MP News: गंगा दशहरा से जल गंगा संवर्धन तक, जल संरक्षण को जन आंदोलन बना रही सरकार

Published : May 24, 2026, 10:41 PM IST
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सार

गंगा दशहरा के अवसर पर जल संरक्षण के महत्व को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी की जल योजनाओं और मध्यप्रदेश के जल गंगा संवर्धन अभियान पर जोर दिया गया। जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाकर भविष्य के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य हो रहा है।

भारतीय संस्कृति में नदियों को केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि देवी स्वरूप माना गया है। इनमें मां गंगा का स्थान सबसे ऊंचा माना जाता है। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाने वाला गंगा दशहरा पर्व गंगा नदी के पृथ्वी पर अवतरण की स्मृति में मनाया जाता है। इसे गंगा दशहरा, गंगा दशमी और दशहरा के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व जल के महत्व और उसके प्रति कृतज्ञता का प्रतीक माना जाता है। गंगा का अर्थ केवल एक नदी नहीं, बल्कि पवित्र और स्वच्छ जल से भी जुड़ा है। यही कारण है कि जल संरक्षण को आज देश के विकास और भविष्य से जोड़कर देखा जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जल संरक्षण को बनाया जन आंदोलन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जल संरक्षण को राष्ट्रीय स्तर का जन आंदोलन बनाने की दिशा में कई बड़े कदम उठाए हैं। उन्होंने “जल है तो कल है” और “हर घर जल” जैसे संकल्पों को देशव्यापी अभियान का रूप दिया। उनके नेतृत्व में जल शक्ति मंत्रालय का गठन किया गया। साथ ही जल जीवन मिशन, नमामि गंगे, अमृत सरोवर मिशन और जल शक्ति अभियान जैसी योजनाओं ने देश में जल संरक्षण को नई दिशा दी है। इन योजनाओं के माध्यम से गांवों और शहरों में जल संरचनाओं का निर्माण, नदी संरक्षण, वर्षा जल संचयन और भूजल रिचार्ज पर विशेष काम किया जा रहा है।

अमृत सरोवर और कैच द रेन अभियान से बढ़ा जल संरक्षण

अमृत सरोवर योजना के तहत देश के प्रत्येक जिले में 75 जलाशयों के निर्माण और पुनर्जीवन का लक्ष्य रखा गया। अब तक 70 हजार से अधिक अमृत सरोवर तैयार किए जा चुके हैं। इससे वर्षा जल संग्रहण, सिंचाई और भूजल स्तर में सुधार देखने को मिला है। इसी तरह “कैच द रेन” अभियान ने वर्षा जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने का काम किया। प्रधानमंत्री मोदी लगातार इस बात पर जोर देते रहे हैं कि पानी बचाना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। देशभर में चेकडैम, रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम और पारंपरिक जल स्रोतों के पुनरुद्धार से जल संकट को कम करने में मदद मिली है।

जल संरक्षण से सुधर रही देश की जल स्थिति

जल संरक्षण अभियानों का असर अब जमीन पर दिखाई देने लगा है। कई क्षेत्रों में भूजल स्तर बढ़ा है और जल संकट वाले इलाकों में राहत मिली है। ओवर-एक्सप्लॉइटेड जल इकाइयों की संख्या में भी कमी दर्ज की गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उद्देश्य केवल योजनाएं शुरू करना नहीं, बल्कि जल संरक्षण को लोगों की आदत और संस्कृति का हिस्सा बनाना है। बच्चों को “वॉटर वॉरियर” बनाने और समाज में जिम्मेदारी की भावना विकसित करने पर भी लगातार जोर दिया जा रहा है।

मध्यप्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान बना बड़ा जन आंदोलन

प्राकृतिक जल संसाधनों से समृद्ध मध्यप्रदेश भी जल संरक्षण की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। राज्य सरकार द्वारा चलाया जा रहा “जल गंगा संवर्धन अभियान” प्रदेश स्तर पर बड़ा जन आंदोलन बन चुका है। वर्ष 2025 में यह अभियान 19 मार्च से 30 जून तक चलाया गया था और वर्ष 2026 में भी इसे व्यापक स्तर पर जारी रखा गया है। इसका उद्देश्य जल स्रोतों का संरक्षण, पुनर्जीवन और संवर्धन करना है। अभियान के तहत नदियों, तालाबों, बावड़ियों, कुओं और चेकडैम का गहरीकरण, साफ-सफाई और पुनर्निर्माण किया जा रहा है। साथ ही वर्षा जल संचयन और भूजल रिचार्ज पर भी बड़े पैमाने पर काम हो रहा है।

किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों को मिल रहा बड़ा लाभ

मध्यप्रदेश कृषि आधारित राज्य है, जहां खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था जल पर निर्भर करती है। बढ़ती आबादी, अनियमित बारिश और गिरते भूजल स्तर ने जल संकट को गंभीर बनाया है। जल गंगा संवर्धन अभियान के जरिए खेत तालाब, स्टॉपडैम, रिज-टू-वैली मॉडल और नई जल संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। इससे किसानों को सिंचाई सुविधा मिल रही है और उनकी आय बढ़ाने में मदद मिल रही है। प्रदेश में लगभग 2,500 करोड़ रुपये की लागत से जल संरक्षण से जुड़े कार्य किए जा रहे हैं। ग्राम पंचायतों, महिलाओं, युवाओं और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी भी इस अभियान की बड़ी ताकत बन रही है।

जल संरक्षण के साथ सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण

मध्यप्रदेश की प्राचीन बावड़ियां, तालाब और पारंपरिक जल संरचनाएं प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान हैं। इनके जीर्णोद्धार से न केवल जल संरक्षण को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि पर्यटन और सांस्कृतिक गौरव को भी मजबूती मिल रही है। पानी चौपाल जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को ड्रिप सिंचाई, कम पानी वाली फसलों और आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी जा रही है। इससे समाज में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ रही है।

जल संरक्षण को जनभागीदारी से सफल बनाने की जरूरत

जल गंगा संवर्धन अभियान केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि सामूहिक भागीदारी का अभियान बन चुका है। इसका उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षित और समृद्ध भविष्य तैयार करना है। जल संरक्षण को जीवनशैली का हिस्सा बनाना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। यदि आज जल स्रोतों को बचाया जाएगा, तभी भविष्य में जल संकट से बचा जा सकेगा।

(लेखक- मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री हैं)

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