एम्स नई दिल्ली और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने मिलकर टीबी (Tuberculosis) पर एक नई रिसर्च शुरू की है। इसका मकसद टीबी के इलाज को और बेहतर बनाना है।
नई दिल्ली। मरीजों के बेहतर इलाज और नई रिसर्च को लेकर एम्स (AIIMS) नई दिल्ली हमेशा से आगे रहा है। इसी कड़ी में एम्स ने एक और बड़ा कदम उठाया है। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) पहल के तहत 6 अक्टूबर को एम्स के मेडिसिन विभाग में एक नया रिसर्च प्रोजेक्ट शुरू किया गया। इस प्रोजेक्ट का नाम "कॉम्प्रिहेंसिव स्टडी ऑफ जीनोटाइप एंड फीनोटाइप ऑफ माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस अलॉन्ग विद इट्स क्लिनिकल इम्पैक्ट" है।
इस खास मौके पर एम्स नई दिल्ली के डायरेक्टर प्रोफेसर निखिल टंडन और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (दिल्ली जोन) के जनरल मैनेजर एच के दास मौजूद रहे। यह रिसर्च टीबी (Tuberculosis) की बीमारी को गहराई से समझने में मदद करेगी। इसमें टीबी के बैक्टीरिया की जीनोमिक और फीनोटाइपिक प्रोफाइलिंग की जाएगी, ताकि मरीजों का इलाज और सटीक तरीके से हो सके। इस स्टडी का मुख्य मकसद ऐसे ठोस सबूत जुटाना है जिनसे टीबी को बेहतर ढंग से समझा जा सके। रिसर्चर्स यह पता लगाएंगे कि टीबी के बैक्टीरिया के जेनेटिक और फीनोटाइपिक लक्षणों का मरीजों के इलाज पर क्या असर पड़ता है।
कार्यक्रम के दौरान AIIMS के डायरेक्टर ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के एमडी और सीईओ आशीष पांडे को उनके सपोर्ट के लिए धन्यवाद कहा। उन्होंने बताया कि बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने के लिए एम्स जैसे बड़े संस्थानों और सरकारी बैंकों का साथ आना कितना जरूरी है। यह पार्टनरशिप टीबी को जड़ से खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे टीबी उन्मूलन अभियानों को काफी मदद मिलेगी। एम्स नई दिल्ली हमेशा से ऐसी नई रिसर्च और पार्टनरशिप को बढ़ावा देता रहा है, जिससे विज्ञान की तरक्की का सीधा फायदा आम मरीजों को मिल सके।


