Mahakal Sawari 2023 Ujjain: नवंबर-दिसंबर में निकलेगी भगवान महाकाल की 4 सवारी, जानें कब होगा हरि-हर मिलन?

Published : Nov 10, 2023, 11:00 AM IST
Hari-Har-Milan-Tradition

सार

Mahakal Sawari 2023 Ujjain: मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर मंदिर में सावन-भादौ मास की तरह ही कार्तिक-अगहन मास में भी सवारी निकालने की परंपरा है। इस दौरान हरि-हर मिलन भी किया जाता है। जानें महाकाल सवारी और हरि-हर मिलन की डेट्स… 

उज्जैन. मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यहां समय-समय पर कईं विशेष परंपराएं निभाई जाती है। सावन-भादौ मास की तरह कार्तिक-अगहन मास में भी भगवान महाकाल को पालकी में बैठाकर नगर भ्रमण करवाया जाता है। वहीं कार्तिक मास में हरि-हर मिलन की अनूठी परंपरा भी पूरी की जाती है। आगे जानिए इन परंपराओं और डेट्स के बारे में…

क्यों निकालते हैं भगवान महाकाल की सवारी?
महाकालेश्वर मंदिर में हर साल सावन-भादौ और कार्तिक-अगहन मास में भगवान महाकाल की सवारी निकालने की परंपरा है। मान्यता है कि भगवान महाकाल पालकी में सवार होकर अपनी प्रजा का हाल जानने निकलते हैं। इस दौरान भगवान महाकाल की पालकी को शहर के मुख्य मार्गों से निकाला जाता है। भक्त इस दौरान भगवान की एक झलक पाने के लिए घंटों खड़े रहते हैं।

जानें कार्तिक-अगहन सवारी की डेट्स (Mahakal sawari 2023 Dates November-December)
इस बार कार्तिक-अगहन मास में भगवन महाकाल की चार सवारी निकलेगी। प्रत्येक सवारी शाम 4 बजे महाकाल मंदिर परिसर से शुरू होगी, जो शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए रात 8 बजे तक पुन: मंदिर परिसर में प्रवेश करेगी। इस बार कार्तिक शुक्ल पक्ष में पहला सोमवार 20 नवंबर को रहेगा। इसलिए इस दिन से सवारी निकालने की शुरुआत होगी। जानें सवारी की डेट्स…
- पहली सवारी 20 नवंबर (कार्तिक मास)
- दूसरी सवारी 27 नवंबर (कार्तिक मास)
- तीसरी सवारी 4 दिसंबर (अगहन मास)
- चौथी सवारी 11 दिसंबर (अगहन मास)

25 नवंबर को होगा हरि-हर मिलन (Hari-har Milan 2023 date Ujjain)
कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी तिथि की रात भगवान महाकाल की सवारी गोपाल मंदिर तक जाती है। यहां भगवान महाकाल के सामने भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा को बैठाया जाता है। दोनों भगवान की ओर से पंडित पुजारी उपहारों का आदान-प्रदान करते हैं। इसे हरि-हर मिलन कहा जाता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार इस दिन से भगवान शिव विष्णु जी को सृष्टि का संचालन सौंपते हैं।


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