
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी पहल ‘सुशासन तिहार 2026’ के माध्यम से प्रशासन और आम जनता के बीच की दूरी लगातार कम होती नजर आ रही है। इसी अभियान के तहत सारंगढ़ ब्लॉक के ग्राम उलखर और बरमकेला विकासखंड के ग्राम बड़े नावापारा में विशेष शिविरों का आयोजन किया गया। इन शिविरों में 1400 से अधिक ग्रामीणों ने भाग लेकर शासन की योजनाओं और सेवाओं का लाभ उठाया। इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य सरकारी योजनाओं को सीधे ग्रामीणों तक पहुंचाना और उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना था। ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में पहुंचकर अपनी मांगों और शिकायतों का पंजीयन कराया।
ग्राम उलखर में आयोजित शिविर में कुल 638 आवेदन प्राप्त हुए। वहीं बड़े नावापारा शिविर में 836 ग्रामीणों ने विभिन्न समस्याओं और मांगों के समाधान के लिए आवेदन जमा किए। प्रशासन द्वारा सभी आवेदनों को गंभीरता से लेते हुए उनके त्वरित निराकरण की प्रक्रिया शुरू की गई। ग्रामीणों ने राजस्व, राशन कार्ड, आवास, पेंशन, स्वास्थ्य और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं से जुड़ी समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं।
कलेक्टर ने दोनों शिविरों का बारीकी से निरीक्षण किया और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी आवेदनों का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण किया जाए। उन्होंने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन भी किया। निरीक्षण के दौरान यह जानने का प्रयास किया गया कि ग्रामीणों को किन क्षेत्रों में सबसे अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, ताकि भविष्य में उन समस्याओं का स्थायी समाधान किया जा सके।
शिविर के दौरान स्वास्थ्य और आयुष विभाग द्वारा नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर लगाया गया, जहां ग्रामीणों की जांच कर आवश्यक सलाह दी गई। मत्स्य विभाग ने जरूरतमंद हितग्राहियों को जाल वितरित किए। समाज कल्याण विभाग द्वारा दिव्यांग प्रमाण पत्र और पेंशन संबंधी सुविधाएं मौके पर ही उपलब्ध कराई गईं। राजस्व विभाग ने किसान पुस्तिका और बी-1 दस्तावेजों का वितरण किया। वहीं खाद्य विभाग ने पात्र हितग्राहियों को नए राशन कार्ड प्रदान किए।
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को स्वीकृति और पूर्णता प्रमाण पत्र वितरित किए गए। इससे कई परिवारों का पक्के घर का सपना साकार हुआ। ग्रामीणों ने शासन की इस पहल की सराहना करते हुए इसे बेहद लाभकारी बताया।
प्रशासनिक गतिविधियों के साथ-साथ शिविर सामाजिक सरोकारों का भी केंद्र बना रहा। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा गर्भवती महिलाओं की गोदभराई की गई और उन्हें उपहार वितरित किए गए। इसके अलावा छोटे बच्चों का अन्नप्राशन संस्कार भी संपन्न कराया गया, जिससे कार्यक्रम का माहौल भावनात्मक और उत्साहपूर्ण बना रहा।
स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शिविर में छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के विशेष स्टॉल लगाए गए, जिन्होंने ग्रामीणों का ध्यान आकर्षित किया। लोगों ने पारंपरिक व्यंजनों का आनंद लिया। कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी जागरूकता दिखाई गई। उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से जल संरक्षण की शपथ लेकर पानी बचाने का संदेश दिया।
इस सफल आयोजन में क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और विभिन्न विभागों के कर्मचारियों ने मिलकर कार्य किया। सामूहिक प्रयासों के चलते शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम छोर तक रहने वाले लोगों तक आसानी से पहुंच सका।
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