MP Project Cheetah: कूनो नेशनल पार्क में भारत में जन्मी मादा चीता KGP12 ने चार शावकों को जन्म दिया। इसके साथ भारत में चीतों की संख्या 52 से बढ़कर 56 हो गई है।
कूनो नेशनल पार्क से आई खबर सिर्फ चार नन्हे शावकों के जन्म की नहीं है, बल्कि भारत में चीता पुनर्स्थापना की उस यात्रा का नया पड़ाव है, जो चार साल पहले शुरू हुई थी। 18 सितंबर 2026 को भारत में जन्मी मादा चीता KGP12 ने चार शावकों को जन्म दिया। इसके साथ देश में जीवित चीतों की संख्या 52 से बढ़कर 56 हो गई है।
KGP12 ने दिए चार शावकों को जन्म
मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में भारत में जन्मी मादा चीता KGP12 ने चार नए शावकों को जन्म दिया है। इस घटनाक्रम को प्रोजेक्ट चीता के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। नए जन्म के साथ भारत में जन्मे चीतों की संख्या भी 36 हो गई है।
2022 में शुरू हुई थी चीता वापसी
भारत में प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत 17 सितंबर 2022 को हुई थी। तब नामीबिया से 8 चीते कूनो लाए गए थे। इसके बाद फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 और फरवरी 2026 में बोत्सवाना से 9 चीते भारत पहुंचे। इन पुनर्स्थापना प्रयासों के साथ देश में चीतों का प्राकृतिक प्रजनन भी हुआ और अब आबादी 56 तक पहुंच गई है।
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कूनो में अब 53 चीते
नए शावकों के जन्म से पहले कूनो में 49 चीते थे, जबकि गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में 3 चीते मौजूद थे। चार शावकों के जुड़ने के बाद कूनो में कुल 53 और मध्यप्रदेश में 56 चीते हो गए हैं। इससे यह भी सामने आता है कि चीता संरक्षण का दायरा अब कूनो से आगे बढ़कर गांधी सागर तक पहुंच चुका है। प्रोजेक्ट चीता का शुरुआती लक्ष्य भारत में चीतों को दोबारा बसाना था। अब देश में जन्मे चीतों की नई पीढ़ी इस अभियान को अगले चरण में ले जा रही है। KGP12 के चार शावकों को जन्म देने से भारत में चीता प्रजनन की प्रक्रिया को एक और महत्वपूर्ण बढ़ावा मिला है।
PM मोदी की पहल, MP में संरक्षण पर जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल से शुरू हुई चीता पुनर्स्थापना यात्रा को मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में आगे बढ़ाया जा रहा है। वन विभाग, वन्यजीव विशेषज्ञ, पशु चिकित्सक और मैदानी अमला चीतों की सुरक्षा, स्वास्थ्य, निगरानी और आवास प्रबंधन पर लगातार काम कर रहे हैं। चार नए शावकों का जन्म इस सफर में एक ऐसा पड़ाव है, जहां चीता वापसी की कहानी अब नई पीढ़ी के जन्म की कहानी भी बन रही है।
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