CG News: कौशल विकास में छत्तीसगढ़ की बड़ी छलांग, लाखों युवाओं को मिला रोजगार

Published : Jul 16, 2026, 09:48 AM IST
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सार

मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत छत्तीसगढ़ में 4.94 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण और 2.74 लाख युवाओं को रोजगार मिला। AI, EV और ड्रोन जैसे आधुनिक कोर्स भी शुरू हुए।

विश्व युवा कौशल विकास दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ सरकार ने कौशल विकास के क्षेत्र में अपनी उपलब्धियों को रेखांकित किया। मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के जरिए राज्य सरकार युवाओं को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप आधुनिक प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने का लगातार प्रयास कर रही है। सरकार का मानना है कि आज के दौर में कौशल ही सबसे बड़ी पूंजी है और जिस युवा के पास हुनर है, उसके लिए अवसरों की कमी नहीं होती।

राज्य सरकार पारंपरिक प्रशिक्षण के साथ-साथ नई तकनीकों पर आधारित कोर्स शुरू कर युवाओं को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार कर रही है। इसके साथ ही प्रशिक्षण की गुणवत्ता, उद्योगों से साझेदारी और रोजगार सुनिश्चित करने की व्यवस्था को भी लगातार मजबूत किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना से करीब 5 लाख युवाओं को मिला प्रशिक्षण

मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना शुरू होने के बाद से अब तक प्रदेश के 4 लाख 94 हजार 330 युवाओं को विभिन्न रोजगारपरक ट्रेडों में कौशल प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इनमें से 2 लाख 74 हजार 934 युवाओं को रोजगार से जोड़ा गया है। वर्तमान में राज्यभर में 375 व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदाताओं के माध्यम से राष्ट्रीय कौशल अर्हता फ्रेमवर्क (NSQF) के अनुरूप प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इनमें 199 शासकीय और 176 निजी संस्थान शामिल हैं।

2025-26 में हजारों युवाओं को मिला प्रशिक्षण और रोजगार

वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 9,418 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है। इनमें से 7,528 युवाओं को रोजगार मिल चुका है, जबकि 6,679 युवा विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं। सरकार का लक्ष्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना भी है।

EV, AI, ड्रोन और साइबर सिक्योरिटी जैसे आधुनिक कोर्स शुरू

बदलते समय की जरूरतों को देखते हुए राज्य सरकार ने कौशल प्रशिक्षण के स्वरूप में बड़ा बदलाव किया है। अब युवाओं को इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) मेंटेनेंस, ड्रोन ऑपरेटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं मशीन लर्निंग (AI-ML), साइबर सिक्योरिटी, सूर्यमित्र (सौर ऊर्जा) सहित 21वीं सदी की तकनीकों से जुड़े आधुनिक पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस वर्ष वॉटर डिस्ट्रीब्यूशन ऑपरेटर कोर्स भी शुरू किया गया है, जिसके तहत 2,770 युवाओं को मल्टी-स्किल प्रशिक्षण देकर सीधे रोजगार से जोड़ने की योजना बनाई गई है।

प्रशिक्षण की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए लागू किए गए नए नियम

राज्य सरकार ने प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कई अहम बदलाव किए हैं। अब प्रत्येक प्रशिक्षक के लिए Training of Trainers (TOT) प्रमाणन अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा प्रत्येक प्रशिक्षणार्थी के लिए मूल्यांकन से पहले कम से कम सात दिन की ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग (OJT) जरूरी की गई है, ताकि उन्हें उद्योगों में काम करने का व्यावहारिक अनुभव मिल सके। सभी प्रशिक्षण केंद्रों में फेस बेस्ड ऑनलाइन बायोमेट्रिक उपस्थिति और आईपी आधारित सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिससे प्रशिक्षण की निगरानी और पारदर्शिता दोनों बढ़ी हैं।

रोजगार सुनिश्चित होने पर ही मिलेगा प्रशिक्षण संस्थानों को पूरा भुगतान

मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना की खास बात यह है कि इसमें प्रशिक्षण के साथ रोजगार को भी प्राथमिकता दी गई है। प्रशिक्षण केंद्रों को अनुमति देने से पहले रोजगार उपलब्ध कराने वाली कंपनियों और संस्थाओं का सत्यापन किया जाता है। इतना ही नहीं, प्रशिक्षण संस्थानों को मिलने वाली राशि का 60 प्रतिशत भुगतान तभी किया जाता है, जब प्रशिक्षित युवाओं का रोजगार सुनिश्चित हो जाता है।

बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच रहा कौशल विकास अभियान

राज्य सरकार आदिवासी और दूरस्थ इलाकों के युवाओं तक भी कौशल विकास की सुविधाएं पहुंचा रही है। बस्तर संभाग के प्रत्येक विकासखंड में स्किल डेवलपमेंट सेंटर (SDC) स्थापित किए जा रहे हैं। बीजापुर में असिस्टेंट मेसन कोर्स शुरू हो चुका है। इसके अलावा बस्तर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, सुकमा, कांकेर और बीजापुर के छह पुनर्वास केंद्रों को व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदाता के रूप में पंजीकृत किया गया है।

महिंद्रा समेत कई बड़ी कंपनियों के साथ साझेदारी से बढ़ रहे रोजगार के अवसर

राज्य सरकार ने उद्योगों की जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षण देने के लिए कई प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ समझौते किए हैं। महिंद्रा एंड महिंद्रा के सहयोग से ट्रैक्टर मैकेनिक प्रशिक्षण चलाया जा रहा है, जिसमें अब तक 101 युवा प्रशिक्षित हो चुके हैं और 60 प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। रायपुर के लाईवलीहुड कॉलेज में साइरोनिक्स टेक्नोलॉजी के सहयोग से इलेक्ट्रिक व्हीकल टेक्नोलॉजी की ट्रेनिंग दी जा रही है।

नांदी फाउंडेशन के माध्यम से 1,142 महिलाओं को एम्प्लॉयबिलिटी स्किल्स का प्रशिक्षण दिया गया है। वहीं पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी और स्वास्थ्य क्षेत्र में भी निजी संस्थानों के साथ मिलकर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।

लाईवलीहुड कॉलेज बने रोजगार और स्वरोजगार के बड़े केंद्र

राज्य के लाईवलीहुड कॉलेज युवाओं के लिए कौशल विकास का मजबूत माध्यम बन चुके हैं। वर्ष 2013 से अब तक 68,552 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है। इनमें 28,820 युवाओं को रोजगार और 10,632 युवाओं को स्वरोजगार मिला है। यानी कुल 39,452 युवा आजीविका से जुड़ चुके हैं। वर्तमान में 2,413 युवा प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। वहीं पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत वर्ष 2024 से अब तक 13,188 युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

आधुनिक अधोसंरचना और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पर सरकार का फोकस

राज्य के 26 जिलों में लाईवलीहुड कॉलेज संचालित हैं। नए जिलों में भवन निर्माण और भूमि आवंटन का कार्य तेजी से चल रहा है। इसके अलावा प्रदेश में 26 बालिका छात्रावास और 20 बालक छात्रावास संचालित हैं। शेष छात्रावासों के निर्माण की प्रक्रिया जारी है। सरकार नवा रायपुर में अत्याधुनिक लाईवलीहुड सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भी स्थापित करेगी। यहां इंजीनियरिंग और गैर-इंजीनियरिंग क्षेत्रों में विश्वस्तरीय प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में 2 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।

राष्ट्रीय स्तर पर भी बढ़ी छत्तीसगढ़ के युवाओं की पहचान

छत्तीसगढ़ के युवा राष्ट्रीय स्तर की कौशल प्रतियोगिताओं में भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। वर्ष 2025-26 में आयोजित इंडिया स्किल प्रतियोगिता में 3,327 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इनमें से 381 प्रतिभागी राज्य स्तर तक पहुंचे। भुवनेश्वर में आयोजित ईस्ट जोन प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ ने 1 स्वर्ण, 2 रजत, 5 कांस्य और 4 मेडल ऑफ एक्सीलेंस सहित कुल 12 पदक जीते। राष्ट्रीय स्तर की इंडिया स्किल प्रतियोगिता में भी राज्य के तीन प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें से एक प्रतिभागी को मेडल ऑफ एक्सीलेंस मिला। उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए भारत सरकार ने छत्तीसगढ़ को प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया।

कौशल विकास से आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ते कदम

राज्य सरकार का मानना है कि कौशल विकास केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह युवाओं को आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी और रोजगार योग्य बनाने का व्यापक अभियान है। नई तकनीकों, उद्योगों के साथ साझेदारी, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण, आधुनिक अधोसंरचना और रोजगार आधारित मॉडल के जरिए छत्तीसगढ़ कौशल विकास के क्षेत्र में देश के लिए एक मजबूत उदाहरण बनकर उभर रहा है। आने वाले वर्षों में यह पहल विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के लक्ष्य को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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