‘हेलो, मैं दिव्या बोल रही हूं’ से शुरू हुआ खेल 21.06 करोड़ के क्रिप्टो स्कैम तक पहुंचा। MP साइबर पुलिस ने BJP नेता जगदीश मालवीय को किया गिरफ्तार, 20 हजार से ज्यादा अकाउंट और 15 लेयर के मनी ट्रेल ने खोला बड़ा राज।

भोपाल: एक सामान्य सा WhatsApp मैसेज, एक मीठी सी शुरुआत और फिर... 21.06 करोड़ रुपये का गायब हो जाना! ग्वालियर के 70 वर्षीय चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक विजयवर्गीय को अंदाजा भी नहीं था कि स्क्रीन पर आई एक साधारण सी हाय उनके जीवन भर की कमाई को निगलने का जाल बुन रही थी। मध्य प्रदेश की साइबर पुलिस जब इस 'डिजिटल भूलभुलैया' में उतरी, तो उसके सामने जो सच आया, उसने पूरे प्रदेश के होश उड़ा दिए।

डिजिटल मायाजाल और 33 करोड़ का 'नकली' सपना

दिसंबर 2025 में शुरू हुआ यह खेल बहुत ही सस्पेंस से भरा था। "दिव्या" नाम की संदिग्ध महिला ने खुद को इन्वेस्टमेंट एडवाइज़र बताकर बुजुर्ग CA का भरोसा जीता। धोखेबाजों ने पहले कुछ छोटा मुनाफा निकालकर निकालने की अनुमति दी-यह फ्रॉड की दुनिया का वह मीठा जहर था, जिसने शिकार को पूरी तरह अपने वश में कर लिया। स्क्रीन पर उनका बैलेंस 33 करोड़ रुपये दिख रहा था, लेकिन यह केवल एक छलावा था। जब पैसे निकालने की बारी आई, तो 'इनकम टैक्स' और 'रिस्क मार्जिन' के नाम पर और पैसे मांगे गए। जब तक CA साहब को अहसास हुआ कि वे लुट चुके हैं, तब तक 76 बैंक खातों में 106 ट्रांज़ैक्शन के जरिए 21 करोड़ से ज्यादा रुपये गायब हो चुके थे।

म्यूल अकाउंट्स का जाल और BJP नेता की सनसनीखेज गिरफ्तारी

जब साइबर एक्सपर्ट्स ने पैसों के डिजिटल पदचिह्नों का पीछा करना शुरू किया, तो इस महा-स्कैम की कड़ियां शाजापुर के एक बड़े ठिकाने से जुड़ीं। जांच में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब शाजापुर के BJP नेता और जिला पंचायत सदस्य जगदीश कुमार मालवीय को पुलिस ने धर दबोचा। जांच में खुलासा हुआ कि मालवीय के संस्थागत बैंक खाते में फ्रॉड के 50 लाख रुपये सीधे ट्रांसफर हुए थे। मात्र 2 प्रतिशत कमीशन के लालच में इस नेता ने अपने इंटरनेट बैंकिंग क्रेडेंशियल्स का इस्तेमाल कर अवैध पैसों को वैध बनाने (मनी-लॉन्ड्रिंग) का रास्ता दिया।

बैंकॉक की रंगीनियां और पावर कॉरिडोर का सस्पेंस

पुलिस की पूछताछ में यह चौंकाने वाली बात सामने आई कि मालवीय इस ठगी के पैसे से आलीशान जिंदगी जी रहा था और हाल ही में जुलाई में अपने दोस्तों के साथ बैंकॉक की सैर करके लौटा था। जब पुलिस ने मालवीय को हिरासत में लिया, तो राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया। कई प्रभावशाली लोगों ने फोन घुमाए और मामले में दखल देने की कोशिश की, लेकिन जैसे ही उन्हें पता चला कि यह मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा साइबर फ्रॉड है, सब पीछे हट गए।

76 अकाउंट, 106 ट्रांजैक्शन... पैसा आखिर गया कहां?

जांच में सामने आया कि पीड़ित से 76 अलग-अलग बैंक खातों में 106 ट्रांजैक्शन के जरिए 21 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम ट्रांसफर कराई गई। डिजिटल मनी ट्रेल खंगालने पर शुरुआती चरण में मालवीय से जुड़े खातों तक करीब 77 लाख रुपये पहुंचने का पता चला, जिसमें लगभग 50 लाख रुपये इसी फ्रॉड से जुड़े मिले। पुलिस का आरोप है कि मालवीय ने जिस संस्था के बैंक अकाउंट और इंटरनेट बैंकिंग की जिम्मेदारी संभाली, उसका इस्तेमाल रकम आगे भेजने के लिए किया। बदले में उसे कथित तौर पर 2 प्रतिशत कमीशन मिलता था।

15 लेयर और 20 हजार से ज्यादा अकाउंट... देखकर जांचकर्ता भी हैरान

इस घोटाले का फैलाव किसी हॉलीवुड थ्रिलर फिल्म से कम नहीं है। 21.06 करोड़ रुपये को पकड़ में आने से बचाने के लिए 15 अलग-अलग चरणों (Layers) में बांटा गया। जांचकर्ताओं ने 20 हजार से ज्यादा बैंक अकाउंट और डिजिटल ट्रांजैक्शन की पहचान की है। करीब 35 प्रतिशत रकम दक्षिण भारत के बैंक खातों के जरिए आगे बढ़ी। इसके बाद दक्षिण भारत से लेकर कर्नाटक, तमिलनाडु, गुजरात, राजस्थान और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के नेटवर्क में पहुंचा। पुलिस अब तक महज 2 करोड़ रुपये फ्रीज करने में कामयाब रही है। संजीव नयन शर्मा के नेतृत्व में साइबर पुलिस अब US कंट्री कोड वाले WhatsApp नंबरों, IP एड्रेस और पर्दे के पीछे छिपे असली इंटरनेशनल मास्टरमाइंड तक पहुँचने के लिए जाल बिछा रही है।

अब निशाने पर कौन? मास्टरमाइंड तक पहुंचने की तैयारी

पूछताछ में कथित तौर पर अंतरराज्यीय “मनी म्यूल” नेटवर्क से जुड़ी अहम जानकारी मिली है। अब साइबर पुलिस फर्जी क्रिप्टो प्लेटफॉर्म के मास्टरमाइंड, IP एड्रेस, WhatsApp चैट और US कंट्री कोड वाले नंबरों की जांच कर रही है। जांचकर्ताओं को शक है कि कई बैंक खाताधारक केवल कमीशन पर काम करने वाले मनी म्यूल हैं, जबकि असली ऑपरेटर डिजिटल लेनदेन की कई परतों के पीछे छिपे हैं। ऐसे में सवाल अब यही है-‘दिव्या’ कौन थी और 21.06 करोड़ के इस पूरे नेटवर्क का असली मास्टरमाइंड कौन है?