Jal Surakshit Viksit MP: मध्यप्रदेश में बेकार पानी बनेगा कमाई का जरिया, निवेश और रोजगार के खुलेंगे रास्ते

Published : Nov 06, 2026, 09:52 AM IST
Jal Surakshit Viksit MP

सार

मध्यप्रदेश सरकार ने नई जल पुनर्चक्रण नीति-2026 का प्रारूप जारी किया। 2037 तक उपचारित सीवेज के 50% पुनः उपयोग का लक्ष्य, उद्योगों और खेती को मिलेगा फायदा।

भोपाल। मध्यप्रदेश में जल संरक्षण और पानी के बेहतर इस्तेमाल को लेकर राज्य सरकार एक नई पहल करने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार ने उपचारित अपशिष्ट जल यानी सीवेज ट्रीटमेंट के बाद मिलने वाले पानी को दोबारा उपयोग में लाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इसी कड़ी में इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित 'अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0' के दौरान मध्यप्रदेश उपचारित अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण एवं पुनः उपयोग नीति-2026 का प्रारूप जारी किया गया।

इस नीति के प्रारूप को आम लोगों, विशेषज्ञों और संबंधित पक्षों के सुझावों के लिए सार्वजनिक किया गया है। सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में प्रदेश की शहरी आबादी और औद्योगिक गतिविधियां तेजी से बढ़ेंगी। ऐसे में पानी की मांग भी बढ़ना तय है। इस चुनौती से निपटने के लिए सीवेज से उपचार के बाद मिलने वाले पानी को बेकार समझने के बजाय एक उपयोगी संसाधन के रूप में इस्तेमाल करने की योजना बनाई गई है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का जोर प्रदेश के हर नागरिक को सुरक्षित, समृद्ध और पर्यावरण के लिहाज से बेहतर जीवन उपलब्ध कराने पर है। सरकार की यह नीति उनके 'सबका साथ, सबका विकास और सर्वसमावेशी कल्याण' के विजन के अनुरूप तैयार की गई है। इसके जरिए पेयजल और भूजल पर बढ़ते दबाव को कम करने के साथ ही जल प्रबंधन को अधिक टिकाऊ बनाने की कोशिश होगी।

Madhya Pradesh Water Policy 2026: 2037 तक उपचारित पानी के 50% पुनः उपयोग का लक्ष्य

मध्यप्रदेश में तेजी से बढ़ते शहरीकरण, औद्योगिक विस्तार और पानी की लगातार बढ़ती जरूरत को देखते हुए जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन जरूरी हो गया है। नई नीति का मुख्य उद्देश्य सीवेज के उपचार के बाद उपलब्ध पानी का अधिक से अधिक इस्तेमाल सुनिश्चित करना है।

नीति के तहत प्रदेश में एकत्रित होने वाले सीवेज का निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुसार 100 प्रतिशत उपचार करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही उपचारित अपशिष्ट जल के दोबारा उपयोग के लिए अलग-अलग समयसीमा भी तय की गई है। सरकार ने इसके लिए तीन चरणों में लक्ष्य निर्धारित किए हैं। वर्ष 2027 तक उपचारित पानी का 20 प्रतिशत, वर्ष 2030 तक 30 प्रतिशत और वर्ष 2037 तक 50 प्रतिशत पुनः उपयोग सुनिश्चित करने की योजना है। इससे पेयजल के स्रोतों पर निर्भरता कम होगी और उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकेगा। सरकार की कोशिश है कि पानी की हर बूंद का उपयोग हो और मध्यप्रदेश भविष्य की जरूरतों के लिए जल-सुरक्षित राज्य बन सके।

Treated Wastewater Reuse: उद्योग से लेकर सड़क सफाई तक होगा उपचारित पानी का इस्तेमाल

नीति में उपचारित अपशिष्ट जल के इस्तेमाल के लिए कई क्षेत्रों की पहचान की गई है। इसका उपयोग मुख्य रूप से ऐसे कामों में किया जाएगा, जहां पीने योग्य पानी की जरूरत नहीं होती। इसमें उद्योगों, निर्माण कार्यों, उद्यानों और लैंडस्केपिंग जैसे कामों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अलावा सड़क सफाई, सार्वजनिक और अन्य परिसरों में शौचालय फ्लशिंग, अग्निशमन तथा उपयुक्त कृषि और सिंचाई कार्यों में भी उपचारित पानी का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा। इस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि इन कामों के लिए साफ पेयजल का इस्तेमाल कम किया जा सकेगा। इससे पीने के पानी की उपलब्धता बनाए रखने और भूजल संसाधनों पर दबाव घटाने में मदद मिलेगी।

