
इम्फाल. मणिपुर हिंसा को लेकर जारी एक्शन के बीच CBI ने बुधवार को जांच के लिए देश भर में अपनी यूनिट से 29 महिलाओं सहित 53 अधिकारियों को नियुक्त किया है। इस टीम में तीन DIGs-लवली कटियार, निर्मला देवी और मोहित गुप्ता के अलावा SP राजवीर शामिल हैं, जो ज्वाइंट डायरेक्टर घनश्याम उपाध्याय को रिपोर्ट करेंगे। उपाध्याय ओवरऑल जांच की निगरानी करेंगे।
मणिपुर हिंसा की CBI जांच और पढ़िए 12 बड़े अपडेट
1. एक अधिकारी के अनुसार, यह अपनी तरह की पहली लामबंदी मानी जा रही है, जहां इतनी बड़ी संख्या में महिला अधिकारियों को एक साथ सेवा में लगाया गया है।
2.सूत्रों ने कहा कि इनमें से कई मामलों की जांच सीबीआई द्वारा की जा रही है, जिन पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के प्रावधान लागू हो सकते हैं, जिनकी जांच डीएसपी रैंक के अधिकारी द्वारा की जा सकती है। सूत्रों के अनुसार, दो एएसपी और 6 डीएसपी (सभी महिलाएं) भी 53 सदस्यीय फोर्स का हिस्सा हैं।
3.एक अधिकारी के अनुसार, चूंकि डीएसपी ऐसे मामलों में सुपरवायजरी आफिसर नहीं हो सकते हैं, इसलिए एजेंसी ने जांच की निगरानी और सुपरविजन के लिए तीन डीआइजी और एक एसपी को भेजा है।
4. इसके अलावा 16 इंस्पेक्टर और 10 सब-इंस्पेक्टर भी टीम का हिस्सा होंगे। अधिकारियों ने कहा कि आम तौर पर जब इतनी बड़ी संख्या में मामले सीबीआई को सौंपे जाते हैं, तो एजेंसी मेन पॉवर उपलब्ध कराने के लिए संबंधित राज्य पर भी निर्भर करती है।
5. अधिकारियों ने कहा, लेकिन मणिपुर के मामले में वे जांच में पक्षपात के किसी भी आरोप से बचने के लिए स्थानीय अधिकारियों की भूमिका को कम करने की कोशिश करेंगे।
6. एजेंसी ने पहले से ही 8 मामले दर्ज किए हैं, जिनमें 4 मई को भीड़ द्वारा महिलाओं को निर्वस्त्र करने और परेड कराने से जुड़े दो मामले भी शामिल हैं। इस घटना का वीडियो 16 जुलाई को सोशल मीडिया पर आने के बाद बड़े पैमाने पर हंगामा हुआ था।
7. अधिकारियों ने बताया कि सीबीआई मणिपुर हिंसा से संबंधित 9 और मामलों की जांच करने के लिए तैयार है, जिससे एजेंसी द्वारा जांच किए गए मामलों की कुल संख्या 17 हो जाएगी।
8. घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने कहा कि केंद्रीय एजेंसी की जांच इन 17 मामलों तक सीमित नहीं होगी। उन्होंने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराध या यौन उत्पीड़न से संबंधित किसी अन्य मामले को भी प्राथमिकता के आधार पर भेजा जा सकता है।
9. अधिकारियों के अनुसार, जांच एजेंसी राज्य के चुराचांदपुर जिले में कथित यौन उत्पीड़न के एक और मामले को अपने हाथ में ले सकती है।
10. अधिकारियों ने कहा कि समाज जातीय आधार पर बंटा हुआ है, ऐसे में सीबीआई को मणिपुर ऑपरेशन के दौरान पक्षपात के आरोपों से बचने की महत्वपूर्ण चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि एक समुदाय के लोगों की किसी भी संलिप्तता के परिणामस्वरूप उंगली उठने की संभावना है।
11. केंद्रीय जांच एजेंसी सभी फोरेंसिक सैम्पल्स को राष्ट्रीय राजधानी स्थित अपनी केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला में स्थानांतरित करेगी।
12. बता दें कि मणिपुर में 3 मई को राज्य में जातीय हिंसा भड़कने के बाद से 160 से अधिक लोग मारे गए हैं और कई सौ घायल हुए हैं। यह हिंसा तक शुरू हुई, जब बहुसंख्यक मैतेई समुदाय की अनुसूचित जनजाति को दर्जा देने की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में 'आदिवासी एकजुटता मार्च' आयोजित किया गया था। मणिपुर की आबादी में मैतेई लोगों की संख्या लगभग 53 प्रतिशत है। वे ज्यादातर इम्फाल घाटी में रहते हैं, जबकि आदिवासी, जिनमें नागा और कुकी शामिल हैं, 40 प्रतिशत हैं और ज्यादातर पहाड़ी जिलों में रहते हैं।
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