Swachh Bharat Mission: फिलिप मॉरिस इंडिया और लिटरेटी ने दिल्ली में कचरा कम करने के लिए एक नई पहल शुरू की है। 'प्रोजेक्ट उन्मेष' के तहत, यह टीम AI तकनीक का इस्तेमाल करके उन जगहों की पहचान करेगी जहां सबसे ज्यादा कचरा फेंका जाता है, ताकि लोगों की आदतों में सुधार लाया जा सके।

Litterati AI Technology: फिलिप मॉरिस इंडिया ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड (पीएम इंडिया) ने ग्लोबल सिविक टेक कंपनी 'लिटरेटी' के साथ हाथ मिलाया है। दोनों मिलकर दिल्ली में 12 महीने का एक खास एंटी-लिटरिंग (कचरा विरोधी) अभियान शुरू कर रहे हैं। यह पहल पीएम इंडिया के सीएसआर प्रोग्राम 'प्रोजेक्ट उन्मेष' का हिस्सा है। इसका मकसद पर्यावरण को बचाना और सार्वजनिक जगहों को साफ-सुथरा बनाना है। इसके जरिए टीम यह समझेगी कि लोग कचरा कैसे और कहां फेंकते हैं।

दिल्ली में इसके पहले चरण के तहत लिटरेटी की खास तकनीक और AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) इमेज रिकग्निशन का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे उन जगहों (हॉटस्पॉट) का पता लगाया जाएगा जहां सबसे ज्यादा कचरा जमा होता है। इस डेटा की मदद से पीएम इंडिया ऐसे समाधान तैयार करेगी जिससे लोगों की कचरा फेंकने की आदत में बदलाव आए और कचरे का सही तरीके से निपटारा हो सके।

तकनीक और जमीनी निगरानी के जरिए यह अभियान स्वच्छ भारत मिशन को भी सपोर्ट करेगा। इससे पहले भी पीएम इंडिया ने वर्ल्ड क्लीनअप डे पर '#CleanWithBittu' अभियान चलाया था। तब दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में वॉलंटियर्स ने मिलकर 4,000 किलो से ज्यादा कचरा साफ किया था। इसमें से 1,600 किलो कचरे को रीसायकल या कंपोस्ट किया गया, जिससे करीब 2,200 किलो CO₂ उत्सर्जन को रोका जा सका। अब इस नई साझेदारी से कचरा फैलने के पैटर्न को गहराई से समझने में मदद मिलेगी।

डेटा के जरिए कचरे की समस्या का समाधान

फिलिप मॉरिस इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर नवनील कर ने बताया, "कचरे की समस्या को सिर्फ सफाई से खत्म नहीं किया जा सकता। हमें लोगों की आदतों और स्थानीय चुनौतियों को समझना होगा। #CleanWithBittu अभियान के बाद, लिटरेटी के साथ हमारी यह साझेदारी इसी दिशा में अगला कदम है। 'प्रोजेक्ट उन्मेष' के जरिए हम कचरा प्रबंधन और पर्यावरण सुरक्षा पर फोकस कर रहे हैं। हमें उम्मीद है कि डेटा और लोगों की भागीदारी से हम स्वच्छ भारत मिशन के लक्ष्यों को हासिल कर पाएंगे।"

तकनीक से मिलेंगे पुख्ता सबूत

इस पहल पर बात करते हुए लिटरेटी के को-फाउंडर और चीफ स्ट्रैटेजी ऑफिसर डिक आयर्स ने कहा, "कचरा सिर्फ एक दिखने वाली समस्या है, लेकिन यह कहां से आता है और कैसे फैलता है, इसके लिए डेटा की जरूरत होती है। इस साझेदारी के जरिए हम शहरी इलाकों में कचरे की पूरी तस्वीर साफ करेंगे और हॉटस्पॉट की पहचान करेंगे। हमारा लक्ष्य ऐसे पुख्ता सबूत जुटाना है जिससे नीतियां बनाने और सार्वजनिक जगहों को साफ रखने में मदद मिल सके।"

एक ऐसा मॉडल जिसे हर जगह लागू किया जा सके

लिटरेटी का मानना है कि डेटा पर्यावरण में बदलाव लाने का एक मजबूत हथियार है। यह कंपनी 100 से ज्यादा देशों में लाखों लोगों के साथ जुड़कर कचरे का दुनिया का सबसे बड़ा डेटाबेस तैयार कर चुकी है। पीएम इंडिया के साथ मिलकर यह संस्था कचरे की मैपिंग और हॉटस्पॉट की पहचान करेगी। इस प्रोग्राम का मकसद एक ऐसा मॉडल तैयार करना है जिसे दूसरी जगहों पर भी आसानी से लागू किया जा सके।

अगर ग्लोबल लेवल पर बात करें, तो फिलिप मॉरिस इंटरनेशनल अपनी सस्टेनेबिलिटी रणनीति के तहत पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम करने पर काम कर रहा है। इसमें संसाधनों को बचाना, कचरा कम करना और रीसायकलिंग को बढ़ावा देना शामिल है।

लिटरेटी एक सिविक टेक कंपनी है जो कम्युनिटी साइंस और AI इमेज रिकग्निशन की मदद से बड़े पैमाने पर कचरे को मापने और कम करने का काम करती है।