छत्तीसगढ़ के 5 शक्तिपीठों का होगा विकास, श्रद्धालुओं को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं

Published : Oct 15, 2026, 03:55 PM IST
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सार

छत्तीसगढ़ सरकार 5 शक्तिपीठों को जोड़कर 1000 किमी का धार्मिक कॉरिडोर बना रही है। 2026-27 में इसके लिए 5 करोड़ और महामाया मंदिर हेतु 200 करोड़ का प्रस्ताव है। इस परियोजना से राज्य में पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।

रायपुर. छत्तीसगढ़ में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार पांच प्रमुख शक्तिपीठों को जोड़कर धार्मिक पर्यटन कॉरिडोर विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। करीब 1,000 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर के जरिए श्रद्धालुओं को प्रमुख देवी मंदिरों के दर्शन कराने के साथ ही बेहतर सड़क, ठहरने, पेयजल, पार्किंग और सुरक्षा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। छत्तीसगढ़ आस्था पथ योजना के लिए वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में 5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

पांच शक्तिपीठों को जोड़ने की योजना

इस परियोजना में डोंगरगढ़ की मां बम्लेश्वरी, रतनपुर की मां महामाया, दंतेवाड़ा की मां दंतेश्वरी, सूरजपुर के कुदरगढ़ धाम की मां बागेश्वरी और चंद्रपुर की मां चंद्रहासिनी के मंदिर शामिल हैं। इन धार्मिक स्थलों को बेहतर सुविधाओं से जोड़कर श्रद्धालुओं की यात्रा आसान बनाने और पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने की योजना है।

श्रद्धालुओं को मिलेंगी ये सुविधाएं

पांचों मंदिरों में सड़क संपर्क, पेयजल, आधुनिक शौचालय, पार्किंग, बैठने और विश्राम की व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया जाएगा। इसके अलावा प्रकाश व्यवस्था, सीसीटीवी कैमरे, सुरक्षा, पर्यटक सहायता केंद्र, डिजिटल सूचना प्रणाली और प्राथमिक चिकित्सा जैसी सुविधाएं भी विकसित करने की योजना है। स्थानीय संस्कृति और प्राकृतिक वातावरण को सुरक्षित रखते हुए मंदिर परिसरों का सौंदर्यीकरण भी किया जाएगा।

मां महामाया मंदिर के विकास के लिए 200 करोड़ की योजना

केंद्र सरकार की प्रसाद (PRASHAD) योजना के तहत बिलासपुर जिले के रतनपुर स्थित मां महामाया मंदिर के समग्र विकास के लिए 200 करोड़ रुपये की कार्ययोजना तैयार कर पर्यटन मंत्रालय को भेजी गई है। स्वीकृति मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। डोंगरगढ़, कुदरगढ़, चंद्रपुर और दंतेवाड़ा के मंदिरों के विकास के लिए भी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है।

पांचों शक्तिपीठों की अपनी अलग पहचान

  • मां बम्लेश्वरी मंदिर, डोंगरगढ़: पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर छत्तीसगढ़ के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। नवरात्रि में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

मां महामाया मंदिर, रतनपुर 

  • कलचुरी काल से जुड़ा यह ऐतिहासिक मंदिर धार्मिक आस्था के साथ अपनी प्राचीन वास्तुकला के लिए भी जाना जाता है।

मां दंतेश्वरी मंदिर, दंतेवाड़ा

  • बस्तर की आस्था और आदिवासी परंपराओं से जुड़ा यह मंदिर विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा का प्रमुख केंद्र है।

मां बागेश्वरी मंदिर, कुदरगढ़

  • घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच स्थित यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है।

मां चंद्रहासिनी मंदिर, चंद्रपुर

  • महानदी के तट के पास स्थित इस मंदिर में सालभर भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

शक्तिपीठ परियोजना का उद्देश्य धार्मिक पर्यटन को मजबूत करने के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना भी है। बेहतर सुविधाओं से होटल, होम स्टे, परिवहन, स्थानीय दुकानों और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों को लाभ मिल सकता है। इससे छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को पहचान दिलाने और राज्य को प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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