खुफिया सूचना, तड़के ऑपरेशन और घातक हथियार-छत्तीसगढ़ में ऐसा क्या हुआ कि एक साथ ढेर हो गए 14 माओवादी?

Published : Jan 03, 2026, 01:03 PM ISTUpdated : Jan 03, 2026, 01:11 PM IST

Breaking Update: क्या छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की कमर टूट रही है? सुकमा और बीजापुर में तड़के हुए DRG ऑपरेशन में 14 माओवादी मारे गए। AK-47 और INSAS बरामद, बड़े कमांडर के ढेर होने की पुष्टि-जंगलों में सर्च जारी।

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बीजापुर में मुठभेड़ से पहले कौन-सी खुफिया सूचना मिली थी?

Chhattisgarh Maoist Encounter: छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में शनिवार सुबह सुरक्षा बलों और माओवादी नक्सलियों के बीच दो अलग-अलग मुठभेड़ों में 14 माओवादी मारे गए। इन घटनाओं में सुकमा जिले में 12 और बीजापुर जिले में 2 माओवादियों की मौत हुई। यह इस साल का पहला बड़ा नक्सल विरोधी अभियान माना जा रहा है।

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DRG की टीम ने संभाला था ऑपरेशन का मोर्चा

आईजी बस्तर पी सुंदरराज ने बताया कि बीजापुर जिले के दक्षिणी क्षेत्र में सशस्त्र माओवादियों की मौजूदगी की खुफिया जानकारी के आधार पर तलाशी अभियान शुरू किया गया था। डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG) की एक टीम दक्षिण बस्तर क्षेत्र में ऑपरेशन पर थी। सुबह पांच बजे से डीआरजी और माओवादियों के बीच रुक-रुक कर गोलीबारी जारी है। सर्च ऑपरेशन के दौरान मुठभेड़ स्थल से अब तक दो माओवादियों के शव बरामद किए गए हैं।

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कौन-कौन से असलहे हुए बरामद?

सुरक्षा बलों ने खुफिया जानकारी के आधार पर सुकमा के किस्टाराम और बीजापुर जिले के दक्षिणी क्षेत्र में ऑपरेशन शुरू किया। ऑपरेशन के दौरान माओवादी और DRG टीम के बीच रुक-रुक कर गोलीबारी हुई। मौके से AK-47 और INSAS जैसी ऑटोमैटिक राइफलें, बोल्ट-एक्शन राइफल, 12 बोर की सिंगल-बैरल बंदूक, 7.62 मिमी सेल्फ लोडिंग राइफल के 150 जिंदा कारतूस, 5.56 मिमी इंसास राइफल के 150 कारतूस और .303 राइफल के 100 कारतूस बरामद किए गए।

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सुकमा की मुठभेड़: DRG टीम ने कैसे पकड़ा नक्सलियों का जाल?

सुकमा के किस्टाराम थाना क्षेत्र के पामलूर के जंगलों में मुठभेड़ हुई। मारे गए माओवादियों में कोंटा एरिया कमेटी के सचिव सचिन मंगडू भी शामिल थे। DRG ने इलाके में तलाशी अभियान शुरू किया और सुरक्षा बलों के आगमन पर माओवादी ने गोलीबारी शुरू कर दी। सुरक्षाबलों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए 12 माओवादी ढेर कर दिए।

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बीजापुर में किस तरह हुई मुठभेड़?

बीजापुर जिले के दक्षिणी हिस्से में भी सुरक्षाबलों को खुफिया जानकारी मिली। डीआरजी टीम ने तलाशी अभियान के दौरान माओवादी को घेरकर जवाबी कार्रवाई की, जिससे 2 माओवादी ढेर हुए। बरामद हथियारों और गोला-बारूद से यह स्पष्ट हुआ कि माओवादी बड़े स्तर पर हथियार रखकर इलाके में दहशत फैला रहे थे।

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कब शुरू हुआ था ऑपरेशन?

सुकमा एसपी किरण चव्हाण लगातार ऑपरेशन की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। मुठभेड़ वाली जगह से एके-47 और इंसास जैसे ऑटोमैटिक हथियार भी बरामद किए गए हैं। मारे गए अन्य नक्सलियों की पहचान अभी की जा रही। डीआरजी ने शुक्रवार देर शाम पलोदी और पोटाकपल्ली में सर्च ऑपरेशन शुरू किया था। ये दोनों इलाके किस्टाराम थाना क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं.

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क्या यह अभियान नक्सलवाद को खत्म करने की शुरुआत है?

छत्तीसगढ़ पुलिस और DRG अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से लगातार चल रहे माओवादी विरोधी अभियान का यह पहला बड़ा कदम है। 31 मार्च, 2026 तक चलने वाले ऑपरेशन का मकसद नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करना है। अब सवाल यह है कि क्या यह अभियान माओवादियों की कमर तोड़ पाएगा और बस्तर के जंगलों में फिर कभी नक्सल खतरा पैदा नहीं होगा?

छत्तीसगढ़ की सरकारी योजनाएं, शिक्षा-रोजगार अपडेट्स, नक्सल क्षेत्र समाचार और स्थानीय विकास रिपोर्ट्स पढ़ें। रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और बस्तर क्षेत्र की खबरों के लिए Chhattisgarh News in Hindi सेक्शन फॉलो करें — सबसे विश्वसनीय राज्य कवरेज यहीं।

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