
दिल्ली में सरकारी सेवाओं को तेज, पारदर्शी और कम झंझट वाला बनाने की दिशा में एक नई पहल शुरू हुई है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ‘Data Dhara’ लॉन्च करने और EkStep Foundation के साथ दिल्ली सरकार के समझौता ज्ञापन (MoU) को महत्वपूर्ण कदम बताया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अलग-अलग सरकारी विभागों के डेटा को सुरक्षित तरीके से जोड़ने से विभागों के बीच तालमेल बेहतर होगा, काम में होने वाली देरी कम होगी और आम नागरिकों के लिए रोजमर्रा की सरकारी सेवाएं आसान बन सकेंगी। यह पहल सिर्फ तकनीक जोड़ने की बात नहीं है। असली लक्ष्य सरकारी रिकॉर्ड में मौजूद बड़ी मात्रा में डेटा को इस तरह व्यवस्थित करना है कि उसका इस्तेमाल बेहतर फैसले लेने और जरूरतमंद लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने में हो सके।
Faster. Transparent. Hassle-free. That is how public services should work for Delhi.
With the launch of ‘Data Dhara’ and our MoU with EKSTEP Foundation, secure data integration will help departments work better together, reduce delays and make everyday governance simpler for… pic.twitter.com/HHWeVYyn18— Rekha Gupta (@gupta_rekha) August 25, 2026
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में 25 अगस्त को दिल्ली सचिवालय में ‘Harmonization and Interlinking of Administrative Data for AI-Ready Governance’ विषय पर उच्चस्तरीय वर्कशॉप हुई। इसमें दिल्ली सरकार के प्रशासनिक सचिव, विभागाध्यक्ष और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
वर्कशॉप का मुख्य विचार साफ था सरकार के अलग-अलग विभागों में मौजूद डेटा अगर अलग-अलग खानों में पड़ा रहेगा तो उसका पूरा फायदा नहीं मिल पाएगा। उसे व्यवस्थित और आपस में जोड़ने की जरूरत है, ताकि एक विभाग की जानकारी दूसरे विभाग के काम भी आ सके और फैसले ज्यादा सटीक तरीके से लिए जा सकें। रेखा गुप्ता ने कहा कि AI का फायदा आम लोगों तक पहुंचना चाहिए। उनके मुताबिक, डेटा AI के लिए ईंधन की तरह है और इसका इस्तेमाल नागरिकों को सशक्त बनाने के लिए किया जाना चाहिए।
वर्कशॉप में ‘Data DHARA for an AI-Ready Delhi’ पर प्रस्तुति दी गई और Data DHARA का टूलकिट तथा विजन पेपर भी लॉन्च किया गया। DHARA का पूरा नाम Data Harnessed for AI-Ready Advancements है। यह एक ओपन-सोर्स, Digital Public Infrastructure आधारित पद्धति है, जिसका उद्देश्य सरकारी विभागों और संस्थानों के डेटा को AI के इस्तेमाल के लिए तैयार करना है। इसे ओपन, प्लग-एंड-प्ले, इंटरऑपरेबल और क्लाउड पर इस्तेमाल किए जा सकने वाले टूलकिट के रूप में विकसित किया गया है। जरूरत के मुताबिक इसे ऑन-प्रिमाइसेस भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
सीधे शब्दों में समझें तो Data DHARA का मकसद केवल डेटा जमा करना नहीं है। मकसद है—डेटा को व्यवस्थित करना, अलग-अलग स्रोतों से आने वाली जानकारी को समझने योग्य बनाना और फिर उससे ऐसे इनसाइट तैयार करना जिनका इस्तेमाल शासन और नागरिक सेवाओं में किया जा सके।
दिल्ली सरकार के Planning Department और EkStep Foundation के बीच MoU हुआ है। इसके तहत EkStep Foundation दिल्ली सरकार के लिए नॉलेज पार्टनर के तौर पर काम करेगी और अपने ओपन फ्रेमवर्क तथा विशेषज्ञता को साझा करेगी। दोनों पक्ष मिलकर दिल्ली सरकार के प्रशासनिक डेटा को AI के इस्तेमाल के लिए तैयार करने और नागरिक सेवाओं को बेहतर बनाने वाले अलग-अलग use cases विकसित करने पर काम करेंगे।
यहां एक अहम बात है। सरकार के पास पहले से नागरिकों, लाभार्थियों, कर्मचारियों, छात्रों, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और सरकारी योजनाओं से जुड़ा काफी प्रशासनिक डेटा मौजूद है। चुनौती अब डेटा इकट्ठा करने से आगे बढ़ने की है—यानी उस डेटा को उपयोगी जानकारी और कार्रवाई में बदलना।
वर्कशॉप में यह भी बताया गया कि डेटा के बेहतर इस्तेमाल से सरकारी योजनाओं की डिलीवरी कैसे सुधारी जा सकती है। उदाहरण के तौर पर प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और दिल्ली लखपति बिटिया योजना जैसी योजनाओं में पात्र लाभार्थियों की पहचान करने और उन्हें योजनाओं से जोड़ने में डेटा का इस्तेमाल किया जा सकता है।
