छत्तीसगढ़ के सरगुजा में एक बहू ₹500 की पेंशन के लिए अपनी 90 वर्षीय सास को 9 km कंधे पर उठाकर बैंक ले गई। बैंक ने KYC के लिए लाभार्थी की व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य की थी। वीडियो वायरल होने पर प्रशासन ने हस्तक्षेप कर पेंशन दिलाई।
सरगुजा (छत्तीसगढ़): सरकार से मिलने वाली मामूली पेंशन के लिए एक 50 साल की बहू अपनी 90 साल की सास को कंधे पर उठाकर 9 किलोमीटर पैदल चली। यह दिल को झकझोर देने वाली घटना छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के मैनपाट इलाके की है। सुकुमारी बाई नाम की इस दलित महिला को अपनी बुजुर्ग सास के लिए यह सब करना पड़ा, क्योंकि बैंक ने पेंशन के लिए उन्हें खुद आने को कहा था।

सुकुमारी अपनी सास को कंधे पर बिठाकर जंगल के ऊबड़-खाबड़ और पथरीले रास्ते से गुजरीं। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
दरअसल, राज्य में बुजुर्गों को हर महीने 500 रुपए की पेंशन मिलती है। लेकिन पिछले चार महीनों से KYC अपडेट न होने की वजह से यह पेंशन रुकी हुई थी। इस बार बैंक ने साफ कह दिया था कि KYC पूरा करने और अंगूठे का निशान लगाने के लिए पेंशन पाने वाले को खुद बैंक आना होगा। जंगल में रहने वाले इस गरीब परिवार के लिए यह आदेश किसी बड़ी मुसीबत से कम नहीं था। जिस रास्ते पर कोई गाड़ी नहीं चलती, वहां से वे पैदल ही बैंक पहुंचे।
जैसे ही बहू के अपनी सास को कंधे पर ले जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर आया, लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। कई लोगों ने इसे सिस्टम की बड़ी लापरवाही बताया। नियम के मुताबिक, बुजुर्गों और बीमार लोगों को पेंशन घर पर ही दी जानी चाहिए। मामला गरमाने के बाद जिला प्रशासन ने तुरंत दखल दिया। अधिकारियों ने फौरन बुजुर्ग महिला की रुकी हुई पेंशन उन्हें सौंपी। वहीं, बैंक अधिकारियों ने सफाई दी कि 'बैंक मित्र' के जरिए घर पर पेंशन पहुंचाने की सुविधा KYC की समस्या के कारण रुकी हुई थी।