Water Quality and Public Health: दोहरी पाइपलाइन से सुरक्षित रहेगा पेयजल

उपचारित अपशिष्ट जल का दोबारा इस्तेमाल करते समय जनस्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा को भी ध्यान में रखा गया है। नीति के प्रारूप में जल गुणवत्ता के निर्धारित मानकों का पालन, नियमित निगरानी और वितरण व्यवस्था को सुरक्षित बनाने पर जोर दिया गया है। इसके लिए पेयजल और उपचारित अपशिष्ट जल की आपूर्ति व्यवस्था को पूरी तरह अलग रखने का प्रावधान किया गया है। दोहरी पाइपलाइन प्रणाली के जरिए दोनों तरह के पानी का वितरण अलग-अलग होगा, ताकि उपचारित पानी किसी भी स्थिति में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था में न मिले। सरकार का उद्देश्य है कि उपचारित पानी का उपयोग बढ़ाने के साथ लोगों की सेहत और पर्यावरण पर कोई प्रतिकूल असर न पड़े।

MP Urban Infrastructure: स्टोरेज, टैंकर स्टेशन और पाइपलाइन नेटवर्क का होगा विकास

उपचारित पानी को दोबारा उपयोग में लाने के लिए केवल सीवेज ट्रीटमेंट पर्याप्त नहीं होगा। इसके भंडारण, परिवहन और वितरण के लिए भी मजबूत व्यवस्था विकसित करनी होगी। इसी जरूरत को देखते हुए नीति में उपचारित जल के भंडारण केंद्र, परिवहन और वितरण नेटवर्क, टैंकर फिलिंग स्टेशन तथा दोहरी पाइपलाइन जैसी सुविधाओं के विकास पर जोर दिया गया है। इन परियोजनाओं से प्रदेश में शहरी बुनियादी ढांचे का विस्तार होगा। साथ ही निर्माण, संचालन और रखरखाव से जुड़े क्षेत्रों में निवेश के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। इससे रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

PPP Model: निजी निवेश और सरकारी योजनाओं से मजबूत होंगी जल पुनर्चक्रण परियोजनाएं

उपचारित अपशिष्ट जल के पुनर्चक्रण से जुड़ी परियोजनाओं को लंबे समय तक आर्थिक रूप से मजबूत बनाए रखने के लिए नीति में कई वित्तीय विकल्प शामिल किए गए हैं। इसके तहत सार्वजनिक-निजी भागीदारी यानी पीपीपी मॉडल को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके अलावा केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं, कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) तथा उपचारित पानी की बिक्री से मिलने वाले राजस्व का उपयोग भी किया जा सकेगा। इस व्यवस्था से जल पुनर्चक्रण परियोजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने में मदद मिलेगी। साथ ही निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ने से नई तकनीक, निवेश और बेहतर संचालन व्यवस्था को भी प्रोत्साहन मिल सकता है।

MP Water Management Policy: निगरानी के लिए बनेगी उच्चस्तरीय समिति

नीति को प्रभावी तरीके से लागू करने और तय लक्ष्यों को समय पर हासिल करने के लिए मजबूत निगरानी व्यवस्था का भी प्रस्ताव है। इसके अंतर्गत राज्य स्तर पर एक उच्चाधिकार प्राप्त संचालन समिति और तकनीकी प्रकोष्ठ बनाया जाएगा। यह व्यवस्था अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने, उपचारित पानी की मांग का आकलन करने और उसकी दरें तय करने जैसे महत्वपूर्ण कामों को देखेगी। इसके साथ ही परियोजनाओं की प्रगति और जल गुणवत्ता की नियमित निगरानी भी की जाएगी। इससे नीति के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने में मदद मिलेगी।

Viksit Madhya Pradesh 2047: जल संरक्षण के क्षेत्र में नई पहचान बनाने की तैयारी

मध्यप्रदेश उपचारित अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण एवं पुनः उपयोग नीति-2026 का प्रारूप प्रदेश में जल प्रबंधन की व्यवस्था को नई दिशा देने की कोशिश है। इसका मकसद सीवेज से उपचार के बाद मिलने वाले पानी को एक उपयोगी संसाधन बनाना है, ताकि पेयजल और भूजल पर निर्भरता कम की जा सके। इससे जल संरक्षण के साथ पर्यावरण सुधार और शहरी सेवाओं की कार्यक्षमता बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है। वहीं, अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 के जरिए सरकार, उद्योग जगत और निजी निवेशकों के बीच सहयोग बढ़ाने की भी कोशिश की जा रही है।

सरकार की योजना है कि आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश को जल प्रबंधन के मामले में अधिक सक्षम और आत्मनिर्भर बनाया जाए। यह पहल 'विकसित मध्यप्रदेश@2047' के लक्ष्य को हासिल करने और भविष्य की शहरी एवं औद्योगिक जरूरतों के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

PREV

मध्य प्रदेश में सरकारी नीतियों, योजनाओं, शिक्षा-रोजगार, मौसम और क्षेत्रीय घटनाओं की अपडेट्स जानें। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर सहित पूरे राज्य की रिपोर्टिंग के लिए MP News in Hindi सेक्शन पढ़ें — सबसे भरोसेमंद राज्य समाचार सिर्फ Asianet News Hindi पर।

Read more Articles on

Recommended Stories

MP Greenfield Corridor: 5 नए फोरलेन कॉरिडोर से बदलेगी कनेक्टिविटी, इन शहरों को मिलेगा फायदा
धनतेरस पर मोहन यादव देंगे बड़ा तोहफा! गांव के लोगों को मिलेगा मकान का मालिकाना हक