
दिल्ली की हवा में प्रदूषण की मार बढ़ते ही सरकार का फोकस अब सिर्फ सड़कों पर गाड़ियों की संख्या कम करने तक सीमित नहीं है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने प्रदूषण जांच व्यवस्था में मौजूद एक बड़ी कमी की ओर इशारा करते हुए PUC सेंटरों की निगरानी सख्त करने का ऐलान किया है। अब Pollution Certificate जारी करने वाली व्यवस्था में टेक्नोलॉजी की बड़ी भूमिका होगी।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मुताबिक सरकार ने पाया कि निजी वाहनों को Pollution Certificate देने वाले कई सेंटर पेट्रोल पंपों के बाहर बूथ के तौर पर संचालित हो रहे थे। ऐसे में निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने का फैसला लिया गया है। इसके तहत हर Pollution Centre को अपग्रेड किया जाएगा और वहां कैमरे लगाए जाएंगे। मकसद यह है कि प्रदूषण जांच की प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी हो और उसकी बेहतर निगरानी की जा सके।
राजधानी दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था को पारदर्शी और तकनीक-सक्षम बनाने के लिए दिल्ली सरकार ने वाहनों की फिटनेस और प्रदूषण जाँच प्रणाली में बड़े सुधार किए हैं। पुराने तरीकों और तकनीकी खामियों को दूर करने के लिए निगरानी तंत्र को कड़ा किया गया है।#DelhiPollution… pic.twitter.com/bXTAQgWMue
— Asianetnews Hindi (@AsianetNewsHN) September 13, 2026
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सरकार ने Commercial Vehicles की Fitness Testing व्यवस्था में भी तकनीकी बदलाव की बात कही है। मुख्यमंत्री के अनुसार अभी कुछ वाहनों को पुराने टेक्नोलॉजी वाले केंद्रों से Fitness Certificate मिल रहा था। अब इसके लिए आधुनिक Automated Testing Stations (ATS) तैयार किए गए हैं, जहां वाहनों की जांच ज्यादा व्यवस्थित और तकनीक आधारित तरीके से की जाएगी।
दिल्ली के Tehkhand और Nand Nagri में State-of-the-Art Automated Testing Stations खोले गए हैं। मुख्यमंत्री के मुताबिक दोनों सेंटरों में से प्रत्येक की क्षमता सालाना करीब 72,000 वाहनों की जांच करने की है। इसका सीधा मतलब है कि Commercial Vehicles की Fitness Testing को पुराने तरीकों से निकालकर ज्यादा आधुनिक और निगरानी वाली व्यवस्था में लाने की कोशिश की जा रही है।
रेखा गुप्ता ने प्रदूषण से निपटने के लिए इसे 360-degree response बताया है। सरकार का फोकस सिर्फ Pollution Certificate पर नहीं, बल्कि वाहन की Fitness Testing और पूरी जांच प्रक्रिया की निगरानी मजबूत करने पर है। सरकार का तर्क है कि अगर वाहनों की जांच व्यवस्था ही मजबूत नहीं होगी तो केवल प्रदूषण नियंत्रण के दूसरे उपाय पर्याप्त साबित नहीं होंगे।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई में सरकार, सिस्टम और लोगों को मिलकर समाधान तलाशना होगा। उन्होंने भरोसा जताया कि मजबूत निगरानी और नई तकनीक के सहारे दिल्ली प्रदूषण की चुनौती से मुकाबला करेगी। अब देखने वाली बात होगी कि नए कैमरा-आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम और Automated Testing Stations जमीन पर किस तरह लागू होते हैं और इनका वास्तविक असर दिल्ली के प्रदूषण स्तर पर कितना दिखाई देता है।
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