श्रावण संकष्टी चतुर्थी व्रत कब, 2 या 3 अगस्त? जानें चंद्रोदय का समय, पूजा विधि, मंत्र और मुहूर्त

Published : Aug 01, 2026, 11:51 AM IST
Shravan Sankashti Chaturthi 2026

सार

Shravan Sankashti Chaturthi 2026: श्रावण मास की संकष्टी चतुर्थी व्रत का विशेष महत्व है। इसे गजानन संकष्टी चतुर्थी भी कहते हैं। इस बार ये व्रत अगस्त 2026 के पहले सप्ताह में किया जाएगा।

Gajanan Sankashti Chaturthi 2026: धर्म ग्रंथों के अनुसार हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर भगवान श्रीगणेश को प्रसन्न करने के लिए व्रत किया जाता है। इसे संकष्टी चतुर्थी कहते हैं। इनमें श्रावण मास की संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्व है। इसे गजानन संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। इस बार श्रावण संकष्टी चतुर्थी का व्रत अगस्त 2026 के पहले सप्ताह में किया जाएगा। जानें गजानन संकष्टी चतुर्थी व्रत कब करें, पूजा विधि, मंत्र और मुहूर्त की पूरी डिटेल…

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कब करें गजानन संकष्टी चतुर्थी व्रत 2026?

पंचांग के अनुसार श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 1 अगस्त, शनिवार की रात 11 बजकर 07 मिनिट से शुरू होगा जो अगले दिन यानी 2 अगस्त, रविवार की रात 11 बजकर 15 मिनिट तक रहेगा। चूंकि चतुर्थी तिथि का सूर्योदय 2 अगस्त को होगा, इसलिए इसी दिन गजानन संकष्टी चतुर्थी का व्रत किया जाएगा।

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गजानन संकष्टी चतुर्थी का चंद्रोदय कब होगा?

संकष्टी चतुर्थी व्रत में भगवान श्रीगणेश के साथ-साथ चंद्रमा की पूजा भी की जाती है। इसके बाद ही इस व्रत का पूरा फल मिलता है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी के अनुसार 2 अगस्त, रविवार को चंद्रोदय रात 09 बजकर 24 मिनिट पर होगा। अलग-अलग शहरों में चंद्रोदय के समय में आंशिक परिवर्तन हो सकता है।

गजानन संकष्टी चतुर्थी 2026 शुभ मुहूर्त

सुबह 07:39 से 09:17 तक
दोपहर 12:07 से 12:59 तक (अभिजीत मुहूर्त)
दोपहर 12:33 से 02:11 तक
दोपहर 03:49 से शाम 05:27 तक

गजानन संकष्टी चतुर्थी व्रत-पूजा विधि

- 2 अगस्त, रविवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करें और इसके बाद हाथ में जल, चावल और फूल लेकर व्रत-पूजा का संकल्प लें।
- ऊपर बताए गए किसी शुभ मुहूर्त में घर में किसी साफ स्थान पर भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा लकड़ी के बाजोट यानी पटिए पर स्थापित करें।
- भगवान श्रीगणेश को कुमकुम से तिलक लगाएं, फूलों की माला पहनाएं और शुद्ध घी का दीपक जलाएं। हल्दी लगी दूर्वा भी चढ़ाएं
- इसके बाद रोली, वस्त्र, जनेऊ, अबीर, गुलाल आदि चीजें एक-एक करके अर्पित करें। मन में ऊं गं गणपतये नम: का जाप भी करते रहें।
- नारियल, मौसमी फल, लड्डू, मोदक व अन्य चीजों का अपनी इच्छा अनुसार भोग लगाएं। इसके बाद विधि-विधान से आरती करें।
- चंद्रमा उदय होने पर जल से अर्ध्य दें और फूल-चावल व अन्य चीजों से पूजा करें। परिवार के बुजुर्गों के पैर छूकर आशीर्वाद लें।
- संभव हो तो जरूरतमंदों को दान करें और फिर स्वयं भोजन करें। इस व्रत से घर में सुख-शांति समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है।

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