
देश की न्याय व्यवस्था तेजी से डिजिटल बदलाव के दौर से गुजर रही है। बदलते अपराधों और तकनीकी चुनौतियों को देखते हुए लागू किए गए नए आपराधिक कानून अब न्याय प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, त्वरित और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं। रायपुर में आयोजित "स्ट्रेंथिंग डिजिटल जस्टिस" राज्य स्तरीय कार्यशाला में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि इन कानूनों का उद्देश्य केवल अपराधियों को सजा देना नहीं, बल्कि आम नागरिक को समयबद्ध और सुलभ न्याय उपलब्ध कराना है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लगभग 150 वर्ष पुराने औपनिवेशिक कानूनों की जगह भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) लागू किए गए हैं। इन कानूनों में डिजिटल साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल चैट, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और वैज्ञानिक फॉरेंसिक जांच को कानूनी मान्यता दी गई है।
उन्होंने बताया कि ई-साक्ष्य, ई-समन, न्याय श्रुति, सीसीटीएनएस (CCTNS) और आईसीजेएस (ICJS) जैसी डिजिटल व्यवस्थाओं से अपराध अनुसंधान और न्यायिक प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनी है। अब समन की डिजिटल ट्रैकिंग, ऑनलाइन एफआईआर और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी सुविधाएं न्याय प्रक्रिया को गति दे रही हैं।
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मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि छत्तीसगढ़ के सभी पुलिस थाने ऑनलाइन प्रणाली से जुड़े हैं और अब तक 1 लाख 97 हजार 547 ऑनलाइन एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। नागरिकों को डिजिटल हस्ताक्षरित एफआईआर की प्रति भी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही है।
उन्होंने कहा कि राज्य में साइबर अपराध से निपटने के लिए नौ नए साइबर थाने शुरू किए गए हैं। साथ ही, नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी की शाखा शुरू होने से अपराध जांच और न्यायिक प्रक्रिया को वैज्ञानिक आधार मिलेगा।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने कहा कि नए आपराधिक कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन न्याय प्रणाली को अधिक वैज्ञानिक, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाएगा। उन्होंने कहा कि तकनीक न्यायिक विवेक का विकल्प नहीं, बल्कि उसे अधिक प्रभावी बनाने का माध्यम है।
उन्होंने बताया कि जून माह में जिला न्यायालयों में करीब 9,910 मामलों और हाईकोर्ट में 58 मामलों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई। उन्होंने सभी संबंधित संस्थाओं से डिजिटल प्लेटफॉर्म के अधिकतम उपयोग और समन्वित प्रयासों की अपील की।
राज्य सरकार का कहना है कि नए कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रशिक्षण, तकनीकी क्षमता विकास और नियमित मॉनिटरिंग पर लगातार जोर दिया जाएगा, ताकि आम नागरिक को तेज, पारदर्शी और भरोसेमंद न्याय मिल सके।
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