
हवा में उड़ते हुए विमान का गर्व, घर के आंगन में गूंजती हंसी और माता-पिता की आंखों में चमक- एक पल में बदलकर गहरी चुप्पी और टूटे सपनों में तब्दील हो जाती है. हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले का पत्यालकार गांव आज उसी चुप्पी से भरा है, जहां हर गली एक ही शब्द कह रही है, हमारा बेटा लौट आया है, लेकिन इस बार तिरंगे में लिपटा हुआ.
दुबई एयर शो 2025 के दौरान एलसीए तेजस विमान के क्रैश में शहीद हुए विंग कमांडर नमांश स्याल के पार्थिव अवशेष रविवार को उनके पैतृक गांव पत्यालकार पहुंचाए गए. विमान हादसे के तुरंत बाद भारतीय वायुसेना ने उनकी शहादत की पुष्टि की थी. तेजस के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद आग लग गई थी, जिसमें विंग कमांडर स्याल ने देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए.
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जैसे ही सैन्य वाहन गांव में दाखिल हुआ, पूरा पत्यालकार शहीद को अंतिम विदाई देने उमड़ पड़ा. गांव के निवासी संदीप कुमार ने कहा, “नमांश हमारे गांव का बेटा ही नहीं, हमारा छोटा भाई था. कुछ महीने पहले ही वह गांव आया था. हम सबके पास शब्द नहीं हैं.”
पंकज चड्ढा, जो सैनिक स्कूल सुजानपुर तिहरा में उनके साथ पढ़े थे, ने बताया,“हमने अपना एक नगीना खो दिया. वह स्कूल की शान था. उसकी उपलब्धियां हम सभी के लिए गर्व थीं. आज हम भारी दिल से उसका अंतिम दर्शन करने जा रहे हैं.”
विंग कमांडर स्याल के चाचा मदन लाल ने कहा,“पूरा गांव शोक में है. नमांश बचपन से ही तेज, अनुशासित और बेहद होनहार था. उसने कभी पढ़ाई में पहला स्थान छोड़ा ही नहीं. आज देश ने एक असाधारण बेटा खो दिया.”
उनके पार्थिव अवशेष को आज सुबह सुलूर एयर बेस, कोयंबटूर लाया गया. दुबई में अमीराती डिफेंस फोर्स ने उन्हें सम्मानित गार्ड ऑफ ऑनर दिया, जो उनके साहस और सेवा का प्रतीक था. इसके बाद विशेष विमान से भारत लाया गया.
शहीद विंग कमांडर नमांश स्याल अपने पीछे पत्नी, छह वर्षीय बेटी और माता-पिता को छोड़ गए. उनकी पत्नी और परिवार के टूटे हुए शब्द भी यह समझाने में असमर्थ हैं कि देश के लिए बलिदान देने वाला यह बेटा कितना बड़ा नुकसान है.
तेजस विमान हादसा केवल एक एयर शो दुर्घटना नहीं, बल्कि उस शूरवीर की अंतिम उड़ान थी जिसने देश की सेवा को जीवन का सबसे बड़ा कर्तव्य माना. आज पत्यालकार से लेकर पूरे भारत में एक ही भावना है, वीर लौटते हैं, लेकिन कहानियों में, इतिहास में और हर भारतीय के गर्व में जीवित रहते हैं।
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