बिहार में इस तारीख के बाद कभी भी बज सकता है चुनावी बिगुल, चुनाव आयोग ने अफसरों को दिए सख्त निर्देश

Published : Sep 25, 2025, 09:27 AM IST
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सार

बिहार चुनाव के लिए चुनाव आयोग ने 6 अक्टूबर तक अधिकारियों के तबादले का निर्देश दिया है। निष्पक्षता हेतु, गृह जिले में तैनाती और 3 साल से अधिक के कार्यकाल पर रोक है। इसके बाद चुनाव की घोषणा हो सकती है।

पटनाः बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। चुनाव आयोग ने राज्य सरकार और प्रशासनिक महकमों को साफ संकेत दे दिया है कि चुनावी आहट बस कुछ ही दिनों की दूरी पर है। आयोग ने निर्देश जारी करते हुए कहा है कि 6 अक्टूबर तक सभी सरकारी अधिकारियों और कर्मियों के तबादले की प्रक्रिया पूरी कर रिपोर्ट सौंपनी होगी। इसके बाद किसी भी दिन बिहार विधानसभा चुनाव की औपचारिक घोषणा हो सकती है।

गृह जिले में पोस्टिंग पर रोक

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (सीईओ) विनोद सिंह गुंजियाल ने बुधवार को मुख्य सचिव, डीजीपी और सभी वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र भेजकर स्पष्ट कर दिया कि चुनाव से जुड़े किसी भी अधिकारी-कर्मी की तैनाती उनके गृह जिले में नहीं होगी। इसके अलावा, जिन अधिकारियों का कार्यकाल 30 नवंबर तक तीन साल या उससे अधिक पूरा हो रहा है, उनका ट्रांसफर अनिवार्य कर दिया गया है।

किन-किन अफसरों पर लागू होगा आदेश?

आयोग का यह आदेश केवल चुनावी अमले तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे प्रशासन और पुलिस महकमे पर लागू होगा।

  • प्रशासनिक अमला: प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO), तहसीलदार, नगर आयुक्त, प्रमंडलीय आयुक्त, अपर समाहर्ता तक शामिल।
  • पुलिस विभाग: एडीजी, आईजी से लेकर जिलों में तैनात इंस्पेक्टर तक।
  • छूट: कंप्यूटराइजेशन, स्पेशल ब्रांच और ट्रेनिंग से जुड़े पुलिस कर्मियों को इस आदेश से बाहर रखा गया है। वहीं, उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग में तीन साल से अधिक समय तक एक ही जगह जमे अफसरों को भी ट्रांसफर किया जाएगा।

निष्पक्ष चुनाव पर फोकस

चुनाव आयोग का साफ कहना है कि बिहार में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराना ही प्राथमिकता है। इसलिए किसी भी अधिकारी को लंबे समय तक एक ही पद पर रहने या गृह जिले में कार्यरत रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी। आयोग ने यह भी संकेत दिया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त के नेतृत्व में आयोग की टीम जल्द ही बिहार का दौरा कर सकती है।

चुनावी बयार तेज

इस सख्त निर्देश के बाद राज्य के प्रशासनिक और पुलिस महकमे में हलचल बढ़ गई है। वहीं, राजनीतिक दल भी अब चुनावी मोड में पूरी तरह सक्रिय हो गए हैं। 6 अक्टूबर की डेडलाइन पूरी होते ही राज्य में कभी भी चुनावी बिगुल बज सकता है और सभी दल मैदान में अपनी ताकत झोंकने उतरेंगे।

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