Mandir, Kerala: हिंदू धर्म में नागों को भी देवता मानकर उनकी पूजा की जाती है। हमारे देश में कईं प्रसिद्ध नाग मंदिर हैं, जिन्हें देखकर कोई भी आश्चर्य चकित हो सकता है। ऐसा ही एक मंदिर केरल के आलापुज्हा (अलेप्पी) शहर से 37 किलोमीटर दूर है। इसे मन्नारशाला नाग मंदिर कहते हैं। इस मंदिर की सबसे खास बात ये है कि यहां 1-2 नहीं हजारों नाग प्रतिमाएं हैं। नाग पंचमी (9 अगस्त, शुक्रवार) के मौके पर जानिए इस मंदिर से जुड़ी खास बातें…
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यहां हैं 30 हजार से ज्यादा नाग प्रतिमाएं
आम तौर पर किसी भी मंदिर में देवी-देवता की 1 या 2 प्रतिमाएं ही होती हैं, लेकिन मन्नारशाला नाग मंदिर में 30 हजार से अधिक नाग प्रतिमाएं हैं। यह मंदिर 16 एकड़ से अधिक जगह पर फैला हुआ है, यहां जिधर भी देखो नाग प्रतिमाएं भी दिखाई देती हैं। नागपंचमी व अन्य खास मौकों पर यहां भक्तों की भीड़ उमड़ती है। यहां के मुख्य नागदेवता नागराज और नागयक्षी हैं।
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निसंतान लोगों की पूरी होती है कामना
जिन लोगों की कोई संतान नहीं होती, वे यहां हल्दी से बनी नाग प्रतिमा चढ़ाते हैं। इसके पहले पति-पत्नी दोनों मंदिर परिसर में बने तालाब में नहाकर गीले कपड़ों में ही भगवान के दर्शन करते हैं। यहां कांसे का बर्तन रखा होता है, जिसे उरुली कहते हैं। पति-पत्नी इसे पलट कर रख देते हैं। संतान होने पर वे इस बर्तन को सीधा कर इच्छा अनुसार भेंट रखते हैं।
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खांडव वन से भागकर यहां आ गए सर्प
महाभारत में खांडव वन का वर्णन मिलता है। खांडव वन में किसी समय सांप ही सांप निवास करते थे। अर्जुन ने भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर इस स्थान को अपने बाणों से जलाकर राख कर दिया। तब यहां रहने वाले सभी सांप जान बचाकर इधर-उधर भागने लगे। कहते हैं खांडव वन से भागकर वे सांप यहां केरल में आकर बस गए। मन्नारशाला मंदिर में नम्बूदिरी परिवार के लोग ही पूजा करते हैं। ऐसा भी कहा जाता है कि इसी परिवार की एक स्त्री के गर्भ से नागराज ने जन्म लिया था।
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