Handloom Hackathon 2.0: हैंडलूम और टेक्नोलॉजी का संगम, IIT दिल्ली में सामने आए भविष्य बदलने वाले आइडिया

Asianet News   | ANI
Published : Aug 03, 2026, 01:22 PM IST
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सार

IIT दिल्ली में आयोजित हैंडलूम हैकथॉन 2.0 में देशभर की 100 टीमों ने हिस्सा लिया। AI, डिजिटल मार्केटिंग और करघा आधुनिकीकरण से जुड़े समाधान सामने आए।

नई दिल्ली। IIT दिल्ली में आयोजित हैंडलूम हैकथॉन 2.0 का दूसरा संस्करण सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। "वीविंग इनोवेशंस" थीम पर आयोजित इस कार्यक्रम को फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (FITT), आईआईटी दिल्ली ने कपड़ा मंत्रालय के सहयोग से आयोजित किया।

कपड़ा मंत्रालय के अनुसार, इस हैकथॉन के लिए 2,500 से अधिक लोगों ने पंजीकरण कराया था। इनमें से देशभर की 100 सर्वश्रेष्ठ टीमों के 280 प्रतिभागियों को फाइनल चरण के लिए चुना गया। इन प्रतिभागियों का लक्ष्य भारत के हैंडलूम सेक्टर की चुनौतियों के लिए तकनीक आधारित व्यावहारिक समाधान तैयार करना था।

Handloom Technology Innovation: करघों से लेकर बाजार तक के समाधान

यह हैकथॉन केवल एक प्रतियोगिता नहीं था, बल्कि इनोवेटर्स, शोधकर्ताओं, शिक्षकों और हैंडलूम विशेषज्ञों को एक मंच पर लाने की राष्ट्रीय पहल भी थी। प्रतिभागियों ने करघों के आधुनिकीकरण, डिजाइन विकास, सस्टेनेबिलिटी, बाजार तक पहुंच और बुनकरों की आय बढ़ाने जैसे विषयों पर अपने विचार और समाधान प्रस्तुत किए। फाइनल में पहुंची टीमों ने ऐसे कई अभिनव मॉडल और तकनीकी समाधान पेश किए जिनका उद्देश्य उत्पादकता बढ़ाना, पारंपरिक हस्तकला को संरक्षित करना और भारतीय हैंडलूम उद्योग को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना है।

सरकार, शिक्षा जगत और उद्योग ने मिलकर दिया इनोवेशन को बढ़ावा

कार्यक्रम में डेवलपमेंट कमिश्नर (हैंडलूम्स) एम. बीना, आईआईटी दिल्ली के टेक्सटाइल एंड फाइबर इंजीनियरिंग विभाग की प्रमुख प्रोफेसर दीप्ति गुप्ता, आईआईटी दिल्ली एलुमनाई एसोसिएशन के सचिव पंकज कपाड़िया और थिंकस्टार्टअप के सह-संस्थापक संजीवा शिवेश सहित कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं। इस आयोजन ने एक बार फिर दिखाया कि सरकार, अकादमिक संस्थान और उद्योग जगत मिलकर हैंडलूम क्षेत्र में नवाचार को नई दिशा देने का काम कर रहे हैं।

M Beena Statement: हैंडलूम विरासत और तकनीक के भविष्य को जोड़ने की पहल

प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए एम. बीना ने भारत की समृद्ध हैंडलूम परंपरा और आधुनिक तकनीक के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हैंडलूम भारत की गौरवशाली विरासत है, जबकि तकनीक भविष्य का रास्ता है। इस तरह के आयोजन दोनों को एक साथ जोड़कर बुनकर समुदाय को मजबूत बनाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हैंडलूम क्षेत्र स्वाभाविक रूप से सस्टेनेबिलिटी और सर्कुलर अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देता है। ऐसे में डिजाइन विकास, करघा संचालन और आधुनिक विपणन में नवाचार की बड़ी भूमिका है।

Indian Handmade Portal: बुनकरों को मिलेगा सीधा वैश्विक बाजार

एम. बीना ने डेवलपमेंट कमिश्नर (हैंडलूम्स) कार्यालय की कई पहलों का उल्लेख किया। इनमें "इंडियन हैंडमेड पोर्टल" प्रमुख है। यह एक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से बुनकर बिना किसी बिचौलिए के सीधे देश और दुनिया के ग्राहकों तक अपने उत्पाद पहुंचा सकते हैं।

