Angarak Chaturthi 2023 Date: मई 2023 में कब बनेगा अंगारक चतुर्थी का योग, जानें क्यों खास है ये तिथि?

Published : May 11, 2023, 12:27 PM IST
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सार

Angarak Chaturthi 2023: मई 2023 में अंगारक चतुर्थी का योग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र और धर्म ग्रंथों में इस योग को बहुत ही शुभ माना गया है। इस दिन कुछ खास उपाय किए जाएं तो कई तरह की परेशानियों से बचा जा सकता है। 

उज्जैन. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब कोई खास तिथि किसी विशेष दिन होती है तो कई शुभ-अशुभ योग बनते हैं। अंगारक चतुर्थी (Angarak Chaturthi 2023 Kab Hai) भी इनमें से एक है। ये तिथि भगवान श्रीगणेश के साथ-साथ मंगल देव की पूजा के लिए भी बहुत शुभ मानी गई है। इस दिन मंगल ग्रह से संबंधित उपाय करने से कई दोष दूर होते हैं। मई 2023 में अंगारक चतुर्थी का योग बन रहा है, ये योग साल में 2 या 3 बार ही बनता है। आगे जानिए मई 2023 में कब बनेगा ये योग…

इस दिन बनेगा अंगारक चतुर्थी का योग
पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 22 मई, सोमवार की रात 11:19 से शुरू होकर 23 मई, मंगलवार की रात 12:58 तक रहेगी। चूंकि चतुर्थी तिथि का सूर्योदय व चंद्रोदय दोनों ही 23 मई को होगा, इसलिए इसी दिन चतुर्थी तिथि मानी जाती है। मंगलवार को चतुर्थी तिथि होने से ये अंगारक चतुर्थी कहलाएगी।

क्यों खास है अंगारक चतुर्थी?
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी के अनुसार, दोनों पक्षों (शुक्ल और कृष्ण) की चतुर्थी तिथि को भगवान श्रीगणेश और चंद्रमा की पूजा की जाती है। जब भी चतुर्थी तिथि मंगलवार को होती है तो ये अंगारक चतुर्थी कहलाती है। ऐसा संयोग साल में 2-3 बार ही बनता है। इसलिए अंगारक चतुर्थी को बहुत खास माना जाता है।

मंगल की शांति के लिए खास है ये दिन
जिन लोगों की कुंडली में मंगल ग्रह अशुभ स्थिति में हो या वर्तमान में जिसे मंगल ग्रह के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ रहा हो, उनके लिए अंगारक चतुर्थी बहुत ही खास मानी गई है। इस दिन मंगल ग्रह की पूजा करने से व अन्य उपाय करने से मंगल की शांति होती है और परेशानियां कम होती हैं।

श्रीगणेश की पूजा के लिए भी खास दिन
चतुर्थी तिथि के स्वामी स्वयं भगवान श्रीगणेश हैं। इसलिए हर महीने के दोनों पक्षों की चतुर्थी तिथि पर भगवान श्रीगणेश को प्रसन्न करने के लिए व्रत और पूजा की जाती है। कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहते हैं और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को वरद चतुर्थी कहा जाता है।

 

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