
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नई दिल्ली में संसद भवन पहुंचकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने छत्तीसगढ़ के समग्र विकास, बस्तर के तेजी से बदलते स्वरूप और राज्य की कई महत्वपूर्ण अधोसंरचना तथा औद्योगिक परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के सामने बदलते हुए छत्तीसगढ़ का विजन रखा और केंद्र सरकार से तीन प्रमुख परियोजनाओं के लिए सहयोग का अनुरोध किया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुरक्षा, विश्वास और विकास की संयुक्त रणनीति का असर अब बस्तर में साफ दिखाई दे रहा है। लंबे समय तक नक्सल हिंसा और विकास संबंधी चुनौतियों से जूझने वाला बस्तर अब शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, रेल, बिजली, हवाई संपर्क, पर्यटन और रोजगार के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की कोशिश इस बदलाव को स्थायी स्वरूप देने और बस्तर को पूरी तरह विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की है।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से राजनांदगांव में प्रस्तावित लगभग ₹10,500 करोड़ की गैस आधारित यूरिया परियोजना को शीघ्र स्वीकृति देने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि परियोजना के लिए भूमि उपलब्ध करा दी गई है और राज्य स्तर पर आवश्यक मंजूरियां भी पूरी हो चुकी हैं। इस परियोजना के शुरू होने से छत्तीसगढ़ सहित आसपास के राज्यों के किसानों को उर्वरकों की बेहतर उपलब्धता मिलेगी। साथ ही औद्योगिक निवेश, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
मुख्यमंत्री साय ने उन 461 गांवों का मुद्दा भी प्रधानमंत्री के सामने रखा, जहां सुरक्षा और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण अब तक स्थायी बिजली ग्रिड नहीं पहुंच सका है। वर्तमान में इन गांवों में ऑफ-ग्रिड माध्यम से बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। मुख्यमंत्री ने इन गांवों को स्थायी विद्युत ग्रिड से जोड़ने के लिए केंद्र से विशेष सहायता मांगी। उनका कहना है कि इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार और रोजगार के अवसरों को नई गति मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से रायपुर अथवा बस्तर में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (AIIA) स्थापित करने का अनुरोध भी किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर क्षेत्र, औषधीय वनस्पतियों और पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान की समृद्ध विरासत रखता है। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर का आयुर्वेद संस्थान बनने से चिकित्सा, अनुसंधान, शिक्षा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बड़ा लाभ मिल सकता है।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को ‘बस्तर विजन’ की जानकारी देते हुए बताया कि ‘नियद नेल्ला नार 2.0’ और ‘बस्त मुन्ने’ जैसी पहल के माध्यम से बस्तर संभाग के 5,542 गांवों तक सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है। इन योजनाओं से लगभग 39 लाख लोग लाभान्वित हो रहे हैं। राशन, आयुष्मान भारत, जनधन खाते, वनाधिकार और प्रधानमंत्री आवास जैसी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में वर्षों से बंद पड़े 421 स्कूलों को दोबारा शुरू किया गया है। इसके अलावा दंतेवाड़ा मॉडल की तर्ज पर ओरछा और जगरगुंडा में नई एजुकेशन सिटी विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है। इससे जनजातीय और दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को बेहतर शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर मिलेगा।
मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत अब तक 34 लाख से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि जगदलपुर में सुपर स्पेशियलिटी स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। वहीं गीदम मेडिकल कॉलेज के माध्यम से चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूत किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर के विकास की सबसे बड़ी जरूरत मजबूत कनेक्टिविटी है। उन्होंने प्रधानमंत्री को बताया कि लगभग ₹3,513 करोड़ की लागत वाली जगदलपुर-रावघाट रेल परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है। इसके अलावा जगदलपुर से हवाई सेवाओं के विस्तार और रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेस-वे की प्रगति की जानकारी भी दी गई। इंद्रावती नदी पर प्रस्तावित बैराज परियोजना का भी उल्लेख किया गया, जिससे करीब 32 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर दशहरा को विश्वस्तरीय पर्यटन ब्रांड के रूप में विकसित करने की दिशा में योजनाबद्ध प्रयास किए जा रहे हैं। चित्रकोट और तीरथगढ़ जैसे पर्यटन स्थलों पर बुनियादी सुविधाओं और अधोसंरचना का विस्तार कर उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर प्रमुखता दिलाने की योजना है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर ओलंपिक में 4 लाख से अधिक युवाओं की भागीदारी ने पूरे क्षेत्र में सकारात्मक माहौल तैयार किया है। उन्होंने कहा कि खेलों ने युवाओं को नई दिशा दी है और क्षेत्र में शांति तथा सामाजिक सहभागिता को मजबूत किया है।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को बताया कि औद्योगिक विकास नीति 2024-30 लागू होने के बाद राज्य को लगभग ₹8 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। एआई डेटा सेंटर पार्क, सेमीकंडक्टर, हाइपरस्केल डेटा सेंटर, ग्लोबल बीपीओ, इलेक्ट्रॉनिक्स, गारमेंट और चॉकलेट मैन्युफैक्चरिंग जैसे नए क्षेत्रों में निवेश आ रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पारदर्शी और सरल नीतियों के कारण छत्तीसगढ़ ने निवेशकों के बीच मजबूत पहचान बनाई है। नीति आयोग के इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स में नियामकीय सुगमता और संस्थागत वातावरण के मामले में राज्य को देश में पहला स्थान मिला है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में 10.42 लाख महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाया जा चुका है। अब अगले चरण में 14 लाख और महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। साथ ही वर्ष 2027 में रायपुर में प्रस्तावित लखपति दीदी सम्मेलन में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री मोदी को आमंत्रित किया गया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ₹500 करोड़ के राज्य एआई मिशन के जरिए तकनीक आधारित सुशासन को बढ़ावा दे रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और प्रशासनिक सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग को बढ़ाने पर काम किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को राज्य की वित्तीय स्थिति से भी अवगत कराया। उन्होंने बताया कि जीएसटी संग्रह में 18 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं खनिज राजस्व में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। राज्य ने देश के पहले टिन ब्लॉक और लिथियम ब्लॉक की नीलामी कर नई उपलब्धि हासिल की है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से 36 विभागों की 528 सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। इसके अलावा मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 और डिजिटल रजिस्ट्री जैसी व्यवस्थाओं ने नागरिकों को सरकारी सेवाओं तक आसान पहुंच उपलब्ध कराई है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्र सरकार के सहयोग से छत्तीसगढ़ विकास की नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि बस्तर के विकास, कृषि, स्वास्थ्य, ऊर्जा और औद्योगिक परियोजनाओं से जुड़े राज्य के प्रस्तावों को केंद्र सरकार का सकारात्मक सहयोग मिलेगा। साथ ही राज्य सरकार का लक्ष्य विकास का लाभ अंतिम गांव और अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है।
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