छत्तीसगढ़ में मोबाइल मेडिकल यूनिट से गांव-गांव पहुंची स्वास्थ्य सेवा, घर-घर इलाज से बदली ग्रामीणों की जिंदगी

Published : Apr 30, 2026, 02:49 PM IST
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सार

छत्तीसगढ़ के दूरस्थ गांवों में मोबाइल मेडिकल यूनिट से लोगों को घर के पास इलाज मिल रहा है। जनमन योजना के तहत 2035 लोगों को फायदा मिला। अब ग्रामीणों को लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ती और आधुनिक चिकित्सा पर भरोसा बढ़ा है।

​रायपुर। छत्तीसगढ़ के दूर-दराज़ वन क्षेत्रों और कठिन पहाड़ी इलाकों में रहने वाले विशेष पिछड़ी जनजाति बहुल गांवों के लिए सरकार की मोबाइल मेडिकल यूनिट (MMU) किसी वरदान से कम नहीं है। ‘अस्पताल आपके द्वार’ की सोच को साकार करते हुए इस सेवा ने पिछले साढ़े तीन महीनों में 2035 लोगों तक उनके घर के पास ही स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई हैं।

दूरदराज़ इलाकों में स्वास्थ्य सेवा: अब पैदल चलने की मजबूरी खत्म

पहले इन इलाकों के ग्रामीणों को मामूली इलाज के लिए भी कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था। लेकिन अब प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत 15 जनवरी 2026 से शुरू हुई यह मोबाइल यूनिट कमार जनजाति बहुल गांव जैसे बल्दाकछार, औराई और कसडोल क्षेत्र के अन्य गांवों में लगातार कैंप लगा रही है। इससे लोगों को शहर जाने की जरूरत काफी हद तक खत्म हो गई है।

एक ही जगह जांच और मुफ्त दवा: गांव में ही पूरा इलाज

यह मोबाइल मेडिकल यूनिट एक चलते-फिरते अस्पताल की तरह काम करती है। इसमें मेडिकल ऑफिसर, लैब टेक्नीशियन, नर्स और ड्राइवर की टीम मौजूद रहती है।

  • बीपी, शुगर, मलेरिया और हीमोग्लोबिन जैसी जरूरी जांचें मौके पर ही की जाती हैं
  • डॉक्टरों द्वारा परामर्श दिया जाता है
  • मरीजों को मुफ्त दवाइयां भी उपलब्ध कराई जाती हैं

इससे ग्रामीणों को एक ही जगह पर पूरी स्वास्थ्य सुविधा मिल रही है।

पहले से तय शेड्यूल और मुनादी से सूचना: बढ़ रहा भरोसा

प्रशासन द्वारा कैंप की तारीख और स्थान एक महीने पहले तय कर दिए जाते हैं। गांवों में मुनादी (ढोल बजाकर सूचना) के जरिए लोगों को जानकारी दी जाती है। इससे ज्यादा से ज्यादा लोग इस सुविधा का लाभ उठा रहे हैं और उनमें उत्साह भी देखने को मिल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले अस्पताल जाने में पूरा दिन लग जाता था और खर्च भी ज्यादा होता था। अब गांव में ही इलाज मिलने से समय और पैसे दोनों की बचत हो रही है।

पारंपरिक इलाज से आधुनिक चिकित्सा की ओर बढ़ते कदम

इस पहल का सबसे बड़ा असर ग्रामीणों की सोच पर पड़ा है। पहले जहां लोग बैगा-गुनिया और जड़ी-बूटियों पर निर्भर थे, अब वे आधुनिक चिकित्सा पर भरोसा करने लगे हैं। लोग अब बीमारियों को छिपाने के बजाय समय पर जांच और इलाज कराने लगे हैं।

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