
दिल्ली मेट्रो ने अपने 25 साल पूरे होने के साथ ही राजधानी और एनसीआर के लिए भविष्य की बड़ी तैयारी शुरू कर दी है। आने वाले वर्षों में फेज-4, फेज-5 और फेज-5A के तहत मेट्रो नेटवर्क का बड़ा विस्तार किया जाएगा। इस योजना के पूरा होने के बाद 16 नए मेट्रो कॉरिडोर जुड़ेंगे, नेटवर्क में करीब 217 किलोमीटर की बढ़ोतरी होगी और 123 नए स्टेशन यात्रियों के लिए तैयार होंगे। इस विस्तार का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि दिल्ली और एनसीआर के ज्यादा से ज्यादा इलाकों को सीधे मेट्रो नेटवर्क से जोड़ा जा सकेगा। साथ ही इंटरचेंज बढ़ने से यात्रियों का सफर पहले से कहीं ज्यादा आसान हो जाएगा।
फेज-4 के तहत छह बड़े मेट्रो रूट पर निर्माण तेजी से जारी है। इनमें से कई प्रायोरिटी कॉरिडोर इस साल के आखिर तक यात्रियों के लिए खोले जा सकते हैं।
करीब 28.92 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर में 22 स्टेशन बनाए जा रहे हैं। यह मजेंटा लाइन का हिस्सा होगा। इसके शुरू होने के बाद पश्चिमी दिल्ली और उत्तरी दिल्ली के बीच सफर काफी आसान और तेज हो जाएगा।
23.62 किलोमीटर लंबे इस नए रूट पर कुल 15 स्टेशन बनाए जा रहे हैं। इनमें 12 स्टेशन भूमिगत और तीन एलिवेटेड होंगे। यह कॉरिडोर वायलेट लाइन को एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन से जोड़ेगा। इससे फरीदाबाद और दक्षिण दिल्ली के यात्रियों को आईजीआई एयरपोर्ट तक बेहतर और सीधी मेट्रो सुविधा मिलेगी।
करीब 12.55 किलोमीटर लंबे इस एलिवेटेड कॉरिडोर में आठ स्टेशन होंगे। इसी प्रोजेक्ट में दिल्ली का पहला डबल-डेकर फ्लाईओवर भी बनाया जा रहा है। भजनपुरा और यमुना विहार के बीच एक स्तर पर सड़क यातायात और दूसरे स्तर पर मेट्रो ट्रेन चलेगी।
12.37 किलोमीटर लंबे इस रूट से पुरानी दिल्ली और सेंट्रल दिल्ली के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होगी। इसके शुरू होने के बाद कश्मीरी गेट और राजीव चौक जैसे व्यस्त इंटरचेंज स्टेशनों पर यात्रियों का दबाव कम होने की उम्मीद है।
गोल्डन लाइन का लगभग आठ किलोमीटर लंबा यह विस्तार दक्षिण दिल्ली के प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों और बड़े शॉपिंग हब को जोड़ने का काम करेगा। इससे इस इलाके में आने-जाने वाले लोगों को सीधा फायदा मिलेगा।
26.46 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर के जरिए दिल्ली के रोहिणी, बवाना और नरेला जैसे इलाकों को हरियाणा के कुंडली (सोनीपत) से सीधे जोड़ा जाएगा। इससे दिल्ली-हरियाणा के बीच यात्रा पहले से अधिक आसान होगी।
फेज-5A में ऐसे कॉरिडोर शामिल किए गए हैं जो भले ही लंबाई में छोटे हों, लेकिन उनकी उपयोगिता काफी ज्यादा होगी। इस चरण में रामकृष्ण आश्रम मार्ग से इंद्रप्रस्थ तक नया कॉरिडोर बनाया जाएगा, जिससे सेंट्रल विस्टा और भारत मंडपम तक बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। इसके अलावा एयरोसिटी से एयरपोर्ट टर्मिनल-1 और तुगलकाबाद से कालिंदी कुंज तक नए मेट्रो रूट भी प्रस्तावित हैं।
फेज-5B को बड़े विस्तार के रूप में तैयार किया गया है। इसके तहत लगभग 97 किलोमीटर लंबे नेटवर्क में सात नए कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे। इन प्रस्तावित रूटों में शामिल हैं-
इन कॉरिडोर के बनने से दिल्ली के कई ऐसे इलाके पहली बार सीधे मेट्रो नेटवर्क से जुड़ जाएंगे।
इन सभी परियोजनाओं के पूरा होने के बाद दिल्ली मेट्रो नेटवर्क में इंटरचेंज स्टेशनों की संख्या 29 से बढ़कर 55 हो जाएगी। इसका सीधा फायदा यात्रियों को मिलेगा क्योंकि अलग-अलग लाइनों के बीच बदलने में कम समय लगेगा और सफर पहले से ज्यादा सुविधाजनक हो जाएगा। दिल्ली मेट्रो का यह विस्तार सिर्फ नए ट्रैक और स्टेशन जोड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य राजधानी और एनसीआर के लोगों को तेज, आसान और बेहतर सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराना है।
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