BRICS Culture Summit 2026: UNESCO से AI तक, भोपाल से दुनिया को मिला संस्कृति सहयोग का नया रोडमैप

Published : Aug 10, 2026, 07:17 PM IST
BRICS Culture Working Group Meeting 2026 bhopal

सार

भोपाल में 11वीं BRICS संस्कृति मंत्रियों की बैठक का समापन हुआ। ‘भोपाल घोषणा पत्र’ के साथ UNESCO, डिजिटल प्लेटफॉर्म और सांस्कृतिक सहयोग पर अहम सहमति बनी।

भोपाल में 11वीं ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठक और BRICS Culture Working Group (CWG) की बैठकों का सफल समापन हो गया है। ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ की भारतीय भावना और भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की थीम 'Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability' यानी लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण के संकल्प के साथ आयोजित यह तीन दिवसीय सम्मेलन कई मायनों में अहम रहा।

कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में हुए इस बहुपक्षीय आयोजन ने संस्कृति और रचनात्मकता को अंतरराष्ट्रीय सहयोग का माध्यम बनाने पर जोर दिया। सम्मेलन से यह संदेश भी सामने आया कि जब अलग-अलग देशों की परंपराएं, सांस्कृतिक विरासत और रचनात्मकता एक मंच पर आती हैं, तो वे आपसी सम्मान, शांति और समावेशी विकास की मजबूत जमीन तैयार कर सकती हैं।

भोपाल में सम्मेलन के दौरान भारत समेत कुल 14 देशों के 55 उच्चस्तरीय प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इनमें 10 ब्रिक्स सदस्य देश—ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल रहे। इसके अलावा चार साझेदार देशों बेलारूस, क्यूबा, कजाकिस्तान और थाईलैंड के प्रतिनिधि भी पहुंचे।

इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात के संस्कृति मंत्रियों ने स्वयं भोपाल आकर चर्चा में हिस्सा लिया, जबकि मिस्र के संस्कृति मंत्री ने ऑनलाइन माध्यम से बैठक में भाग लिया।

BRICS Culture Working Group Meeting: अप्रैल से भोपाल तक बनी सहमति की जमीन

भोपाल में हुआ मंत्री स्तरीय सम्मेलन अचानक हुई कोई बैठक नहीं थी। इसके लिए भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत संस्कृति क्षेत्र में कई चरणों में बातचीत हुई। इस प्रक्रिया की शुरुआत 29-30 अप्रैल 2026 को पहली ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह की वर्चुअल बैठक से हुई। इसके बाद 4-5 जून को वाराणसी में दूसरी कार्य समूह बैठक आयोजित की गई, जिसमें संस्कृति से जुड़ी नीतिगत प्राथमिकताओं पर चर्चा हुई।

इसके बाद 5-6 अगस्त को भोपाल में तीसरी कार्य समूह बैठक हुई। इसी बैठक ने मंत्री स्तर की बातचीत और अंतिम सहमति के लिए आधार तैयार किया। आखिरकार 8 अगस्त 2026 को 11वीं ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठक के दौरान इन चर्चाओं को अंतिम रूप मिला और सभी देशों ने सर्वसम्मति से ‘भोपाल घोषणा पत्र’ को स्वीकार किया।

BRICS Digital Platform: कलाकारों के लिए बनेगी साझा डिजिटल डायरेक्टरी

भोपाल सम्मेलन की बड़ी उपलब्धियों में भारत का ‘स्वैच्छिक कलाकार रजिस्ट्री’ प्रस्ताव भी शामिल रहा। इस प्रस्ताव को सभी सहभागी देशों ने सर्वसम्मति से स्वीकार किया। भारत की पहल के तौर पर शुरू होने वाला यह पायलट प्रोजेक्ट आगे चलकर एक साझा BRICS डिजिटल प्लेटफॉर्म का रूप लेगा। इसका उद्देश्य सरकारी स्तर के सांस्कृतिक संबंधों को कलाकारों, विचारकों, शिल्पकारों और रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े उद्यमियों तक सीधे पहुंचाना है।

इस डिजिटल मंच पर ब्रिक्स सदस्य और साझेदार देशों के कलाकारों की एक विस्तृत डायरेक्टरी तैयार की जाएगी। इसके साथ ही सांस्कृतिक और रचनात्मक उद्योगों से जुड़ी नीतियों, दुर्लभ पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण, ऐतिहासिक स्थापत्य विरासत और रचनात्मक पद्धतियों से जुड़ी जानकारी भी साझा की जाएगी।

इससे ब्रिक्स देशों के बीच ज्ञान, तकनीक और सांस्कृतिक क्षेत्र की बेहतर कार्यप्रणालियों का आदान-प्रदान आसान हो सकेगा। कलाकार दूसरे देशों के अनुभवों से सीखने के साथ डिजिटल माध्यमों के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजार तक भी पहुंच बना सकेंगे। इस पहल से रचनात्मक क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर, पेशेवर नेटवर्क और People-to-People Contact को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

