World Sanskrit Day 2025: संस्कृत सप्ताहोत्सव में भव्य आयोजन, CM भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात में नई पहल

Published : Aug 05, 2025, 08:58 AM IST
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सार

विश्व संस्कृत दिवस के मौके पर 6 से 8 अगस्त 2025 तक मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की अगुवाई में तीन दिवसीय संस्कृत गौरव यात्रा, संभाषण व साहित्य दिवस कार्यक्रम होंगे। इसका उद्देश्य संस्कृत के संरक्षण, प्रचार और युवा पीढ़ी को जोड़ना है।

गांधीनगर। हमारे यहां संस्कृत के बारे में कहा गया है, ‘अमृतम् संस्कृतम् मित्र, सरसम् सरलम् वचः। एकता मूलकम् राष्ट्रे, ज्ञान विज्ञान पोषकम्।।’ अर्थात, हमारी संस्कृत भाषा सरस भी है, और सरल भी। संस्कृत अपने विचारों, अपने साहित्य के माध्यम से ज्ञान, विज्ञान और राष्ट्र की एकता को मजबूत बनाती है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इस उक्ति का उल्लेख करते हुए इस बात पर बल दिया है कि अधिक से अधिक लोग संस्कृत पढ़ें और उसका अध्ययन करें। दुनिया की सबसे प्राचीन भाषा कही जाने वाली संस्कृत भाषा भारत की ऋषि परंपरा, दर्शन, अध्यात्म और सांस्कृतिक चेतना की जीवंत अभिव्यक्ति है। संस्कृत केवल एक भाषा नहीं है, अपितु यह जीवन दृष्टि है, जो मनुष्य के सर्वांगीण विकास में मार्गदर्शक की भूमिका निभाती है।

उल्लेखनीय है कि भारत में प्रति वर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा (रक्षाबंधन पर्व) के दिन संस्कृत दिवस मनाया जाता है और इसके प्रचार-प्रसार के लिए पूरे भारत में संस्कृत सप्ताह मनाया जाता है। इस वर्ष 9 अगस्त को विश्व संस्कृत दिवस है, ऐसे में 6 से 12 अगस्त 2025 के दौरान संस्कृत सप्ताह मनाया जाएगा। गुजरात में मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात सरकार द्वारा संस्कृत सप्ताह के अवसर पर तीन दिवसीय विशेष समारोह का आयोजन किया जाएगा।

6 से 8 अगस्त तक संस्कृत गौरव यात्रा, संभाषण दिवस और साहित्य दिवस का आयोजन

वर्ष 1969 में भारत सरकार और संस्कृत संस्थाओं के सहयोग से संस्कृत दिवस मनाने की शुरुआत हुई थी। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य संस्कृत भाषा को बढ़ावा देना, इसके महत्व के बारे में जागरूकता फैलाना और नई पीढ़ी को इस प्राचीन भाषा के साथ जोड़ना है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत संस्कृत भाषा के संरक्षण और संवर्धन के लिए गुजरात राज्य संस्कृत बोर्ड की ओर से राज्य में 6 से 8 अगस्त 2025 के दौरान तीन दिवसीय कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। पहले दिन संस्कृत गौरव यात्रा, दूसरे दिन संस्कृत संभाषण दिवस और तीसरे दिन संस्कृत साहित्य दिवस मनाया जाएगा।

संस्कृत गौरव यात्रा का आयोजन जिला एवं राज्य स्तर पर होगा, जिसके अंतर्गत संस्कृत ज्ञान विरासत की झांकियों की प्रदर्शनी, संस्कृत साहित्य कृतियों, संस्कृत गान और नारों के साथ विद्यार्थी, शिक्षक, स्कूल, संस्कृत के विद्वान, कवि और लेखक यात्रा में शामिल होंगे। दूसरे दिन संस्कृत संभाषण दिवस पर मुख्यमंत्री सहित जिला और राज्य स्तर पर अधिकारी एवं मंत्री संस्कृत भाषा में संदेश प्रेषित करेंगे। तीसरे दिन संस्कृत साहित्य दिवस पर पूरे राज्य में विभिन्न स्तरों पर वेद पूजन, व्यास पूजन, ऋषि पूजन, आचार्य पूजन, संस्कृत साहित्य से संबंधित सभाओं और व्याख्यानों का आयोजन कर समाज में संस्कृत साहित्य का गौरव स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा।

संस्कृत संवर्धन के माध्यम से संस्कृति का प्रसार

गुजरात सरकार के ‘गुजरात राज्य संस्कृत बोर्ड’ की ओर से राज्य में संस्कृत के सर्वांगीण विकास के लिए ‘योजना पंचकम्’ (पांच योजनाओं का समूह या संग्रह) के अंतर्गत पांच विशिष्ट योजनाएं- संस्कृत सप्ताहोत्सव, संस्कृत संवर्धन सहायता योजना, संस्कृत प्रोत्साहन योजना, श्रीमद् भगवद गीता योजना तथा शत सुभाषित कंठ पाठ योजना लागू की गई हैं।

संस्कृत सप्ताहोत्सव योजना के अंतर्गत पूरे राज्य में उत्साहपूर्वक संस्कृत सप्ताह और दिवस मनाने की पहल की जाएगी। संस्कृत संवर्धन सहायता योजना के अंतर्गत संस्कृत के प्रचार हेतु विभिन्न गतिविधियों के आयोजन के लिए संस्थाओं, शोधकर्ताओं और शिक्षकों को वित्तीय सहायता दी जाएगी।

संस्कृत प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत माध्यमिक स्कूलों में संस्कृत विषय के साथ पढ़ाई के लिए विद्यार्थी, शिक्षक और विद्यालयों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। श्रीमद् भगवद गीता योजना के अंतर्गत राज्य के बच्चे-बड़ों, सभी लोगों को ‘श्रीमद् भगवद गीता’ की मदद से जीवन जीने की सही दिशा पर चिंतन करने और गीता कंठस्थ करने के लिए प्रोत्साहन दिया जाएगा। शत सुभाषित कंठ पाठ योजना के अंतर्गत नैतिक मूल्यों के विकास के लिए 100 सुभाषित कंठस्थ करने के लिए प्रोत्साहन दिया जाएगा।

गुजरात राज्य संस्कृत बोर्ड की ओर से शुरू की गई ‘योजना पंचकम्’ का लक्ष्य संस्कृत भाषा का संरक्षण करना, इसकी लोकप्रियता बढ़ाना और भावी पीढ़ियों को राष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत के साथ जोड़ना है।

संस्कृत भाषा को और अधिक लोकप्रिय बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार प्रतिबद्ध

संस्कृत दिवस मनाने के लिए श्रावण पूर्णिमा का दिन इसलिए चुना गया क्योंकि प्राचीन भारत में इसी दिन शैक्षणिक सत्र की शुरुआत होती थी। विद्यार्थी इसी दिन से शास्त्रों का अध्ययन शुरू करते थे। आज भी वेदों का अध्ययन का प्रारंभ श्रावणी पूर्णिमा से होता है। इस दिन को ऋषि-मुनियों की परंपरा और वैदिक ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। संस्कृत दिवस और संस्कृत सप्ताह भारत की सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण भाग है। केंद्र और राज्य सरकार आधुनिक समय में टेक्नोलॉजी और शिक्षा के माध्यम से संस्कृत को और अधिक लोकप्रिय एवं सुलभ बनाने के प्रयास कर रही हैं।

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