उन्होंने आईआईटी और एनआईएफटी जैसे संस्थानों के साथ साझेदारी को भी महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना था कि इससे ऐसे समाधान विकसित होंगे जो शारीरिक श्रम को कम करेंगे, बुनाई प्रक्रिया में वैज्ञानिक सटीकता लाएंगे और बुनकरों की आय बढ़ाने में मदद करेंगे।

IIT Delhi Handloom Centre: जल्द शुरू होगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

आईआईटी दिल्ली की प्रोफेसर दीप्ति गुप्ता ने जानकारी दी कि संस्थान में जल्द ही "सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर हैंडलूम टेक्नोलॉजी" की शुरुआत की जाएगी। उन्होंने बताया कि यह केंद्र हैंडलूम और तकनीक के बीच सहयोग को और मजबूत करेगा। इसका उद्देश्य हाथ से बने वस्त्रों की विशिष्टता को बनाए रखते हुए उत्पादन क्षमता और मानकीकरण को बढ़ावा देना है। प्रस्तावित है कि अगले सप्ताह कपड़ा मंत्रालय के सहयोग से इसका उद्घाटन किया जाएगा।

Handloom Sector Revival: टेक्नोलॉजी से बदलेगी बुनकरों की तस्वीर

आईआईटी दिल्ली एलुमनाई एसोसिएशन के सचिव पंकज कपाड़िया ने कहा कि हैंडलूम उद्योग को नई गति देने में तकनीक की अहम भूमिका है। उन्होंने पारंपरिक कौशल और आधुनिक नवाचार के इस मेल को समय की जरूरत बताया। वहीं, थिंकस्टार्टअप के सह-संस्थापक संजीवा शिवेश ने फाइनलिस्ट टीमों की सराहना करते हुए कहा कि उनका चयन ही एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने प्रतिभागियों को भविष्य में भी ऐसे समाधान विकसित करते रहने के लिए प्रेरित किया, जो समाज और अर्थव्यवस्था दोनों पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकें।

Handloom Hackathon Winners: चार श्रेणियों में सम्मानित हुईं विजेता टीमें

हैंडलूम हैकथॉन 2.0 में विजेताओं को चार प्रमुख श्रेणियों में सम्मानित किया गया। इनमें बुनकरों की आजीविका और वित्तीय समावेशन, बाजार पहुंच और डिजिटल इंटीग्रेशन, सस्टेनेबिलिटी एवं पर्यावरणीय प्रभाव तथा डिजाइन एवं संचालन में नवाचार शामिल रहे। विजेता समाधानों में बुनकरों के लिए AI आधारित प्लेटफॉर्म, डिजिटल मार्केट एक्सेस टूल, पर्यावरण अनुकूल रंगाई और मॉनिटरिंग सिस्टम, करघों के आधुनिकीकरण तथा डिजाइन सुधार से जुड़े तकनीकी नवाचार शामिल रहे। इन विजेता टीमों में KCG कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी, IIHT सेलम, IIT मद्रास, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, ईश्वर कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, कुमारगुरु कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी, KLB IIHT हैदराबाद और स्टार्टअप सविन्या स्टूडियो के प्रतिभागी शामिल रहे।

Textile Ministry Vision: टेक्नोलॉजी आधारित हैंडलूम इकोसिस्टम की ओर बड़ा कदम

हैंडलूम हैकथॉन 2.0 का सफल आयोजन कपड़ा मंत्रालय की उस सोच को मजबूत करता है, जिसके तहत देश के हैंडलूम इकोसिस्टम को अधिक आधुनिक, टिकाऊ और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा रहा है। युवा इनोवेटर्स को इस क्षेत्र की वास्तविक चुनौतियों पर काम करने का अवसर देकर मंत्रालय न केवल नवाचार को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि भारत की समृद्ध हैंडलूम विरासत को संरक्षित रखने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। प्रोडक्टिविटी, सस्टेनेबिलिटी और बाजार प्रतिस्पर्धा को बेहतर बनाने की यह पहल आने वाले समय में लाखों बुनकरों के लिए नई संभावनाएं पैदा कर सकती है।

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