UNESCO World Heritage: BRICS देश साझा विरासत के लिए देंगे संयुक्त नामांकन

भोपाल सम्मेलन में सांस्कृतिक सहयोग से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण प्रस्ताव सामने आया। इसके तहत ब्रिक्स देश अपनी साझा स्थापत्य, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परंपराओं को UNESCO World Heritage List में शामिल कराने के लिए संयुक्त या बहुराष्ट्रीय नामांकन दाखिल करेंगे।

इस पहल का उद्देश्य उन ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंधों को दुनिया के सामने लाना है, जो सदियों से अलग-अलग ब्रिक्स देशों को एक-दूसरे से जोड़ते रहे हैं। साझा नामांकन से सांस्कृतिक कूटनीति को मजबूती मिलने के साथ उन विरासत स्थलों के संरक्षण और प्रबंधन में भी अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ सकता है, जिनका इतिहास एक से अधिक देशों से जुड़ा है।

Cultural Heritage Protection: चोरी और तस्करी की गई धरोहरों की वापसी पर जोर

‘भोपाल घोषणा पत्र’ में गैर-कानूनी तरीके से हटाई गई या तस्करी की गई सांस्कृतिक संपदा की पहचान और उसे उसके मूल स्थान तक सुरक्षित वापस पहुंचाने पर भी सहमति बनी। इसके लिए आधुनिक तकनीक और Artificial Intelligence (AI) आधारित ट्रैकिंग टूल्स के इस्तेमाल की संभावनाओं पर जोर दिया गया। साथ ही पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों और पारंपरिक सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को संरक्षित करने की दिशा में भी प्रतिबद्धता जताई गई। संग्रहालयों, पुस्तकालयों और अभिलेखागारों के डिजिटलीकरण के जरिए दस्तावेजी विरासत को भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने की बात भी घोषणा पत्र का हिस्सा रही।

Bhopal Declaration 2026: संस्कृति सहयोग का नया रोडमैप

8 अगस्त 2026 को अपनाया गया ‘भोपाल घोषणा पत्र’ ब्रिक्स देशों के बीच कई दौर की बातचीत का परिणाम है। इसे केवल एक औपचारिक दस्तावेज के बजाय आने वाले वर्षों में सांस्कृतिक सहयोग, विरासत संरक्षण, डिजिटल नवाचार और रचनात्मक अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने वाले रोडमैप के तौर पर देखा गया। घोषणा पत्र में सांस्कृतिक और रचनात्मक उद्योगों को सतत विकास तथा आर्थिक समृद्धि का महत्वपूर्ण माध्यम माना गया है। इसके जरिए ब्रिक्स देशों ने सांस्कृतिक नीतियों को आधुनिक अर्थव्यवस्था के साथ जोड़ने की प्रतिबद्धता दोहराई।

कलाकारों के अधिकारों की सुरक्षा और डिजिटल दौर में सामने आ रही नई चुनौतियों पर भी ध्यान दिया गया। खास तौर पर AI सिस्टम में कॉपीराइट से सुरक्षित रचनाओं के इस्तेमाल में पारदर्शिता और रचनाकारों को उनके बौद्धिक श्रम के लिए उचित पारिश्रमिक देने पर जोर दिया गया।

घोषणा पत्र में ब्रिक्स देशों के संग्रहालयों, पुस्तकालयों और अभिलेखागारों के बीच सीधे सहयोग और विशेषज्ञता साझा करने के लिए स्थायी ढांचा विकसित करने की बात भी सामने आई। इससे संकेत मिलता है कि ब्रिक्स का सांस्कृतिक एजेंडा अब केवल समय-समय पर होने वाली बैठकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे परिणाम आधारित और संस्थागत सहयोग की दिशा में आगे ले जाने की कोशिश होगी।

Madhya Pradesh Tourism: ब्रिक्स प्रतिनिधियों ने देखी भोपाल और MP की सांस्कृतिक विरासत

सम्मेलन की बैठकों के अलावा प्रतिनिधिमंडलों के लिए मध्यप्रदेश की संस्कृति, इतिहास और पर्यटन को करीब से देखने के कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। प्रतिनिधियों ने भोपाल स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय का दौरा किया। यहां उन्होंने भारत के जनजातीय जीवन, लोक परंपराओं और सभ्यतागत यात्रा को समझा।

