Project Cheetah के तहत मादा चीता CCB-2 को कूनो से गांधी सागर वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी भेजा जाएगा। 20 सितंबर को CM मोहन यादव उसे रिलीज करेंगे।

भोपाल/मंदसौर। मध्य प्रदेश में Project Cheetah के तहत चीतों के संरक्षण और उनके लिए नए प्राकृतिक आवास तैयार करने की दिशा में एक और कदम बढ़ाया जा रहा है। बोत्सवाना से भारत लाई गई मादा चीता CCB-2 को अब कूनो नेशनल पार्क से गांधी सागर वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी में शिफ्ट किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 20 सितंबर को CCB-2 को गांधी सागर में रिलीज करेंगे। यह स्थानांतरण केवल एक चीते को दूसरे क्षेत्र में भेजने तक सीमित नहीं है। Project Cheetah के अगले चरण में अलग-अलग क्षेत्रों में चीतों की आबादी विकसित करने की योजना के तहत इसे अहम कदम माना जा रहा है।

CCB-2 कब और कहां से भारत आई थी?

मादा चीता CCB-2 का जन्म बोत्सवाना के घांजी में हुआ था। करीब ढाई साल की उम्र में वह 28 फरवरी 2026 को भारत लाई गई थी। इसके बाद उसे कूनो नेशनल पार्क में रखा गया और निर्धारित अवधि तक क्वारंटीन किया गया। क्वारंटीन अवधि पूरी होने के बाद मई में CCB-2 को कूनो के खुले जंगल में छोड़ा गया। यहां उसने भारतीय परिस्थितियों के मुताबिक खुद को तेजी से ढाला और खुले जंगल में रहकर अपनी अनुकूलन क्षमता दिखाई।

Gandhi Sagar Wildlife Sanctuary में अब होंगे 4 चीते

अब CCB-2 को गांधी सागर वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी में मौजूद चीतों के साथ रखा जाएगा। इसके बाद गांधी सागर में चीतों की संख्या बढ़कर चार हो जाएगी। इनमें दो नर और दो मादा चीते शामिल होंगे। CCB-2 के पहुंचने से गांधी सागर में चीतों के संरक्षण और प्रजनन कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की दिशा में भी मदद मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश में चीतों के लिए एक से अधिक सुरक्षित और उपयुक्त क्षेत्र विकसित करने की योजना को भी गति मिलेगी।

Project Cheetah में क्यों अहम है CCB-2 का ट्रांसफर?

Project Cheetah का एक बड़ा उद्देश्य केवल कूनो में चीतों की संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों में उनकी आबादी को विकसित करना भी है। इसके लिए चीता मेटापॉपुलेशन तैयार करने की योजना पर काम किया जा रहा है। केंद्र सरकार के आधिकारिक Project Cheetah फ्रेमवर्क में कूनो-गांधी सागर लैंडस्केप में लंबे समय में 60 से 70 चीतों की मेटापॉपुलेशन विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। ऐसे में CCB-2 का गांधी सागर जाना इस व्यापक योजना का हिस्सा है।

कूनो से गांधी सागर तक चीतों का विस्तार होने से मध्य प्रदेश में उनके लिए उपलब्ध प्राकृतिक आवास का दायरा बढ़ेगा। साथ ही, भविष्य में अलग-अलग क्षेत्रों में चीता आबादी को बनाए रखने की रणनीति को भी मजबूती मिल सकती है।