इसी तरह जिन लोगों का किसी योजना में नामांकन नहीं हो पाया है, उनके बीच मौजूद gaps को पहचानने और उन्हें सरकारी सुविधाओं से जोड़ने में भी डेटा मददगार हो सकता है। निर्माण श्रमिकों को अलग-अलग सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए भी ऐसे डेटा-आधारित सिस्टम का इस्तेमाल प्रस्तावित use cases में शामिल है।
यानी भविष्य की व्यवस्था कुछ ऐसी हो सकती है कि नागरिक को हर बार अलग-अलग दफ्तरों में जाकर अपनी पात्रता साबित करने की जरूरत कम पड़े और सरकार उपलब्ध जानकारी के आधार पर खुद पहचान सके कि कौन व्यक्ति किस सुविधा या योजना के लिए पात्र है।
इस पहल के तहत सामने आए use cases सिर्फ सरकारी रिकॉर्ड तक सीमित नहीं हैं। तकनीकी सत्र में Voice AI के जरिए लोगों को उनकी अपनी भाषा में सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने की संभावना पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा नागरिक पंजीकरण के डेटा को कुछ सरकारी बीमा योजनाओं से जोड़ने, निवेशकों के लिए बेहतर facilitation और उपलब्ध incentives की जानकारी आसानी से पहुंचाने जैसे उदाहरण भी सामने रखे गए।
यह बदलाव खास तौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है जिन्हें सरकारी वेबसाइट, फॉर्म या जटिल प्रशासनिक प्रक्रियाओं को समझने में परेशानी होती है। हालांकि, इन संभावनाओं का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि इन्हें जमीन पर कितनी अच्छी तरह लागू किया जाता है।
दिल्ली सरकार की इस पहल में एक बड़ा बदलाव reactive governance से proactive governance की ओर जाने का है। अभी अक्सर नागरिक को समस्या होने के बाद आवेदन करना पड़ता है, शिकायत दर्ज करनी पड़ती है या किसी योजना के लिए खुद जानकारी तलाशनी पड़ती है। डेटा आधारित व्यवस्था का उद्देश्य धीरे-धीरे इस मॉडल को बदलना है।
अगर अलग-अलग विभागों का डेटा सुरक्षित और सही तरीके से आपस में जुड़ता है, तो सरकार पहले से पहचान सकती है कि किस क्षेत्र में किस तरह की जरूरत है, कौन लोग किसी योजना के पात्र हो सकते हैं और कहां सेवा वितरण में कमी रह गई है। यही वजह है कि रेखा गुप्ता सरकार इस पहल को सिर्फ IT प्रोजेक्ट के तौर पर नहीं, बल्कि data-driven governance के हिस्से के रूप में देख रही है।
सरकार ने सुरक्षित डेटा इंटीग्रेशन पर जोर दिया है। यह पहल जितनी बड़ी है, उतनी ही महत्वपूर्ण इसकी सुरक्षा और गोपनीयता भी होगी। दिल्ली सरकार के IT विभाग ने इस साल Digital Personal Data Protection Act, 2023 और Digital Personal Data Protection Rules, 2025 से संबंधित एक सर्कुलर भी जारी किया है। ऐसे में नागरिकों से जुड़े डेटा को जोड़ते समय सुरक्षा, उचित इस्तेमाल और डेटा तक पहुंच के नियम महत्वपूर्ण रहेंगे। यहां चुनौती सिर्फ डेटा जोड़ने की नहीं होगी। यह भी सुनिश्चित करना होगा कि सही डेटा सही विभाग तक पहुंचे, गलत या पुरानी जानकारी से फैसले प्रभावित न हों और नागरिकों की निजी जानकारी का अनावश्यक इस्तेमाल न हो।
Data Dhara और EkStep Foundation के साथ MoU दिल्ली को AI-ready governance की दिशा में ले जाने की कोशिश है। लेकिन किसी भी डिजिटल बदलाव की सफलता लॉन्च या MoU से तय नहीं होगी। असल सवाल यह होगा कि अलग-अलग विभाग अपने डेटा को कितनी तेजी से harmonise करते हैं, डेटा की गुणवत्ता कितनी बेहतर होती है और नागरिकों को इसका सीधा फायदा कब दिखाई देता है। अगर किसी व्यक्ति को सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए कम चक्कर लगाने पड़ें, आवेदन में देरी घटे, पात्र व्यक्ति की पहचान सरकार खुद कर सके और सरकारी सेवाएं ज्यादा आसानी से उपलब्ध हों, तभी इस पहल का असली मतलब सामने आएगा।
दिल्ली सरकार की इस पहल का व्यापक लक्ष्य यही दिखाई देता है—रिकॉर्ड रखने वाली सरकार से डेटा के आधार पर फैसले लेने वाली सरकार की तरफ बढ़ना। और अगर यह बदलाव सही तरीके से लागू हुआ, तो इसका असर सिर्फ सरकारी दफ्तरों में नहीं, बल्कि दिल्ली के आम नागरिक के रोजमर्रा के कामकाज में भी दिखाई दे सकता है।
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