इसके बाद भोपाल की हेरिटेज वॉक में गौहर महल, इकबाल मैदान और मोती मस्जिद की वास्तुकला देखी। वन विहार की जैव-विविधता और बड़ा तालाब में शिकारा सवारी भी प्रतिनिधियों के कार्यक्रम का हिस्सा रही। प्रतिनिधिमंडल ने UNESCO World Heritage Sites सांची और भीमबेटका का भी दौरा किया। केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के नेतृत्व में 42 सदस्यीय दल ने सांची के बौद्ध स्तूपों, तोरण द्वारों और संग्रहालय का अवलोकन किया।

शाम को आयोजित लाइट एंड साउंड शो के जरिए भगवान बुद्ध के जीवन-दर्शन और शांति व करुणा के संदेश को प्रस्तुत किया गया। इसके बाद 9 अगस्त को प्रतिनिधियों ने भीमबेटका के प्रागैतिहासिक शैलाश्रयों का दौरा किया। दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया, रूस और चीन समेत कई देशों के प्रतिनिधियों ने हजारों वर्ष पुराने शैलचित्रों को देखा और प्रारंभिक मानव जीवन तथा सभ्यता के विकास से जुड़े इन प्रमाणों को करीब से समझा।

BRICS Delegates Reaction: सांची और भीमबेटका से प्रभावित हुए विदेशी प्रतिनिधि

मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक विरासत और भोपाल के आतिथ्य को लेकर अलग-अलग देशों के प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव भी साझा किए। इंडोनेशिया के संस्कृति मंत्री फदली ज़ोन ने सांची के विशाल स्तूपों और भीमबेटका के प्राचीन शैलचित्रों को विस्मयकारी और समृद्ध अनुभव बताया।

क्यूबा के राजदूत जुआन कार्लोस मार्सन ने ‘भोपाल घोषणा पत्र’ को वैश्विक सांस्कृतिक संबंधों की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उनके अनुसार सांची और भीमबेटका की विरासत पूरी मानवता के लिए मूल्यवान है। ईरान दूतावास के डॉ. ओमिद बाबेलियन ने भोपाल की झीलों, बेगमों के ऐतिहासिक स्थापत्य, सांची के शांति संदेश और बारिश के बीच भीमबेटका के दौरे को यादगार बताया और मध्यप्रदेश सरकार व लोगों का आभार जताया।

ब्राजील के विदेश मंत्रालय से जुड़े लुकास गोडॉय विलेयला बारबोसा ने भीमबेटका को प्रत्यक्ष देखना अनोखा अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि यहां मानव सभ्यता और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों की प्राचीन निरंतरता साफ दिखाई देती है। दक्षिण अफ्रीका की प्रतिनिधि क्लिऑन नोआह ने भोपाल के लोगों के व्यवहार, आतिथ्य और स्थानीय व्यंजनों की तारीफ की। उन्होंने सांची और भीमबेटका की यात्रा को अपनी जीवन यात्रा का महत्वपूर्ण और यादगार अनुभव बताया।

MP Government Hospitality: प्रतिनिधियों के लिए विशेष आतिथ्य कार्यक्रम

इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन के दौरान मध्यप्रदेश सरकार की ओर से प्रतिनिधियों के लिए विशेष आतिथ्य की भी व्यवस्था की गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 8 अगस्त को कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में दोपहर के भोजन और सांची में रात्रिभोज का आयोजन किया। इन कार्यक्रमों में प्रतिनिधियों को औपचारिक चर्चाओं से अलग एक-दूसरे से बातचीत और मेलजोल का अवसर मिला।

सम्मेलन के साथ-साथ केंद्रीय संस्कृति मंत्री और संस्कृति सचिव स्तर पर अलग-अलग सहभागी देशों के साथ कई द्विपक्षीय बैठकें भी हुईं। इनमें आपसी सांस्कृतिक सहयोग बढ़ाने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई और आगे साथ काम करने पर सहमति बनी।

BRICS Cultural Festival 2026: भोपाल में दिखी दुनिया की सांस्कृतिक विविधता

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत संस्कृति मंत्रालय ने 6-7 अगस्त 2026 को भोपाल के ऐतिहासिक रवींद्र भवन में दो दिवसीय BRICS Cultural Festival आयोजित किया। महोत्सव में अलग-अलग देशों की संगीत और कला परंपराओं को मंच मिला। बेलारूस, ब्राजील, इंडोनेशिया, रूस और संयुक्त अरब अमीरात के कलाकारों ने अपनी पारंपरिक लोक और शास्त्रीय प्रस्तुतियां दीं। भारत की ओर से राजस्थान की प्रसिद्ध लोक नृत्य प्रस्तुति ‘मारू के रंग’ पेश की गई, जिसने भारतीय लोक संस्कृति के रंगों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सामने रखा।

BRICS Peace Song: ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ के साथ सांस्कृतिक एकता का संदेश

