CM मोहन यादव ने संतों को बताया समाज की ताकत, बोले- खुद कुछ नहीं चाहते, सभी के कल्याण की करते हैं कामना

Published : Sep 19, 2026, 08:57 PM IST
Swami Satyamitranand Giri Jayanti

सार

उज्जैन में स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि की 94वीं जयंती पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने संतों को समाज की ताकत बताते हुए कहा कि वे खुद के लिए कुछ नहीं चाहते, बल्कि सभी के कल्याण की कामना करते हैं।

भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को कहा कि संत समाज के लिए बिना किसी निजी इच्छा के काम करते हैं और सभी वर्गों के कल्याण की कामना करते हैं। संत अपनी साधना के साथ समाज की समस्याओं और चुनौतियों पर भी विचार करते हैं और लोगों को सही दिशा दिखाते हैं। मुख्यमंत्री 19 सितंबर को उज्जैन में ब्रह्मलीन स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज के 94वें प्राकट्य दिवस महोत्सव में शामिल हुए। जहां उन्होंने संतों को समाज की सबसे बड़ी ताकत बताया।

संत समाज को दिखाते हैं सही रास्ता- सीएम

मुख्यमंत्री ने कहा कि संतों का जीवन समाज के लिए समर्पित होता है। वे अपनी आध्यात्मिक साधना के साथ समाज के सामने आने वाली परेशानियों, विकास और दूसरी चुनौतियों पर भी चिंतन करते हैं। उनके मार्गदर्शन से समाज को आगे बढ़ने की दिशा मिलती है। उन्होंने कहा कि सूर्य देवता की तरह अग्निवर्ण वस्त्र पहनने वाले संत अपने लिए कुछ नहीं चाहते। वे गृहस्थ जीवन जीने वालों से लेकर समाज के हर वर्ग के कल्याण की कामना करते हैं। संतों के मुख से निकलने वाली वाणी पूरे वातावरण को सकारात्मक बनाती है।

सीएम मोहन यादव ने स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि को किया याद

महोत्सव में मुख्यमंत्री ने स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि सनातन धर्म, वैदिक संस्कृति और राष्ट्रभाव के प्रमुख प्रवक्ताओं में रहे। उन्होंने हरिद्वार में भारत माता मंदिर की स्थापना की थी। जगद्गुरु शंकराचार्य और महामंडलेश्वर के रूप में उन्होंने देश-विदेश में भारतीय आध्यात्मिक परंपरा को आगे बढ़ाने का काम किया। उनका 94वां प्राकट्य दिवस समारोह उनकी स्मृति, शिक्षाओं और सेवा को समर्पित रहा। कार्यक्रम के दौरान अतिथियों ने पुस्तकों का विमोचन भी किया।

सिंहस्थ 2028 की तैयारियों पर भी बात

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि उज्जैन में दो साल बाद सिंहस्थ महापर्व होने जा रहा है। इसे लेकर प्रदेश सरकार की ओर से तैयारियां लगातार की जा रही हैं। विकास और जरूरी सुविधाओं से जुड़े काम चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ के दौरान केवल सुविधाओं और बुनियादी ढांचे पर ही ध्यान नहीं दिया जा रहा, बल्कि आध्यात्मिक चेतना से जुड़े पहलुओं पर भी काम किया जा रहा है। संतों का मार्गदर्शन इस पूरे आयोजन में महत्वपूर्ण रहेगा।

महाकाल महालोक के बाद बढ़ा श्रद्धालुओं का आना

मुख्यमंत्री ने उज्जैन में बढ़ते धार्मिक पर्यटन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 में महाकाल महालोक बनने के बाद उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, पिछले साल 8 करोड़ से ज्यादा तीर्थयात्रियों ने उज्जैन के दर्शन किए। इस साल ये संख्या 12 करोड़ के पार जाने की उम्मीद है। उन्होंने उज्जैन को धर्म के साथ-साथ काल गणना, विज्ञान, आध्यात्मिकता और दर्शन से जुड़ी नगरी बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां वैदिक काल गणना की परंपरा को आधुनिक तरीके से आगे बढ़ाते हुए वेधशाला भी विकसित की गई है।

उज्जैन से लेकर इंदौर तक नई संभावनाओं का जिक्र

मुख्यमंत्री ने कहा कि करीब 300 साल पहले तक दुनिया में समय निर्धारण से जुड़ी गणनाओं में उज्जैन की खास भूमिका थी। उत्तरायण, दक्षिणायन और सूर्य मध्याह्न जैसी गणनाओं के मूल सिद्धांत आज भी यहां की परंपरा में मौजूद हैं। उन्होंने इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र में बन रही नई संभावनाओं का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, आईटी पार्क से लेकर डीप टेक रिसर्च पार्क तक कई क्षेत्रों में विकास हो रहा है और ये क्षेत्र व्यापार-व्यवसाय के बड़े केंद्र के रूप में आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बनी इन संभावनाओं में संतों के आशीर्वाद की भी भूमिका रही है।

संतों की मौजूदगी में हुआ पादुका पूजन

कार्यक्रम में स्वामी गोविंददेव गिरि जी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि जी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी ललितानंद गिरि जी महाराज, साध्वी प्रज्ञा भारती संतौ देवी और आईडी शास्त्री समेत कई संत और गणमान्य लोग मौजूद रहे। कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गेहलोत, राज्यसभा सांसद बालयोगी उमेश नाथ जी महाराज, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल समेत कई जनप्रतिनिधि भी कार्यक्रम में शामिल हुए। स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज ने कार्यक्रम में आशीर्वचन दिए। इसके बाद स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज की पादुका का पूजन किया गया। ये पूरा आयोजन स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज के सान्निध्य में हुआ, जो भारत माता मंदिर समन्वय सेवा ट्रस्ट और भारत माता जनहित ट्रस्ट, हरिद्वार के अध्यक्ष भी हैं।

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