
भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में 22 जून को मंत्रालय में आयोजित कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। मंत्रिपरिषद ने मुख्यमंत्री कन्या विवाह सहायता योजना और कल्याणी विवाह सहायता योजना के संचालन को 1 अप्रैल 2026 से अगले पांच वर्षों तक जारी रखने के लिए 1,740 करोड़ 57 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की।
मुख्यमंत्री कन्या विवाह सहायता योजना वर्ष 2006 से प्रदेश में संचालित की जा रही है। इस योजना के तहत गरीब, जरूरतमंद, निराश्रित और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की विवाह योग्य कन्याओं, विधवाओं और परित्यक्ताओं के सामूहिक विवाह के लिए प्रति हितग्राही 55 हजार रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 के दौरान योजना के अंतर्गत 1 लाख 72 हजार 905 हितग्राहियों को 989 करोड़ 80 लाख 62 हजार रुपये से अधिक की सहायता राशि प्रदान की गई। यह योजना महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। साथ ही सामूहिक विवाह के माध्यम से वैधानिक विवाह आयु सुनिश्चित करने में भी मददगार साबित हो रही है।
राज्य में विद्यार्थियों की शैक्षणिक पहुंच और शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के उद्देश्य से कैबिनेट ने शासकीय माध्यमिक विद्यालयों को हाई स्कूल तथा हाई स्कूलों को हायर सेकेंडरी विद्यालयों में उन्नत करने के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दी।
स्वीकृत योजना के अनुसार वर्ष 2026-27 में 75 माध्यमिक विद्यालयों को हाई स्कूल तथा 100 हाई स्कूलों को हायर सेकेंडरी विद्यालय में परिवर्तित किया जाएगा। इसी प्रकार वर्ष 2027-28 और 2028-29 में भी प्रतिवर्ष 75 माध्यमिक विद्यालय और 100 हाई स्कूल उन्नत किए जाएंगे।
विद्यालय उन्नयन योजना के लिए अनुमानित 635 करोड़ 24 लाख रुपये के व्यय प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है। विकसित मध्यप्रदेश@2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2029 तक 100 प्रतिशत सकल नामांकन दर हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्य में 315 नए हाई स्कूल और 214 हायर सेकेंडरी स्कूलों की आवश्यकता चिन्हित की गई है। यह आवश्यकता जिला स्तर की मैपिंग, जनसंख्या और यू-डाइस आंकड़ों के आधार पर तय की जाएगी। सांदीपनि विद्यालयों के कैचमेंट क्षेत्र में विद्यालयों का उन्नयन नहीं किया जाएगा।
प्रदेश में वर्तमान में हाई स्कूल स्तर पर सकल नामांकन दर 75 प्रतिशत तथा हायर सेकेंडरी स्तर पर 55 प्रतिशत है। कक्षा 8 से 9 में संक्रमण दर 77 प्रतिशत और कक्षा 10 से 11 में 68 प्रतिशत दर्ज की गई है। सरकार का मानना है कि विद्यालयों की दूरी अधिक होने से विद्यार्थियों का नामांकन और नियमित उपस्थिति प्रभावित होती है, जिससे ड्रॉपआउट दर बढ़ती है। इसी समस्या को दूर करने के लिए यह निर्णय लिया गया है।
कैबिनेट ने किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर अल्पकालीन फसल ऋण उपलब्ध कराने की योजना के लिए नई शर्तों को मंजूरी दी है। नई व्यवस्था के तहत खरीफ और रबी सीजन के लिए अलग-अलग देय तिथि निर्धारित करने की बजाय वार्षिक एकल ऋण सीमा लागू की जाएगी। इसमें नकद और वस्तु ऋण की अलग-अलग उप-सीमा निर्धारित रहेगी।
योजना के अनुसार किसानों द्वारा पहली बार ऋण निकासी किए जाने की तिथि से 12 माह की अवधि को ऋण की देय तिथि माना जाएगा। अल्पकालीन फसल ऋण लेने वाले किसानों को 1.25 प्रतिशत सामान्य ब्याज अनुदान दिया जाएगा, जबकि निर्धारित समय सीमा के भीतर ऋण चुकाने वाले किसानों को 4 प्रतिशत अतिरिक्त प्रोत्साहन ब्याज अनुदान भी मिलेगा।
प्रदेश में यह योजना वर्ष 2012-13 से लागू है। इसके तहत 3 लाख रुपये तक के अल्पकालीन फसल ऋण पर समय पर भुगतान करने वाले किसानों से कोई ब्याज नहीं लिया जाता। राज्य सरकार और केंद्र सरकार के ब्याज अनुदान के माध्यम से किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराया जाता है।
कैबिनेट ने मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप शाजापुर जिले के शुजालपुर में सत्र 2026-27 से नए शासकीय विधि महाविद्यालय की स्थापना को मंजूरी दे दी है। इसके लिए शैक्षणिक वर्ग के 9 और अशैक्षणिक वर्ग के 8 पदों सहित कुल 17 नए पद सृजित किए जाएंगे। साथ ही 2 करोड़ 39 लाख 92 हजार रुपये की वित्तीय स्वीकृति भी प्रदान की गई है। आवश्यक कार्रवाई के लिए उच्च शिक्षा विभाग को अधिकृत किया गया है।
वर्तमान में जवाहरलाल नेहरू स्मृति शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, शुजालपुर में एलएलबी पाठ्यक्रम एक संकाय के रूप में संचालित है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों के अनुसार विधि शिक्षा के लिए पृथक विधि महाविद्यालय आवश्यक है। इसी कारण नए शासकीय लॉ कॉलेज की स्थापना की जा रही है।
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग से संबंधित लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (टीपीडीएस) के अंतर्गत परिवहन एवं कमीशन व्यय की प्रतिपूर्ति के लिए कैबिनेट ने 3,580 करोड़ 7 लाख रुपये की मंजूरी दी है। यह राशि 16वें केंद्रीय वित्त आयोग की अवधि यानी 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक योजना के निरंतर संचालन के लिए स्वीकृत की गई है।
कैबिनेट ने प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) तथा धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत होने वाले विद्युतीकरण कार्यों के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। भारत सरकार से प्राप्त केंद्रीय अंश पर देय एसजीएसटी की राशि राज्य सरकार द्वारा विद्युत वितरण कंपनियों को अंश पूंजी के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे जनजातीय क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को गति मिलेगी।
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