
दिल्ली में यमुना की सफाई और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में दिल्ली नगर निगम (MCD) और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के बीच कंप्रेस्ड बायो गैस (CBG) परियोजनाओं की स्थापना के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस पहल का उद्देश्य गोबर के वैज्ञानिक प्रबंधन के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा और जैविक खाद का उत्पादन बढ़ाना है।
अब तक प्रतिदिन लगभग 1,500 मीट्रिक टन गोबर यमुना में पहुंचता था, जिससे नदी के प्रदूषण पर गंभीर असर पड़ता था। नई परियोजना के तहत इस गोबर को वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस कर कंप्रेस्ड बायो गैस (CBG) और जैविक खाद में बदला जाएगा।
सरकार का मानना है कि इससे यमुना में प्रदूषण कम होगा, स्वच्छता अभियान को मजबूती मिलेगी और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस परिणाम देखने को मिलेंगे। साथ ही जैविक खाद के उपयोग से कृषि क्षेत्र को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।
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यह परियोजना केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे गौशालाओं और पशुपालकों को भी सीधा आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है। गोबर के उचित उपयोग से उन्हें अतिरिक्त आय का नया स्रोत मिलेगा। इसके साथ ही स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ने से हरित ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा और कचरा प्रबंधन की व्यवस्था भी अधिक प्रभावी होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की परियोजनाएं शहरी क्षेत्रों में अपशिष्ट प्रबंधन का बेहतर मॉडल बन सकती हैं।
दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में MCD और NDDB के बीच यह महत्वपूर्ण समझौता हुआ। इस अवसर पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह, दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू, दिल्ली नगर निगम के महापौर प्रवेश वाही और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। सरकार का कहना है कि यह पहल स्वच्छ दिल्ली, स्वच्छ यमुना और हरित ऊर्जा के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के साथ-साथ टिकाऊ विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती देगी।
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