महोत्सव का खास आकर्षण ‘BRICS Peace Song’ की सामूहिक प्रस्तुति रही। इसमें सहभागी देशों के कलाकारों ने अपनी-अपनी राष्ट्रीय भाषाओं में भारतीय लोकाचार के संदेश ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ का सामूहिक गायन किया। इसके जवाब में भारतीय गान-वृंद ने भी सहभागी देशों की भाषाओं में इसी शांति मंत्र को दोहराया। इस प्रस्तुति ने अलग-अलग भाषाओं और संस्कृतियों के बीच संवाद और एकता का संदेश दिया।

Amritasya Madhya Pradesh: 125 से ज्यादा कलाकारों ने दिखाई MP की सांस्कृतिक यात्रा

मध्यप्रदेश संस्कृति विभाग की 35 मिनट की नृत्य-नाट्य प्रस्तुति ‘अमृतस्य मध्यप्रदेश: भारत के हृदय की एक नृत्य-नाट्य यात्रा’ महोत्सव का प्रमुख आकर्षण रही। इसमें 125 से अधिक कलाकारों ने शास्त्रीय, लोक और जनजातीय नृत्य शैलियों के जरिए मध्यप्रदेश की प्रागैतिहासिक काल से आधुनिक समय तक की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक यात्रा को मंच पर उतारा।

प्रस्तुति में ‘ओंकार - सृष्टि की शुरुआत’, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, राजा भोज की नगरी, मां नर्मदा की पावन धारा और आगामी सिंहस्थ महाकुंभ-2028 की सांस्कृतिक चेतना को शामिल किया गया। उन्नत कोरियोग्राफी और इमर्सिव मल्टीमीडिया तकनीक के जरिए इसे एक भव्य दृश्य अनुभव का रूप दिया गया।

Project Mausam, Greater India और Gyan Bharatam बने प्रदर्शनी के आकर्षण

सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर और मिंटो हॉल परिसर में भारत की सभ्यतागत विरासत तथा दुनिया के साथ उसके पुराने संबंधों को दिखाने वाली तीन विशेष प्रदर्शनियां भी लगाई गईं।

Project Mausam

प्रोजेक्ट मौसम प्रदर्शनी में हिंद महासागर के समुद्री रास्तों के जरिए भारत के प्राचीन व्यापारिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत संपर्कों को प्रदर्शित किया गया।

Greater India

बृहत्तर भारत प्रदर्शनी में दक्षिण-पूर्व एशिया और दुनिया के दूसरे हिस्सों में भारतीय कला, स्थापत्य, दर्शन और संस्कृति के ऐतिहासिक प्रभाव तथा विस्तार को सामने रखा गया।

Gyan Bharatam

ज्ञान भारतम् प्रदर्शनी में भारत की प्राचीन पांडुलिपियों, वैज्ञानिक उपलब्धियों, खगोल विज्ञान और सदियों पुरानी मौखिक ज्ञान परंपराओं की झलक दिखाई गई।

इन तीनों प्रदर्शनियों ने ब्रिक्स प्रतिनिधियों को भारत की उस सांस्कृतिक परंपरा को समझने का अवसर दिया, जिसमें ज्ञान, शांति और वैश्विक कल्याण को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।

Bhopal BRICS Summit: ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ का वैश्विक संदेश

भोपाल में आयोजित 11वीं ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठक ने यह दिखाया कि आज सांस्कृतिक कूटनीति सिर्फ औपचारिक बैठकों और कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रह गई है। यह देशों के बीच रिश्तों को मजबूत करने और लंबे समय तक सहयोग का आधार बनाने वाला महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है।

अप्रैल 2026 में वर्चुअल बैठक से शुरू हुई प्रक्रिया जून में वाराणसी और फिर अगस्त में भोपाल तक पहुंची। इसका अंतिम परिणाम ‘भोपाल घोषणा पत्र’ के रूप में सामने आया। स्वैच्छिक कलाकार रजिस्ट्री, साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म, UNESCO के लिए साझा नामांकन, सांस्कृतिक संपदा की वापसी, AI और डिजिटल तकनीक का जिम्मेदार इस्तेमाल तथा कलाकारों के अधिकारों की सुरक्षा जैसे फैसले इस प्रक्रिया के प्रमुख परिणाम रहे।

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता में संस्कृति से जुड़े इस पूरे ट्रैक ने नीतिगत चर्चा को व्यावहारिक पहल से जोड़ने की कोशिश की है। भोपाल सम्मेलन ने मध्यप्रदेश की पर्यटन क्षमता और ऐतिहासिक-सांस्कृतिक विरासत को भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रमुखता से सामने रखा। साथ ही ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ के संदेश के जरिए वैश्विक शांति, आपसी सम्मान और साझा सांस्कृतिक विरासत के लिए एक व्यापक रोडमैप का संदेश दिया।

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