
गांधीनगर। गुजरात के गांधीनगर स्थित महात्मा मंदिर में शनिवार से संक्रामक रोगों और तेजी से बढ़ रहे एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) के खतरे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर का वैज्ञानिक मंथन शुरू हो गया। क्लिनिकल इन्फेक्शियस डिजीज सोसाइटी (CIDS) की 16वीं वार्षिक परिषद CIDSCON 2026 का उद्घाटन राज्य के स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया ने किया।
इस वर्ष सम्मेलन की थीम “Addressing AMR: From Awareness to Action” रखी गई है। इसमें भारत के अलावा अमेरिका और सिंगापुर जैसे देशों से आए इन्फेक्शियस डिजीज विशेषज्ञ, माइक्रोबायोलॉजिस्ट, शोधकर्ता और चिकित्सक हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन का मकसद एंटीबायोटिक दवाओं के बढ़ते प्रतिरोध के खिलाफ व्यावहारिक समाधान तलाशना है।
उद्घाटन समारोह में स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया ने कहा कि छोटी-छोटी बीमारियों में जरूरत से ज्यादा ताकतवर या हाई-डोज एंटीबायोटिक लिखने की बढ़ती प्रवृत्ति गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि अगर यही स्थिति बनी रही तो भविष्य में सामान्य संक्रमणों का इलाज भी मुश्किल हो सकता है। उन्होंने बताया कि गुजरात सरकार जल्द ही एलोपैथी, आयुर्वेद और होम्योपैथी समेत सभी चिकित्सा पद्धतियों के डॉक्टरों को साथ लेकर राज्यव्यापी जागरूकता अभियान शुरू करेगी, ताकि एंटीबायोटिक के जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा दिया जा सके।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मन की बात' कार्यक्रम का जिक्र करते हुए मंत्री ने कहा कि बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाएं लेने की आदत तेजी से बढ़ रही है। इसका असर यह हो रहा है कि निमोनिया और यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन जैसी आम बीमारियों में भी कई एंटीबायोटिक पहले जितनी प्रभावी नहीं रह गई हैं। उन्होंने डॉक्टरों से अपील की कि मरीजों को यह जरूर समझाएं कि एंटीबायोटिक का पूरा कोर्स समय पर पूरा करना जरूरी है। बीच में दवा छोड़ देना भविष्य में दवा प्रतिरोध की समस्या को और गंभीर बना सकता है।
प्रफुल पानशेरिया ने साफ कहा कि एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस के खिलाफ लड़ाई केवल सरकारी अस्पतालों या स्वास्थ्य विभाग तक सीमित नहीं है। इसमें डॉक्टरों, अस्पतालों, फार्मासिस्टों और आम नागरिकों की समान जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में एंटीमाइक्रोबियल स्टेवार्डशिप प्रोग्राम और मजबूत संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था समय की जरूरत बन चुके हैं।
राज्य सरकार रोगों की समय रहते पहचान और नियंत्रण के लिए आधुनिक डिजिटल सिस्टम पर भी तेजी से काम कर रही है। मंत्री ने बताया कि Gujarat State AMR Surveillance Network और AMR Dashboard के जरिए प्रयोगशाला आधारित निगरानी और पूर्व चेतावनी प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य संक्रमण के फैलाव और दवा प्रतिरोध की स्थिति पर लगातार नजर रखना है, ताकि समय पर आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
कार्यक्रम में मंत्री ने मानसिक स्वास्थ्य को भी उतना ही महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के बाद तनाव और अवसाद जैसी समस्याएं तेजी से सामने आई हैं। ऐसे समय में मानसिक रूप से मजबूत रहना और लोगों में जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सम्मेलन में सामने आने वाले नए शोध और वैज्ञानिक निष्कर्ष मरीजों के इलाज को और बेहतर बनाने में मदद करेंगे।
CIDS के अध्यक्ष डॉ. सुब्रमण्यम स्वामीनाथन ने बताया कि हाल ही में उनके पास एक ऐसा मरीज आया था जो 11 वर्षों से गंभीर रेजिस्टेंट संक्रमण से जूझ रहा था और कई जगह इलाज के बाद भी ठीक नहीं हो पाया था। उन्होंने कहा कि उनकी टीम के क्लिनिकल फार्माकोलॉजिस्ट ने विशेष दवा तैयार कर उसका इलाज किया और आखिरकार मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर वापस आया। उनके मुताबिक यह उदाहरण बताता है कि सही विशेषज्ञता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जटिल संक्रमणों का भी समाधान संभव है। उन्होंने कहा कि CIDS पिछले दो दशकों में वरिष्ठ विशेषज्ञों के निस्वार्थ मार्गदर्शन से इस मुकाम तक पहुंचा है और भविष्य में माइक्रोबायोलॉजी, फार्मेसी, नर्सिंग, पब्लिक हेल्थ और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत होगी।
सम्मेलन के ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन डॉ. अतुल पटेल ने कहा कि आज संक्रामक रोग लगातार अपना स्वरूप बदल रहे हैं। ऐसे में मानव, पशु और पर्यावरण के स्वास्थ्य को साथ लेकर चलने वाला One Health मॉडल बेहद जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा कि एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस अब कोई भविष्य की आशंका नहीं बल्कि रोजमर्रा की चिकित्सा की वास्तविक चुनौती है।
डॉ. पटेल ने चेतावनी दी कि अगर एंटीबायोटिक बेअसर होती गईं तो जटिल सर्जरी, कैंसर इम्यूनोथेरेपी और आधुनिक चिकित्सा की कई उपलब्धियां भी जोखिम में पड़ सकती हैं। उन्होंने डॉक्टरों से अपील की कि दवा लिखने से पहले सटीक जांच करें, माइक्रोबायोलॉजी सेवाओं का बेहतर उपयोग करें और सही मात्रा तथा तय अवधि तक ही एंटीबायोटिक दें।
सम्मेलन के दौरान 'Antimicrobial Stewardship Program' पुस्तक का भी लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में CIDS की सचिव डॉ. नेहा गुप्ता, कोषाध्यक्ष डॉ. कविता, साइंटिफिक चेयरपर्सन डॉ. तनु सिंघल, सह-आयोजन अध्यक्ष डॉ. हर्ष तोशनीवाल और आयोजन सचिव डॉ. सुरभि मदान सहित बड़ी संख्या में चिकित्सक, शोधकर्ता और विशेषज्ञ मौजूद रहे।
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