
दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लाखों लोगों को मालिकाना हक दिलाने की दिशा में दिल्ली सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल को पत्र लिखकर संशोधित प्रधानमंत्री अनधिकृत कॉलोनियां दिल्ली आवास अधिकार योजना (PM-UDAY) के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पहले चरण में केंद्र सरकार से 100 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता देने का अनुरोध किया है।
मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में कहा कि संशोधित PM-UDAY योजना को तेज़ी से लागू करने के लिए आवश्यक संसाधनों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को मजबूत करना जरूरी है। इसके लिए केंद्र सरकार से प्रारंभिक वित्तीय सहयोग की मांग की गई है, ताकि योजना का लाभ समय पर अधिक से अधिक पात्र नागरिकों तक पहुंच सके।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल को भेजे पत्र में कहा कि संशोधित PM-UDAY योजना के सफल और प्रभावी संचालन के लिए पहले चरण में 100 करोड़ रुपये की सहायता उपलब्ध कराई जाए। दिल्ली सरकार का मानना है कि इस राशि से योजना के क्रियान्वयन के लिए जरूरी तकनीकी, प्रशासनिक और आधारभूत व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा सकेगा। इससे अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को संपत्ति अधिकार देने की प्रक्रिया और अधिक तेज तथा पारदर्शी बनेगी।
PM-UDAY (Pradhan Mantri Unauthorized Colonies in Delhi Awas Adhikar Yojana) केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है, जिसका उद्देश्य दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को उनकी संपत्तियों पर कानूनी मालिकाना अधिकार प्रदान करना है। योजना के तहत पात्र निवासियों को संपत्ति के स्वामित्व संबंधी दस्तावेज उपलब्ध कराए जाते हैं। इससे संपत्ति खरीदने-बेचने, बैंक से ऋण लेने और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं में आने वाली दिक्कतें कम होती हैं।
दिल्ली सरकार संशोधित PM-UDAY योजना को अधिक प्रभावी तरीके से लागू करने पर जोर दे रही है। सरकार का उद्देश्य है कि पात्र लोगों को जल्द से जल्द मालिकाना अधिकार मिलें और वर्षों से लंबित समस्याओं का समाधान हो। मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में इस बात पर भी बल दिया कि केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच बेहतर समन्वय से योजना का लाभ व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाया जा सकता है।
दिल्ली की अनेक अनधिकृत कॉलोनियों में बड़ी संख्या में परिवार वर्षों से रह रहे हैं। संशोधित PM-UDAY योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से इन परिवारों को कानूनी सुरक्षा, संपत्ति का अधिकार और भविष्य में विभिन्न सरकारी सुविधाओं का लाभ मिलने की उम्मीद है। यदि केंद्र सरकार पहले चरण में 100 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता को मंजूरी देती है, तो योजना के कार्यान्वयन की प्रक्रिया और अधिक गति पकड़ सकती है।
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